PAPI HARISHCHANDRA

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PAPI HARISHCHANDRA


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हँसी सपनों से भयभीत केजरीवाल …

Posted On: 7 Feb, 2015  
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Others Politics हास्य व्यंग में

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यह कैसा नारी सशक्तिकरण …?

Posted On: 26 Jan, 2015  
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Others Politics हास्य व्यंग में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

.एक तरफ मोदी जी गौ भक्तों को श्री कृष्ण भक्ति की अलख जगायेंगे वहीँ दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ जी भी राम भक्ति के लिए राम राम, राम मंदिर से राम भक्ति |………………………………………….. सम्पूर्ण हिंदुस्तान की भक्ति मोदी जी और योगी आदित्यनाथ जी का अनुसरण करते गली गली शहर शहर राज्यों मैं चैतन्य महा प्रभु की तरह ………………………………………….. हरे-कृष्ण, हरे-कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण, हरे-हरे। हरे-राम, हरे-राम, राम-राम, हरे-हरे…………. की धुन गाते गुजरती रहेगी | और उसमें से ……………………………………..नमो नारायण नमो नारायण से सम्पूर्ण हिन्दुस्तानियों को अच्छे दिनों का गोलोक मार्ग निकल आएगा | ………………………..पूर्व काल मैं भक्त नारद मुनि ने भी जन कल्याण के लिए …...”नमो नारायण “ ही जपा था | …………………

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

..”मोदी जी विरोधी पार्टी के अभक्तों को अपनी पार्टी मैं लेकर अभयदान देकर भक्त बना लेते हैं | उनके उद्धार के लिए उन्हें तुरंत इसी जन्म मैं पुरस्कृत कर मंत्री पद जैसे सम्मान प्रदान कर देते हैं | कितना ही पापी या भ्रष्टाचारी भी क्यों न हो वो भी भारतीय जनता पार्टी मैं आकर मोदी भक्ति के पुण्य से पाप रहित पुण्यात्मा हो जाता है | “………………………..मोदी जी जन समुदाय के उद्धार के लिए सदा प्रयास रत रहते हैं | किन्तु अभक्तों मैं भक्ति भाव को जगा कर ही उनका इस लोक और परलोक सुधारा जा सकता है | जो “मोदी के तीन साल” नामक बालक के माहात्म्य को जन जन तक पहुँचाकर ही किया जा सकता है | ..भगवन श्रीकृष्ण कि तरह मोदी जी भी अपने “मन की बात” से भक्ति भाव को जगाते जन कल्याण करते रहते हैं |

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन और स्वागत है ! सांसारिक जीवन में निरंतर चलने वाली जटिल और घोर तपस्या में कई महीने तक लीन रहने के बाद आप एक बार फिर इस व्यंग्य रचना के साथ मंच पर आये हैं ! लिखा तो आपने अच्छा है, लेकिन बगला मुखी की सिद्धि में आज के सभी नेता माहिर हैं, सिर्फ मोदी को ही दोष देना ठीक नहीं है ! रही बात ऋषियों की तो वो अनुपम और अतुलनीय हैं, क्योंकि वो सिर्फ मन्त्र की सृष्टि काने वाले ही नहीं, बल्कि मन्त्र द्रष्टा भी थे ! तभी तो वेदों को अपौरुषेय (किसी मनुष्य के द्वारा रचित नहीं) माना गया है ! गहरे ध्यान समाधि की दिव्य अवस्था में ऋषियों ने अपने मानस के अंतस में वेदमंत्र देखकर और सुनकर लिखे हैं ! तार्किक और बेहद सुन्दर साहित्यिक भाषाशैली में लिखित आपकी यह रचना पठनीय और संग्रहणीय है ! अच्छी और अनूठी प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

.महान योगी,कवि व्यंगकार माननीय मोदी जी का मन मोहन जी को दिया सम्मान राज्य सभा मैं विपक्षियों के समझ से बाहर रहा | महान लोगों की छत्र छाया सभी को सम्मान दे सकती है | जिस प्रकार भगवन श्री कृष्ण की गोबर्धन छाया मैं सभी गोकुल,मथुरा वृन्दावन वासी सुरक्षित सम्मानित बन गए थे | मनमोहन जी स्वयं भी माननीय रहे और उनकी उपमा भी मन मोहन भगवन श्री कृष्ण से करते मोदी जी भी महान कवियों मैं शामिल हो गए | योगी श्रीकृष्ण भक्तों को सर्वत्र मन मोहन (श्रीकृष्ण ) ही नजर आते हैं ,उनकी लीलाएं ही उन्हीं शक्ति देती हैं | भगवन श्रीकृष्ण के रेनकोट ने केवल अपने को नहीं सुरक्षित रखा बल्कि उन्होंने सभी ब्रज वासियों को सुरक्षा प्रदान की यही मन मोहन भगवन श्री कृष्ण की महानता रही तभी वे भगवन कहलाये | …………………………………….भगवन श्रीकृष्ण की जन्म स्थली ,लीला स्थली की महानता रेनूकोट(गोबर्धन पर्वत ) से ही वे भगवन रूप मैं स्थापित हुए | …………………………

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! बेहतरीन और पठनीय प्रस्तुति के लिये बहुत बहुत अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! आपने महाविद्वान रावण और हमारे भ्रष्ट व पाखण्डी नेताओं, दोनो की असलियत बयान कर दी है ! आपकी बात से सहमत हूँ कि "सत्य युग मैं राम को रावण सिद्ध कर देना या रावण को राम सिद्ध कर देना संभव नहीं था किन्तु कलियुग मैं यह सब कुछ सिद्ध कर देने की टेक्नोलॉजी विकसित हो चुकी है !" यह तकनीक नेताओं ने विकसित की है ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि "अपने अंदर छुपे रावण को कोई नहीं पहिचान पाता ! दूसरे को रावण सिद्ध करके अपने को राम सिद्ध कर देना ही लोक तंत्र की चाणक्य नीति बन गयी है !" बहुत सुन्दर और सार्थक रचना ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: deepak pande deepak pande

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीय हरिश्चन्द्र साहब, सादर अभिवादन! लोकसभा में प्रधान मंत्री का भाषण वाकई शानदार था जानदार था. पर राज्य सभा में वे स्वयम को रावण बनने से नहीं रोक सके! अहंकार और स्वगुणगान में लिप्त मोदी जी अपना अंतरपट नहीं देख सके! और बाकी तो जो है सो तो है ही ... बहुमत से बने प्रधान मंत्री हैं मर्यादा में रहमी चाहिए थी. पर मर्यादा का मन मर्दन कर उत्तेजित हो गए ..., अब परिणाम चाहे जो हो भविष्य तो उन ही हाथ में है भारत का भी और स्वयम उनका भी. उतने जोशीले और गर्म भाषण में भी श्रीमान जेटली जो उनके ही बगल में बैठे थे और पीछे बैठे थे मनोहर पर्रिकर जो कैमरे में सोते हुए देखे गए. किस स्वप्न में वे लीं थे यह तो वे ही जानें! ॐ शांति शांति शांति!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

…मोदी जी कहते हैं यह यज्ञ सात्विक है जबकि विपक्ष कहता है यह यज्ञ राजस भी नहीं है यह तामसी है | . कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी का उत्तर प्रदेश की भावी मुख्य मंत्री शीला दिक्षित जी को बलिदान करने का निश्चय ही यह सिद्ध करता है की यज्ञ के प्रति कितनी आस्था रखते हैं | राहुल गाँधी और विपक्ष की नजरों मैं १५० निरीह गरीबों की बलि चढ़ा दी गयी है | किसानों ,गरीबों के रोजगारों की बलि चढ़ा दी गयी है | व्यवसायों की बलि चढ़ाई जा रही है | इंजीनियरिंग कॉलेज ,मेडिकल कॉलेजों की बलि चढ़ रही है वे बंदी की तरफ उन्मुख होते जा रहे हैं | बड़ी बड़ी फैक्टरियां कर्मचारियों की छटनी कर उनकी बलि चढ़ा रही हैं | रोजगार की तो यह हालात है की बी टेक इंजीनियर सफाई कर्मचारी के लिए आवेदन कर रहे हैं ,उसमें भी वेरोजगारों का शोषण कि इंटरव्यू देने के पात्र वो ही बन रहे हैं जो गंदे नालों नालियों को पाहिले साफ करेंगे |+

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

सदियों से चला आता गंगा स्वच्छता अभियान कैसा रहे इसमें संशय हो सकता है किन्तु भारतीय जनता पार्टी मैं डुबकी लगते अवश्य स्वच्छता का आभाष हो जायेगा | लोक मैं स्वच्छ योगी ब्राह्मण सी छवि हो जाएगी | ॐ शांति शांति शांति... आदरणीय हरिश्चनद्र साहब, आपकी लिखी हर बात को समझना तो मेरे बूते के बाहर है... पर यही समझ में आया जो आपका शीर्षक और सारांश कहता है. एक शंका है सर जी, भाजपा के पास कला धन नहीं है या जो भी धन है वह गंग के सामान शुद्ध और पवित्र है... यहीं शंका होती है. पर राक्षस कुल समझ नहीं पायेगा. उसे न तो गीता ज्ञान है नहीं ब्राह्मणों का आशीर्वाद प्राप्त है.क्या मई समझ पाया हूँ आदरणीय! आप काफी दिनों बाद अवतरित हुए हैं. लगता है तपस्या में लीन थे. सादर !

के द्वारा: jlsingh jlsingh

ब्राह्मणत्व प्राप्त कर चुके भारत के प्रधान मंत्री जी के मोक्ष मार्ग का अनुसरण आम जनता अपने मन से भक्ति भाव से स्वीकार कर रही है | उनके लिए वे ही उद्धारक मोक्ष मार्ग के आराध्य हैं | श्रद्धा भक्ति पूर्वक आराधना ,अनुसरण करना ही केवल मोक्ष है | जब आराध्य ही ब्रह्मणैव प्राप्त हैं तो वे सब भी अपने आप भक्त ब्राह्मणत्व प्राप्त कहलायेंगे | भगवन राम के भक्त हनुमान स्वयं पूज्य हो गए तो क्यों नहीं वे भी पूज्य कहलायेंगे | जो भारतीय जनता पार्टी मैं आ गया ,जो मोदी जी का भक्त हो गया उसका मान सम्मान रूपी अच्छे दिन आ ही जायेंगे | उसका उद्धार मोक्ष अवश्य ही हो जायेगा | जो भारतीय जनता पार्टी मैं आ गया मानो वह मोदी भक्त बन गया और योगेश्वर मोदी का भक्त .राम भक्त हनुमान की तरह ही पूज्य बन जायेगा | राक्षस राज रावण के अनुयायी राक्षस ही कहलायेंगे किन्तु भगवन राम के अनुयायी भक्त बन, बानर हनुमान होते हुए भी पूज्य संकट मोचक बन जायेंगे |

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

लोक तंत्र का युग है केवल ब्राह्मण ही योगाचरण करते ईश्वर साक्षात्कार करके मोक्ष कैसे पा सकता है | गैर ब्राह्मण भी मोक्ष के अधिकारी होने चाहिए | अतः भारत की सम्पूर्ण जनता सम्पूर्ण स्वच्छता पाकर मोक्ष्य मार्ग पर जानी चाहिए | योगाभ्यास से मन , स्वच्छता अभियान से शरीर और भूमि ,और नोट बंदी से आचरण शुद्ध हो जायेगा | तन मन और धन शुद्ध होते आचरण शुद्ध होते भ्रष्टाचार ,व्यभिचार का कहीं भी नाम और निशान नहीं रह पायेगा | सम्पूर्ण भारत ब्राह्मणत्व को पाकर मोक्ष पाता जायेगा| युग बदला अब भारत मैं केवल दो ही वर्ग हैं ,एक वे जो काले धन से काले होकर भ्रष्ट हो चुके हैं ,दूसरा वह जो काले धन से रहित स्वच्छ हो ब्राह्मणत्व पा चुके हैं | दूसरे अर्थों में सत्ताधारी दल जो काले धन का सर्वनाश कर आचरण में स्वच्छता लाना चाहती है |सर्वत्र ब्राह्मणत्व लाना ही उसका लक्ष्य है | दूसरी तरफ सम्पूर्ण विपक्ष जो काले धन को समाज के लिए राक्षशों ,अनार्यों , काले इंडियंस , शूद्रों की तरह बनाये रखना चाहता है ताकि उनका मोक्ष्य मार्ग जान सुलभ न हो सके और वे प्रलय तक उनके वोट बैंक से पोषित होते रहें |

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

प्रलय तो आनी ही है | प्राकृतिक तौर पर तो सुनिश्चित समय पर आएगी ही | किन्तु मनुष्य मैं शिव सी असीम शक्ति भी है जो समय से पाहिले प्रलय लाकर ॐ शांति शांति शांति ला सकती है | शांति को पाने का योग दिवस २१ जून योग के त्याग मार्ग से विश्व शांति दिवस तक भी शांति मार्ग न प् सका तो ,विश्व शांति दिवस पर युद्ध मार्ग से शांति के राह पर निकल पड़ा | …..शांति पाने के लिए ..महात्मा गाँधी का त्याग मार्ग उत्तम होगा या युद्ध मार्ग यह तो शांति पाने पर ही पता लगेगा | ……………………………...ॐ शांति शांति शांति जी आदरणीय हरिश्चंद्र साहब, शांति रूपी मौत तो आनी है इक दिन साथ लेकर जाएगी... अभी एक ही मन्त्र नमो मन्त्र है, जिसे जाप करने से शांति मिलनी तय है चाहे वो अमित शाह हों या बंसल, या फिर राहुल गाँधी ही क्यों न हों! सादर

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आपका व्यंग्य तो सदा की भांति सटीक ही है आदरणीय हरिश्चंद्र जी । महाभारत काल में भीम की छाती 56 इंच की रही होगी । उसने तो दुर्योधन को पराजित करके महाभारत के युद्ध में निर्णायक विजय एवं हस्तिनापुर का साम्राज्य प्राप्त कर लिया था । जो 56 इंच की छाती का ढिंढोरा पीटकर चुनाव में विजयश्री का वरण कर चुके हैं, अब उनकी छाती का माप लेकर देखा जाना चाहिए कि चुनावी दावा कितना सच्चा था । महात्मा गाँधी के नाम को भुनाते हुए आरंभ किया गया स्वच्छ भारत मिशन टांय टांय फ़िस्स हो चुका है । इस अति-प्रचारित अभियान का प्रभाव केवल असहाय जनता पर (स्वच्छ भारत प्रभार के माध्यम से) कर-भार बढ़ाए जाने रूप में ही सामने आया है । स्वच्छता तो आई नहीं, ज़ेब अवश्य हलकी हो गई । जनता पर तो दोहरी मार पड़ी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

जय श्री राम हरीश चन्द्र जी आप एक गंभीर विषय को भी कितनी दिलचस्पी से लिख कर लोगो पर प्रभाव डालते असली बात रखने में कला में माहिर है.आजकल बच्चो को माँ बाप हिंदी में नहीं अंग्रेज़ी में बोलने के लिए उत्साहित करते इंग्लिश बोलना आधुनिकता का पैमाना हो गया जो मैकाले ने कहा था सही हो रहा वैसे हिंदी फ़ैल रही है और दुसरी भाषा के मुकाबले ज्यादा तेजी से लेकिन हमारे नेताओ की गलती से राष्ट्र भाषा नहीं बन सकी.हर साल १४ सितम्बर को हिंदी दिवस मनाने से कुछ नहीं होगा इसके लिए हिंदी भाषी प्रदेश ज्यादा दोषी है.!मोदीजी ने हिंदी में भाषण दे कर एक अच्छी परंपरा शुरू की और विश्वास है की आपकी और हम सबका प्रयत्न हिंदी को उसकी सही जगह दिलाने में सफल होगा.और मिलले की मानसिकता ख़तम होगी.सुन्दर लेख के लिए आभार.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आपका व्यंग्य लेख सदा की ही भांति प्रभावशाली है आदरणीय हरिश्चंद्र जी । मेरे निजी विचार एवं विश्लेषण के अनुरूप संदीप कुमार को एक गहन एवं व्यापक षड्यंत्र के माध्यम से फंसाया गया है । वे पाखंडी हैं, इसमें संदेह नहीं क्योंकि वे नित्य अपनी पत्नी के चरण-स्पर्श करने का दावा सार्वजनिक रूप से किया करते थे । लेकिन मैं आशुतोष के विचार से सहमत हूँ । संबंधित महिला कोई दूध की धुली नहीं है । उसने जो किया, अपनी सहमति से किया और कोई ऐसा लाभ पाने के लिए किया जिसका अब वह उल्लेख भी नहीं कर रही है । उसका वक्तव्य पूरी तरह से झूठा है एवं उसका संदीप कुमार के विरुद्ध पुलिस में मामला दर्ज़ करना केवल अपने परिजनों की दृष्टि में स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने का प्रयास है । स्वयं को धवल दर्शाने के लिए दूसरे पर कालिमा पोतना कोई नई बात तो है नहीं । राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा द्वारा आशुतोष को स्पष्टीकरण हेतु बुलाना निरर्थक तथा अपने पद की शक्ति का अनावश्यक प्रदर्शन ही था ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: shakuntlamishra shakuntlamishra

कृष्ण के समकालीन जिस व्यक्ति का आप संदर्भ दे रहे हैं आदरणीय जवाहर जी, उसका नाम पौण्ड्रक था । पुंड्र देश का राजा पौण्ड्रक स्वयं को पौण्ड्रक वासुदेव कहा करता था क्योंकि उसके चापलूस सभासद उसे बहकाया करते थे कि वह कृष्ण से किसी भी तरह कम नहीं था और पृथ्वी का उद्धार करने हेतु वही अवतरित हुआ था । इस बहकावे में आकर पौण्ड्रक वासुदीव ने कृष्ण जैसे वस्त्राभूषण, कृत्रिम हस्त तथा कृत्रिम अस्त्र-शस्त्र भी धारण करना आरंभ कर दिया था । अन्य शब्दों में वह कृष्ण का बहुरूप धारण करके रहा करता था । जब उसने अहंकार में आकर कृष्ण को संदेश भिजवाया कि वे अपने प्रतीक चिह्न धारण करना छोड़ दें तथा उसकी (अर्थात् वास्तविक वासुदेव की) शरण में आ जाएं तो कृष्ण ने उससे युद्ध करने का निर्णय लिया एवं काशी पर चढ़ाई कर दी जहाँ के राजा के पास वह उन दिनों रह रहा था । युद्ध में पौण्ड्रक कृष्ण का ही वेश धरकर आया एवं अपने मित्र काशीनरेश के साथ ही कृष्ण के हाथों मारा गया ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: achyutamkeshvam achyutamkeshvam

संस्कारी व्यक्ति यदि समाज और लोक कल्याण के लिए राजनीतिक मार्ग से चुनता है तो वह सच्चे तौर सद्गुरु कहलाने योग्य होगा | ……..एक ब्राह्मण गुरु का लक्ष्य केवल लोक कल्याण ही होगा | नैतिकता प्राथमिक होगी | …..समाज मैं लूट खसूट ,भ्रष्टाचार को समाप्त करना ही गुरु मन्त्र होगा | ……………समाज मैं ब्राह्मणत्व का प्रसार करना ही धर्म होगा | ……….काम क्रोध ,मद लोभ,मोह का दमन ही शांति मार्ग होगा | …….समाज मैं व्याप्त आतंकवाद.रूपी क्षत्रियता , लूट खसूट रूपी वैष्यता ,और अज्ञान नैतिकता विहीन शूद्रता का नाश केवल ब्राह्मणत्व रूपी गुरु मन्त्र ही कर सकता है | ….इसलिए ब्राह्मणत्व के प्रसार के लिए ब्राह्मण ही सद्गुरु ज्ञान दे सकता है | ब्राह्मण यदि महिला हो तो और भी प्रभावी सद्गुरु ज्ञान प्रदान करते समाज मैं शांति मार्ग ल सकती है |

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

किस तरह जीते हैं यह लोग बता दो यारो ,हमको भी जीने का अंदाज बता दो यारो ............इतना   भी नहीं जानते मोदी जी का योग एह लोक के लिए होता है | ...९० प्रतिशत क्षुद्र जनता लड़की को भ्रूण मैं ही मार देना चाहती है लड़कों से दहेज़ की आश लिए पालती है । योग तो इस लोक के लिए होता है अतः गुजारे के लिए योग करते स्वसथ रहते चोरी ,चकारी , छल कपट ,छीना झपटी ,बलात्कार से अपनी पीडी का विकास कर ही लेते हैं । काम ,क्रोध मद लोभ मोह से इह लोक तो सुधर ही जाता है । कहा जाता है यह मरने के बाद नरक के कारण बनते हैं । किंतु मोदी जी कहते हैं बर्तमान मैं जीयो ।अतः पहले बर्तमान ही सुधारते हैं । चाणक्य नीति का पालन करते धार्मिक रुप धारण करते यह सब करके उच्च बर्ग मैं आने का प्रयास करते रहते हैं । लाखों करोडो मैं कोइ तो अपना वर्ण बदलने मैं सफलता पा ही लेता है । और ओम शांति शांति पा लेता है ।

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

शोभा जी आभार ,वास्तव मैं शीर्षासन ऐसा आसन है जिसके करने से शरीर के सभी भीतरी और बाहरी अंगो का व्ययाम हो जाता है ।जबकि अन्य आसन किसी विशेष अंग के लिए होते हैं । ऱाजनीति मैं भी य़ही होता है । सबसे अधिक समय तक शीर्ष पर रहने वाले सिद्ध जवाहर लाल , इंदिरा गाॅधी ,और मनमोहन सिंह रहे । बाकि अन्य तो शवासन के बाद पुनः शीर्षासन नही कर पाये । कांगेस शवासन करके पुनः शीर्षासन सिद्रध कर लेती है । शवासन तो हर योगासन के बाद अवष्य करना होता है ।लालू नीतेश ने तो योग दिवस का बहिष्कार करते संगीत दिवस मनाया । और केजरीवाल को योग का निमंत्ण ही नहीं दिया गया ।ओम शांति शांति 

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: Shobha Shobha

कहीं कोई गायत्री मन्त्र का सिद्ध भी इन दोनों सिद्धों को परास्त करता हुआ अंतरिक्ष मैं धूमकेतु सा उदय भी हो सकता है | क्यों की कम उम्र के बालक शीर्षासन सिद्ध करते अन्य योगासन सुगम बना लेते हैं | आदरणीय सर जी, आपके निहतार्थ तो बहुत ही गूढ़ होते हैं, इसलिए पाठक आपसे प्रश्न पूछते हैं. कई बार मैं भी प्रश्न कर लेता हूँ. शिष्य को अगर नहीं समझ में आये तो पूछ लेना चाहिए. गुरु अगर ज्ञानी है तो जिज्ञाषा शांत कर देता है. इधर स्वामी जी भी वाचालासन करते ही जा रहे थे, उन्हें मोदी जी ने गुरुमंत्र दे दिया है. अगर तब भी न संभले तो तो बहिर्गमनासन निश्चित है. आप लिखते रहें हम सब लाभान्वित होते रहें! सादर! ओम शांति शांति शांति!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जितेन्द्र जी युग बहूत बदल चुका है । प्ले व्याय ही आजकल के आदर्श हैं । उनकी बोडी और एक्टिंग ही दिल ललचाती है । यदि वे रेप भी करते हैं तो भी आदर्श होते हैं । 50 की उम्र मैं भी अविवाहित रह कर भी स्वयं भी  आनंदित है और दूसरे को  भी आनंदित करते  हैं ।उपमा मैं वही कुछ आता है जिसका अनुभव होता है । यदि महिलाओं को यह बयान गंदा लगता है तो क्यों नहीं  सलमान की फिल्मों का वहिष्कार करती हैं । राजनीति और व्यवसाय के नये नये हथकंडे बनाये जाते हैं कालिदास को महान कवि कालिदास सिद्ध कर देना चतुरों का बायें हाथ का खेल होता है । अपनी अपनी ओम शांति शांति तलासना पडती है पता नहीं कहाॅ मिलेगी 

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

सलमान द्वारा दी गई उपमा निश्चय ही अनुपयुक्त है तथा आलोचना की पात्र है लेकिन आपने जिस तथ्य को अपने विलक्षण व्यंग्यात्मक ढंग से रेखांकित किया है, उसे भी नकारा नहीं जा सकता । बल एवं सामर्थ्य का दुरुपयोग करके दूसरे व्यक्ति पर कोई अनुचित कृत्य आरोपित करना अथवा उसे शारीरिक, मानसिक या सामाजिक रूप से प्रताड़ित करना भी इसी श्रेणी में आता है । अपनी दुर्बलता अथवा सामर्थ्यहीनता के कारण जो आततायी के हाथों पीड़ित होने पर विवश होता है, उसके हृदय की स्थिति वही जानता है । कई बार ऐसी पीड़ाएं अभिव्यक्त तक नहीं की जा पातीं और उत्पीड़ित केवल मन-ही-मन घुटकर रह जाता है । और ऐसे अनसुने ही नहीं, अनकहे भी दर्द को सहने वाले के हिस्से में चुटकी भर हमदर्दी तक नहीं आती । सदा सत्य बोलने वाली आपकी लौह-लेखनी को मेरा प्रणाम ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

..यह सब एक कपोल कल्पित धारणा नहीं | ऐसा हमारे देश के महान संत पुरुष महेश योगी जी पहिले ही कर चुके हैं | किन्तु मैनेजमेंट क्षमता संकुचित परिवेश ही पा सकी |देश से अधिक वह विदेश में लोकप्रिय थे. नीदरलैंड में तो उनके द्वारा बनाई गई मुद्रा “राम” का चलन भी है. नीदरलैंड की डच दुकानों में एक राम के बदले दस यूरो मिल सकते हैं. ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस के पास इतनी संपत्ति है जितना भारत के एक राज्य की वार्षिक कमाई. 250 अरब की संपत्ति के मालिक महर्षि महेश योगी कई कामों में पैसा लगाते थे जैसे शिक्षा और प्रॉपर्टी. बिटलस के साथ उनकी निकटता की वजह से ही उन्हें विदेशों में इतनी सफलता मिली. लेकिन उनके पास जो बेशुमार दौलत है उसमें से ज्यादातर पैसा धर्म के नाम पर ही कमाया गया है.|

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीय सद्रगुरु जी अभिवादन , दुल्हन वही जो पिया मन भाये । धर्म वही जो राजनीती मन भाये । चिर काल से यही होता आया है । वरना हमारे सनातन धर्म को मनीषियों ने तपस्या करके स्थापित किया । बेद पुराण शास्त्रों की रचना की । जिनका आधार वैज्ञानिक था । उद्रेष्य सात्विकता पैदा करना था । जिसके लिए मन से बचन से और कर्म से शुद्धता पैदा करनी पडती थी । लोक परलोक सुधारने के लिए , धर्म के जितने भी कार्य होते हैं ,वे इसी लिए स्थापित किए गए । राजनीति का उद्रेष्रय केवल सत्ता होती है ।धर्म को सत्ता के हितानुसार बना दिया जाता है ।,,ओम शांति शांति को भी मन माफिक उछाला जाता है 

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आपकी चिरपरिचित व्यंग्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त विचार पूर्णतः उचित एवं स्वीकार्य हैं हरिश्चंद्र जी । देश को वास्तव में ही सब्ज़ी-मंडी बना दिया गया है और ऐसा करके ही विजय को अनुभूत किया जा रहा है । इस सब्ज़ी-मंडी की सीमा जम्मू-काश्मीर से पहले ही समाप्त हो जाती है । श्रीनगर में तो 'भारत माता की जय' बोलने वाले और तिरंगा लहराने वाले पुलिस के डंडे खाकर हवालात पहुँच गए हैं और पक्षपात तथा पूर्वाग्रह की अति यह है कि उन्हें पुलिस ने चिकित्सा-सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई है । धर्म और अधर्म की, देशप्रेम और देशद्रोह की मनमानी परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं । उनका वही अर्थ प्रचारित किया जा रहा है जो सत्ताधारियों के हितों के अनुकूल हो । आप ठीक कह रहे हैं कि आम जनता तो भद्रजनों का ही अनुसरण करती है । महाजनो येन गतः स पंथा ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

सभी धार्मिक आस्थाओं का नाश कर दिया जायेगा | ………………..क्या किसी अनिष्ट की परिकल्पना की जाएगी | सभी आराधक यही विचार मन मैं उपजायेंगे | स्त्रियां क्या असंकित मन से मन मैं पाप का भाव लिए शनि पूजन कर सकेंगी …….? क्या भूमाता ब्रिगेड और तृप्ति देसाई किसी अनिष्ट विहीन पूजा की गारंटी दे सकेंगी …….? जबकि शंकराचार्य स्वरूपानंद जी चेतावनी दे चुके हैं | वैसे ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियां शनि की साढ़ेसाती से प्रभाविक हो दंश भुगत रही हैं | देश अकाल से ग्रस्त है | आतंकवाद से भारत ही नहीं विश्व आक्रांत है | परंपरा को कायम रखना ही शनि के कुप्रभाव से शांति दे सकता है | वर्ना बक्री शनि के साथ गुरु चांडाल योग क्या गुल खिलाएगा …..?

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

श्री हरीश जी भारत माता की जय तो भावनात्मक विषय हैं जैसे मुस्लिम का खुदा निराकार है हमारे भगवान साकार ऐसे ही भारत माता हमारी जैसे आपने चित्र में दिखाईं कल्पना है मुस्लिम के लिए हिमालय से शुरू होती कन्या कुमारी तक फैली अनेक नदियों पठारों रेगिस्तान पहाड़ियों से शुशोभित शस्य श्यामला दोने तरफ बंगाल की खाड़ी व् अरब सागर हरीश जी लड़ाईयां राज्यों में होती हैं लेकिन अपनी धरती की रक्षा के लिए खड़ा सैनिक जब लड़ता है एक नारा होता है वह धर्म निरपेक्ष नहीं होता वहां न कोइ दल होता है न वोट बैंक एक ही बात होती है या तुम मुझे मार दो या मैं तुम्हें मार दूंगा एक एक इंच धरती के लिए जान दी जाती है भारत माता की जय ही रहेगी यह किसी भी तर्क से समझाई नहीं जा सकती

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री हरीश जी " लोक तंत्र के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले मीडिया को मुंह छुपाते शर्मसार होना पड़ रहा है | ग्रहण एक राहु के कारण होता है किन्तु बदनाम पूरे अंतरिक्ष के तारे हो जाते हैं |""वर्तमान समय मैं चांडाल सर्वाधिक क्रूर आतंकवादी को ही कहा जा सकता है |.देश द्रोही ,पार्टी द्रोही ,जाति द्रोही ,विचार द्रोही ,से भी चाण्डालों सा व्यव्हार किया जाता है |""कलियुग मैं चांडाल की छाया जीने की कला सिखाती है | गुरु को अपनी रक्षा के लिए राहु या राहु बुद्धि रूपी संरक्षक की जरुरत होती है |" बिलकुल सही 'सबसे नैतिक धर्म कर्म की बातें करने वाली राजनीतिक पार्टी भी अपने कुनबे मैं हिस्ट्री सीटर को सम्मान देती है | विधायक ,सांसद बनाती है | यही हाल है .किन्तु राजनीती इसमें भी चाणक्य नीति से सत्ता सुख भोग लेती है | राजनीतिज्ञ के लिए योग अच्छा हो या बुरा कोई फरक नहीं पड़ता है | चाणक्य मुर्ख राजनीतिज्ञ थे जो सत्ता सुख को नहीं स्वीकारा ,कलियुग के चाणक्य गुरु बुद्धिमान होते हैं | वे त्याग की शिक्षा तो दे सकते हैं ,प्रवचन तो दे सकते हैं किन्तु स्वयं त्यागी होना उन्हें कठिन लगता है |आलेख की हर पंक्ति मेने ध्यान से पढ़ी ग्रहों को सामने रख क्र आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है|

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सद्गुरु जी होली मुबारक , कन्हैया नाम ही कुछ ऐसा है जिसको सत्ता रुढ अपने अंत की आकासवाणी मान बैठते प्रहार करते हैं । कंस जैसे हजारों राजाओ का नाश करके धर्म की स्थापना की । इस कन्हैया को भी एक आकासवाणी ही सा माना जा रहा । सब कुछ हार चुके अर्जुन को तो साक्षात ही नजर आ रहा है । लेकिन यह कन्हैया तो सभी पार्टीयों का गोपियों की तरह लाडला मोहरा बन गया है । चाहे कैसे भी उसका उपयोग करो । उसमैं उद्धारक नजर आ रहा है । यहां तक की सत्ता रुढ का भी प्रिय मोहरा बनता जा रहा है । अब यह कन्हैया कैसे धर्म की स्थापना करते हैं । कन्हैया नाम जपना किसी भी भावना से हो मुक्ति देता ही है । ओम शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीय हरिश्चंद्र शर्मा जी ! होली की हार्दिक बधाई और लक्ष्य को वेधते बहुत अनोखे व सटीक व्यंग्य बाण चलाने के लिए बहुत बहुत अभिनन्दन ! आपने क्या खूब कहा है- "जे एन यूं के कन्हैया को अपने व्यंग वाणों से मारना हर व्यक्ति का धर्म बन जाता है | जैसे कोई चोर ,या पाकेटमार पकड़ा जाता है तो वहां राह गुजरते सभी अपना अपना धर्म दो चार हाथ जड़ कर निभा ही देते हैं | लगता है जिन्होंने हाथ जड़े हैं सभी चोर नहीं रहे | यह सिद्ध करना भी होता है |" प्रभु, कन्हैया को आप कब छोड़ रहे हैं ! कबसे उसे पकड़ के पीटे जा रहे हैं ! छोड़ दीजिये बच्चा है ! बच्चे की जान लेंगे क्या ! हालांकि कन्हैया ढेला बड़ा सटीक चलाता है ! ये बात अलग है कि कभी कभी उसका फेंका ढेला उसी को उलटे आ के लग रहा है और उसे घायल कर जा रहा है ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बहुत ही प्रभावशाली व्यंग्य हरिश्चंद्र जी जैसे की कि आपसे सदा ही अपेक्षा रहती है । वस्तुतः आधारभूत बिन्दु यही है कि किसी समय विशेष पर अधिक शक्तिशाली कौन है । जिसके पास किसी काल विशेष में सत्ता और अधिकार की शक्ति होती है, वह अपने विचार (या विकृति) को दूसरों पर थोपने का प्रयास करता ही है (और सफल भी होता ही है क्योंकि उस समय वह शक्तिशाली है) । सत्ताधारी वर्ग खोखले मुद्दों को उभारकर अपने ऐसे कार्यकलापों से जनसामान्य का ध्यान हटा देता है जो उसके हितों पर सीधे-सीधे विपरीत प्रभाव डालते हैं । 'भारत माता की जय' से उभरे विवाद का लाभ उठाकर पीपीएफ़ और केवीपी पर ब्याज़ दरों को घटा दिया गया है और इसे भी माननीय वित्तमंत्री जी राष्ट्रहित में लिया गया निर्णय ही बता रहे हैं । इससे पूर्व ईपीएफ़ की निकासी पर कर लगाकर कर्मचारियों की वृद्धावस्था के अवलंब पर डाका डालने का प्रयास किया गया था । भारतीय राजनेता जानते हैं कि जनता को निरर्थक विवादों में उलझाकर भटकाया जा सकता है, भरमाया जा सकता है और ठगा जा सकता है । यही वे अनवरत करते रहते हैं । आजकल देशप्रेम और देशद्रोह के प्रमाण-पत्र बांटे जा रहे हैं जिनका सारांश यही है कि जो हमारे साथ है वह देशप्रेमी है और जो हमारे साथ नहीं है वह देशद्रोही है ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीय हर्षचन्द्र जी, आपका अध्ययन एवं शोध काबिले तारीफ है. आपके सम्मान में यही कहूँगा कि "छुद्र नदी भर चली इतराई, जस थोड़े धन खल बौराई." विद्वान धीर गंभीर होते हैं और समय आने पर ही अपनी विद्वता का परिचय देते हैं. साथ ही एक बात और कहना चाहूँगा कि हमात्रे जितने भी धार्मिक ग्रन्थ हैं उनकी पूर्ण व्याख्यायुक्त उपलब्धता / और पढ़ने की अनिवार्यता भी जोर दिया जाना चाहिए. आज के नवयुवक अंग्रेजी में अमिश त्रिपाठी को पढ़ लेंगे पर क्लिष्ट भाषा में लिखी वेद, उपनिषद और गीता का कहाँ अध्ययन कर पाते हैं. श्री श्री ने भी बहुत कुछ दिखलाया पर ज्ञानवर्धन कितना करा पाये? और भी बहुत कुछ है जिसे सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक स्तर पर प्रचार प्रसार की जरूरत है. दोसरा भाग जब पढूंगा तब प्रतिक्रिया दूंगा. कन्हैया कहाँ इन सब चीजों को पढ़ेगा. वह तो बहुत जल्दी राजनीती में प्रवेश करने को आतुर है. केजरीवाल और डी राजा इंतज़ार करते रह गए वह ट्रैफिक जाम में फंस गया. खैर आपने जो भी बातें बताई हैं मननीय है. सादर अभिनंदन!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

महाशिवरात्रि के दिन महाप्रभु के दर्शन करानेवाले आदरणीय हरिश्चंद्र प्रभु की जय हो. आप कहाँ अंतर्ध्यान हो गए थे प्रभु. एक ही रास से हम सब नीरस हो चुके थे. अब व्यंग्य का पुट और कन्हैया का अवतार पूंजीवाद या साम्यवाद ... देखना है राष्र्ट्द्रोह या राष्ट भक्ति किसकी जीत होती है. कन्हैया को जड़ से मिटाने वाले छोटे मोटे असुर तो अपनी गति को प्राप्त हो गए हैं अब महिषासुर और महिषासुर मर्दनी की बारी है. भसहनों की प्रतियोगिता में नए नए प्रतियोगी भाग ले रहे हैं. यह दुनियां और भारत भूमि रंगमंच ही तो है.....ओम शांति शांति शांति ... कृपया फॉण्ट के रंगों का सही चयन करें स्लेटी रंग पढ़ने में दिक्कत होती है चश्माधारी को. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

कलियुग मैं मोदी जी अच्छे दिनों के लिए योग को जन सुलभ कर दुःख निवारण कर रहे हैं | ………अब योग के लिए किसी जाति,श्रद्धा भक्ति , ,धर्म संप्रदाय ,देश ,प्रदेश , स्त्री ,पापी पुण्यात्मा , गरीब अमीर ,का बंधन नहीं रहेगा | अब योग परलोक के लिए नहीं इस लोक के लिए ही ,मोक्ष्य की कामना से नहीं पुनर्जन्म की कामना से किया जायेगा | विकास के सुख भोगने के लिए पर्याप्त जीवन जो कम पड़ जायेगा | मैं तो कहता हूँ न केजरीवाल को भी योग का प्रचार जोर शोर से करना चाहिए. दिल्ली की जनता भी पूर्ण स्वस्थ होगी और ज्यादा की मांग नहीं करेगी. बिहार का मुंगेर पहले से ही योग का केंद्र रहा है अब दूसरा केंद्र गन्दी मैदान भी हो जाय तो कोई बड़ी बात नहीं होगी. लेकिन नीतिीश जी तो अमित शाह को ही बंद कमरे में योग करने की सलाह दे देते हैं. नितिन गडकरी तो मूत्राशन के मास्टर हैं ही ...पर यह क्या ऐसे समय में जेटली जी का विदेश दौेरा ? ...कोई बात नहीं कुछ मुद्रा योग कर ले ही आएंगे... ओम शांति शांति शांति

के द्वारा: jlsingh jlsingh

भगवन तो तपश्या का फल रावण को भी देते हैं भक्त प्रह्लाद को भी देते हैं | किस रूप मैं कौन से अच्छे दिन चाहिए विचार कर रख लो- मेरी समझ से जीतन राम ने नमो जाप किया और आम कटहल लीची की कामना किये हुए हैं उन्हें वरदान प्राप्त है मुख्य मंत्री निवास छोड़ने की जरूरत ही न पड़ेगी ... बिहार में दलित मुख्य मंत्री की सख्त आवश्यकता भी है ...नमो भक्ति का फल गिरिराज सिंह, राम विलास आदि भोग रहे हैं. जयललिता, सलमान आदि ने नमो भक्ति की तुरंत फल मिला शशि थरूर भी हाथ में झाड़ू पकड़ केटल क्लास की सैर की ...मामला ठंढे बस्ते में ... अब आम जनता दाल,मैगी के चक्कर में ही उलझी रहती है उसे क्या मिलेगा? मरने के बाद दो लाख रुपये ...ओम शांति शांति शांति!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: braj kishore singh braj kishore singh

के द्वारा: sadguruji sadguruji

यमुना जी पुनर्चिंतन हेतु आभार ...माननीय प्रधानमंत्री जी कोई सामान्य व्यक्ति नहीं रहे , ना ही उनकी धर्म पत्नी जसोदावेन । हम उन दोनों से एक मर्यादा की ही कामना कर सकते हैं ।एक सामाजिक सुधार के लिए हिन्दु धर्म की आस्था के लिए उन्हैं अपने अहं को त्याग देना चाहिए । हिन्दु ही नहीं समस्त भारतीय,यहाॅ तक विश्व एकटक आश लगाये बैठा है । अच्छे दिन आने वाले हैं । कितनी उम्मीद से जनता ने उन्हैं पूजा है । वे पुज्य ही बने रहें । यही लोक हित मैं होगा । घ्रणित राजनीति अपना सुरसा सा मुॅह खोलती जा रही है । जहाॅ वाचाल होना हानिकारक होता है वहीं मौन भी भ्रम का कारण होता है । जहाॅ तक मैं समझ रहा हूॅ मोदी जी ने अपनी पत्नी स्वीकार करके ,उनकी सुरक्षा करके संवाद का आगाज कर दिया है । पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार तो राम ने कर दिया । किंतु अपनी पत्नी सीता का उद्धार राम नहीं कर सके । राम तो चूक गये ,सीता को प्रथ्वी मैं समाना पडा । सीता सा मौन भी लोक के लिए अहितकर होता है । मौन को त्याग कर अपने अपने धर्म का पालन ही हितकर होगा । संकोचवश ,या अपने अपने अहंवश ऐसा हो जाता है कुछ पारिवारिक वरिष्ठ जन यह संकोच या अहं को दूर कर सकते है । यहाॅ तो सौभाग्य से दोनों सुशिक्षित ,सुस्थापित संयमी सतचरित्र हैं ओम शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

हरिश्चंद्र जी मौन की वज़ह यह भी है कि जब तक जसोदा बेन स्वयं अपने अधिकार की मांग ना करें कोई उनके व्यक्तिगत मामले में कुछ नहीं बोल सकता ..ऐसा कई बार हुआ है एक बार हम कुछ महिलाएं इसी तरह एक जोड़े के बीच सुलह कराने के उद्देश्य से बीच में पड़े थे और जो ड्रामा हुआ महिला ने स्पष्ट कहा 'मैं अपनी इच्छा से अपने पति से अलग रह रही हूँ दूर रह कर भी वे मेरे लिए पूज्य हैं आप सब अभी मेरे घर से चले जाइए ." किसी एक दिन जसोदा बेन भी आप जैसे कई लोगों को जो यह प्रश्न कर रहे हैं ऐसा ही ज़वाब देंगी भारतीय नारियां पति के सम्मान को लेकर बहुत सजग और संवेदनशील होती हैं .क्या पता यह उन्ही की मर्ज़ी हो की वे मोदी जी की ज़िंदगी में लौटना नहीं चाहती हों. और अतीत में कई ऐसी बातें आपसी संबंधों में हो जाती हैं जिनकी परछाईं पति के वर्त्तमान और भविष्य को धूमिल करे ऐसा भारतीय नारियां कम ही चाहती हैं ...इसलिए इस व्यक्तिगत मामले में पड़ना उचित नहीं समझती हूँ . आपका अतिशय धन्यवाद एक बार इस प्रतिक्रिया पर गौर अवश्य करें एक विवाहिता भारतीय नारी हूँ ....पति के व्यक्तिगत और सामाजिक छवि में संतुलन कैसे रखा जाता है समझ सकती हूँ.

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

श्री मान हरिश्चन्द्र जी अक्सर घरों में लडकियाँ सुसराल में से मायके बिठा दी जाती हैं उनमें मेरी भी मौसी की लडकी थीं उन्होंने अमेरिका जा कर MATHMATICSमें रिसर्च की और IITसे रिटायर हुई उनका बेटा भी IITमें नामी ऊचे पद पर था आज वह दुनिया में नहीं हैं जब मेरी बहन अमेरिका से लोटी उनका पति पशेमान हो कर उन्हें लेने आया वह नहीं गई फिर भी लिखता हूँ यह मोदी जी का घर नहीं है प्रधान मंत्री का घर है उस घर में एक भी एंट्री पूरे कुनबे की एंट्री होती हैं मोदी जी अपने घर को साफ़ सुथरा रखना चाहते हैं कभी सुना नहीं कोई उनका भाई भतीजा उनकी माँ उनके परिवार का व्यक्ति प्रधान मंत्री के घर में दिखा हो |उन्हें काम करनें दे बहुत काम करना है बेरोजगारी से बुरा हाल है कृपया उस पर हमें ध्यान रखना है |डॉ भारद्वाज

के द्वारा: drashok drashok

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सद्गुरु जी हिन्दु अपने धर्म को शास्त्र को प्रमाण मान कर चलते हैं । गीता को शास्त्रों का निचोड माना जाता है । और नरेन्द्रर मोदी जी तो गीता को महत्व देते ऱाष्ट्रीय धर्म ग्रंथ भी घोषित कर रहे हैं । .......गीता मैं भगवान श्रीक्रष्ण ने कहा है .................श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करते हैं वैसा वैसा ही अन्य साधारण जन करते हैं । वह जो प्रमाण कर देते हैं मनुष्य समुदाय भी उसी के अनुसार वरतने लग जाते हैं । ..............यदि मैं सावधान होकर कर्मों मैं ना बरतुॅ तो बडी हानि हो जाये , क्यों कि मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं ।..............स्वयं सिद्ध है लोक हित के लिए सतकर्मों का ही पालन करना चाहिए । या उन्हैं सतकर्म सिद्ध कर देना चाहिए । बाकी आप तो सद्गुरु हो आपका बचन अकाट्य माना जायेगा ओम शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: shakuntlamishra shakuntlamishra

के द्वारा: jlsingh jlsingh

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आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! दिन मंगलमय हो ! इधर बीच मंच पर मेरी कम उपस्थिति रही ! सोचा नारद जी की तरह नारायण नारायण करते हुए थोड़ा इंटरनेट की दुनिया के अन्य लोकों का भी विचरण कर लिया जाये ! उन लोकों में इस मंच के बहुत से महारथियों के साथ साथ आपके भी वैचारिक दर्शन हुए ! बहुत अच्छा लगा ! कुछ नवीनता भी जीवन में जरुरी है ! प्रस्तुत लेख में आपने आदरणीय आडवाणी जी के हाले-ए-दिल का बयान बखूबी किया है ! मुझे लगता है कि सबकुछ ठीक चल रहा था, बस उनका पाकिस्तांन जा के जिन्ना की बड़ाई करना उनके लिए घातक सिद्ध हुआ ! भाजपा में उनका योगदान सराहनीय तो है ही ! इस बात को मैं भी स्वीकार करता हूँ ! उत्तम प्रस्तुति के लिए आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

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आदरणीय श्री हरिश्चंद्र जी, सादर अभिनंदन! आप हम जैसे अज्ञानियों को भी गीता ज्ञान सिखाकर ही मानेंगे. कहाँ मूढ़मति यंत्रों के बीच विचरण करनेवाला मनुष्य और यंत्रवत मीडिया का प्रलाप ...ओह ये संताप! नहीं झेला जाता! पर भगवान कृष्ण की वाणी सुनकर परम शांति की अनुभूति होती है...."मेरी ब्रह्म रूप मूल प्रकृति सम्पूर्ण भूतों की योनि है अर्थात गर्भाधान का स्थान है और उस योनि मैं चेतन समुदाय रूप गर्भ को स्थापित करता हूँ | जड़ और चेतन के संयोग से सब भूतों की उत्पत्ति होती है | नाना प्रकार की योनियों मैं जितने शरीर धारी प्राणी उत्पन्न होते हैं ,प्रकृति तो उन सबकी गर्भ धारण करने वाली माता है और मैं बीज को स्थापित करने वाला पिता हूँ | " ओम शांति शांति शांति..सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

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भोला नाथ पाल जी अभिनंदन ,आपकी कविता की भावनाएं मेरे हरिश्चंद्री सत्य से साम्यता प्रदान करती ह्रदय को द्रवित कर रही थी आप जिस सत्य को खोज रहे हैं मैं भी उसी सत्य की खोज मै हूॅ सत्य अहिंसा का बीता युग ,आशा तरंगों का प्राण तार ,जीने का जतन से उपाय ढुॅढता हूॅ ,नामों के झुरमुट से व्याप्त नाम ढुॅडता हूॅ ,सपनों का यथार्थ ढुॅडता हूॅ,राजनेताओं के भ्रम के द्वार ढूॅडता हूॅ एक कवि को अलंकारो के भ्रम जाल से परे सत्य की खोज करते देखता हूॅ एक कवि को सत्य की खोज करना पथ पर किसी साथी का अनुभव करा रहा है । किस धर्म को , किस कर्म को , किस धर्म गुरु को , किस रिस्ते को , किस राजनेता को , किस राजनीतिक पार्टी को ,सत्य मानकर अनुकरण करे । राजनेताओं मै क्या कोई लाल बहादुर शास्त्री सा होगा कवियों मै कबीरदास मिल सकेगे । जितना आपकी खोज मैं डूबो उतना अपने को ही पाता हूॅ आपकी तरह भटकता ओम शांति शांति ही जपता रहता हूॅ

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! सादर अभिनन्दन ! कांग्रेस के प्रति आपका लगाव ही शायद आपके द्वन्द का कारण है ! यदि मोदी जी ने कहा है कि वर्तमान में जीने वाला ही स्वधर्मी है तो उन्होंने गलत नहीं कहा है ! हमारे व्यवहारिक जीवन में न भूत साथ देता है और न भविष्य,वहां तो सिर्फ वर्तमान ही काम देता है ! वस्तुतः जीवन सिर्फ और सिर्फ वर्तमान है ! सभी संत यही बात कहते हैं ! गुजरा हुआ नेता या डॉक्टर इस समय देश का और लोंगो का क्या भला कर सकता है ?मोदी जी की आज यदि बड़ाई हो रही है तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं ! देश में जब कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे,तब भी तो यही होता था ! किसी की प्रसंशा करना यदि भक्ति है तो उसकी बुराई करना भी किसी अन्य की भक्ति है ! मंच पर वैचारिक उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

आदरणीय सर, गीता का ज्ञान दुर्लभ और अमूल्य भी है, सबको कहाँ समझ में आता है, अंत मैं भगवन कहते हैं …..तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य की व्यवस्था मैं शास्त्र ही प्रमाण है | ऐसा जानकर तू शास्त्र विधि से नियत कर्म ही करने के योग्य है …”.सम्पूर्ण धर्मों को अर्थात सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को मुझ मैं त्यागकर तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान ,सर्वाधार परमेश्वर की शरण मैं आ जा | मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूंगा ,तू शोक मत कर... फिर आपने कृष्ण और अर्जुन को भी आज के परिप्रेक्ष्य में परिभाषित कर ही दिया है... जिस बात भाजपा या उनके चाहनेवालों को परहेज था, आज वही सब उनके लिए उचित लग रहा है ... जन समर्थन के साथ शक्ति बढ़ ही जाती है...फिर चाहे झाड़ू हो या शौचालय ...जय राम रमेश ने कहा था तब वो गलत था अब मोदी जी कहा रहे हैं तब तो ठीक ही कह रहे होंगे...धर्म की जय हो ,अधर्म का नाश हो प्राणियों मैं सद्भावना हो ,विश्व का कल्याण हो ..……………………………………………….ओम शांति शांति शांति

के द्वारा: jlsingh jlsingh

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आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! सुहावनी सुबह के पांच बजने वाले हैं ! नवरात्रि का ये समय सबके लिए मंगलमय हो ! आपने इस व्यंग्य लेख में मोदी जी द्वारा विदेशों में बोली गई हिंदी,ओबामा जी की पत्नी और मोदी जी की पत्नी की चर्चा की है ! मोदी जी कोई साहित्यकार नहीं हैं,जो शुद्ध हिंदी बोलें ! वो हिंदी को विदेशों में इतना सम्मान देने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं,इसीलिए बधाई के पात्र हैं ! ओबामा जी की अपनी पत्नी से इन दिनों कुछ संवादहीनता चल रही है और मोदी जी की भी यही स्थिति है ! मेरे विचार से दोनों देशों के व्यापक हित में ये एक महत्वहीन मुद्दा है ! मोदी जी की उपलब्द्धि देश को गौरवान्वित करने वाली है ! लेख की प्रस्तुति के लिए आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया डॉक्टर शोभा जी ! ‘हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा‘ गाने वाले देशभक्त मौलाना इकबाल बाद में देशद्रोही भी हो गए थे ! उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया था कि 'हिन्दोस्तान की जमीन पर नमाज पढ़ना भी.नापाक है !'ये बात आप की सही है कि हिन्दू मुसलमान सब के एक ही दुःख दर्द हैं,परन्तु ये लोग एक साथ जिन मोहल्लों में रहते हैं,वहां की दिक्ततों को और एक दूसरे के प्रति नफरत की भावना को बहुत नजदीक से मैंने देखा है ! वही सब दिक्क्तें और नफरत अक्सर दंगे और हिंसा का रूप धारण कर लेती है ! उस स्तर पर यानि मोहल्लों में हिन्दू और मुसलमानो के बीच प्रेम और भाईचारा कैसे कायम हो,ये एक बड़ी समस्या है ! देशभक्त और देशद्रोही होने की असली लड़ाई तो वहीँ लड़ी जा रही है ! आज धर्म धर्म न होकर एक माइंड गेम और माफियागिरी हो गया है ! एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना और आम पब्लिक की आपसी गाली-गलौज तो इसी मंच के जागरण ब्लॉग के एक लेख "मक्का-मदीना में गैर-मुस्लिम का जाना सख़्त मना है फिर भी इन्होंने मुस्लिम ना होते हुए भी मक्का में प्रवेश किया, जानिए कौन हैं ये" में देख लीजिये ! http://infotainment.jagranjunction.com/2014/06/15/non-muslims-cant-enter-makka-madina/

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! काफी दिनों के बाद आपकी वैचारिक उपस्थिति हुई है ! अभी दो दिन पहले आपको हमलोग याद कर रहे थे ! बहुत अच्छा व्यंग्य लेख ! आपकी शुभकामना फलित हो-सम्पूर्ण विश्व मैं सर्व शक्तिशाली विकसित देश हिंदुस्तान हो जायेगा | विकाश कि जड़ हिंदुस्तान से ही उगेगी | जिसके फल विश्व मैं बनते जायेंगे | ओबामा को पीछे छोड़ देने वाले नरेंद्र मोदी जी ही होंगे | अमेरिका ,चीन, जापान सब पानी भरते नजर आएंगे | रुपया ,डॉलर को भी पीछे धकेल देगा | आदरणीय हरिश्चंद्र जी,देशभक्ति वाली बात पर एक व्यंग्य लेख मंच को समर्पित कीजिये ! मुसलमानो पर आरोप लगता है,परन्तु क्या रिश्वत लेने वाले,अवैध काम करने वाले,साम्प्रदायिकता के बीज बोने वाले,गरीबों का शोषण करने वाले और भ्रस्ट नेता क्या ये सब हिन्दू लोग देसभक्त हैं ? मंच पर उपस्थित होने के लिये आपका स्वागत,अभिनन्दन और बधाई !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

अब क्या कहें पापी जी को जो कांग्रेसी मानसिकता का ही परिपोषण कर रहे हैं... हमें याद रखना चाहिये कि बदलना ही प्रकृति है... अडवानी जी निस्संदेह भाजपा के सबसे सफल नेता हैं जिन्होने पार्टी में नयी जान फूंकी और इस    मुकाम तक पहुंचाया । पर देश के बदलते परिदृश्य में जिस युवा जोश, आर्थिक सोच और कूटनीतिक चातुर्य की जरूरत है वह किसी ज्यादा युवा नेता में ही मिल सकती है।इसे आड्वानी जी का अनादर नहीं माना जाना चाहिये, बल्कि वक्त की जरूरत समझना चाहिये।अपने यहां वानप्रस्थ आश्रम का जो महत्व है, वह सिर्फ कितबों में लिखने के लिये नहीं है, उस पर अमल भी तो होना चाहिये।

के द्वारा: atulgupta atulgupta

आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! दिन मंगलमय हो ! इस लेख के लिए अभिनन्दन ! आप ने सही कहा है कि-"मुस्लिम देश हिन्दुस्तानी कहते हैं तो सिर्फ हिन्दू का ही बोध होता है | जो कि राजनीतिक लाभ के लिए ही इस्तेमाल होता है |"लेख के अंत में आप ने यथार्थ स्थिति को प्रस्तुत किया है-"हम सब भारतीय हैं ,इंडियन हैं यही हमारी पहिचान होगी | हम सब इंडियन ,भारतीय बन कर ही रहेंगे ..|" भारत को नवभारत कहना ज्यादा उचित है ! "हिंदुस्तान" शब्द सुनने-कहने में बहुत प्यारा लगता है,मन में गर्व का भाव भी पैदा होता है,परन्तु सच्चाई ये है कि हमारे देश और हिन्दुओं के लिए इससे खतरनाक और हानिकारक शब्द कोई दूसरा नहीं हो सकता है ! मुस्लिम आतंकवादी हमारे देश और हिन्दुओं के खिलाफ इसे एक नफरत फ़ैलाने वाले बम के रूप में प्रयोग कर रहे हैं ! कितनी विचित्र बात है कि मुसलमान दुनियाभर में अपने को मुसलमान कहकर गौरवान्वित महसूस करते हैं और हिन्दू अपने को सेकुलर बताकर मुसलमानो की निगाह में अच्छा बनने की कोशिश करते हैं ! ये देश कायदे से धर्मनिरपेक्ष भी कहाँ बन पाया हैं ! एक सामान नागरिक संहिता जबतक लागू नहीं होगी तबतक भारत को पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष नहीं कहा जा सकता हैं ! आदरणीय हरिश्चंद्र जी..वेद पाठ..भागवत सप्ताह के बाद भी ये सुपरहिट शो जारी रहेगा ! विरोध और समर्थन करने वाले सभी निंदा रस का भरपूर रसास्वादन कर रहे हैं ! इस देश में यही तो सबसे सुलभ और निशुल्क में प्राप्त आनंद हैं ! हमलोग भी यूँ ही रसास्वादन करते रहेंगे और हमलोग कर भी क्या सकते हैं ! सुबह सुबह मुस्कराहट और व्यंग्य का रसास्वादन कराने के लिए आभार ! मंच पर लिखने-पढ़ने की आजादी को जयहिंद करते हुए आपको और सभी ब्लॉगर मित्रों को पंद्रह अगस्त की बधाई !

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हरिश्चन्द्र जी आपका काफी समय बाद लेख देखने को मिला मैं आपको केवल एक प्रसंग का ही उदाहरण दूँगी आज के परिवेश में पिता अँधा था मतलब अपने व्यपार में मस्त और माँ ने भी बच्चों से उदासीन हो कर आखं पर पट्टी बांध ली बच्चे बेमुहार अभी तो जी लें आज के बच्चों को आप देख लें महाभारत पूरी कूटनीति और समाज शास्त्र है परिवार मे पढने की इजाजत क्यों नही थी वह इंसानी रिश्तों की चालाकी से परिबार को बचा कर रामायण का आदर्श पात्र बनाना चाहते थे |गीता में आपने कर्म का सिद्धांत नही पढ़ा कर्म वाद कर्म करो आज हम गीता भूल गये है साधन की पवित्रता के स्थान पर पैसा बस पैसा कैसा भी पैसा और मौज चोरी डकैती रेप मन पर संयम नदारद| कुछ वर्ष पहले हमने पहली बार गीता खरीदी पढ़ी दो बार समझ ही नहीं आई फिर धीरे- धीरे समझ आई भारत के जितने भी धर्म है यहाँ तक तक बुद्ध धर्म भी गीता से अलग नहीं है गोतम बुद्ध का पूरा जीवन दुख क्या है की खोज में रहा कर्म और ज्ञान का क्रियात्मक रूप बुद्ध धर्म है एक जर्मन हमे मिला हम लोगों ने पूछा आप यहाँ घूमने आते हो उसने कहा आपकी फिलोसफी जानने आते हैं आप की अपनी क्रिश्चियनटी है उन्होंने कहा जिन प्रश्नों के उत्तर हमे कहीं नहीं मिलते उनका जबाब गीता में मिलता हैगीता हमारे पूर्ण वेद की शोर्ट फॉर्म है बच्चों को यदि सुधारना है तो हमे उनको संस्कृति से जोड़ना पड़ेगा नहीं तो अमेरिकन समाज के समान सब अय्याशी कर हमारी सन्तति पीठ पर झोला रख कर पलायन वाद की और चल देगी | कृपया आप मुझे क्षमा करें हमारे मनीषियों ने समाज का एक एक नियम बहूत सोच कर बनाया था तभी हम जिन्दा हें अब हमारी संस्कृति की जड़ को काटा जा रहा हें डॉ शोभा

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