PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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१८ दिसम्बर को कौन “नीच”,उच्च ,उदय-अस्त,या बक्री दिखेगा

Posted On 16 Dec, 2017 हास्य व्यंग में

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मात्र व्यंग्य ….
..निर्भया कांड को भूलकर …..१८ दिसम्बर के चुनाव परिणाम एक बार फिर आईना दिखा देंगे कि कौन “नीच” का ,कौन उच्च का या उदय हो रहा है या अस्त हो चूका है | या पार्टी बदलकर बक्री हो रहा है |
………………………. क्या भाजपा का सूर्य फिर उदय होकर भगवा रंग से सुबह को नयी रंगत देगा ….? …..या कांग्रेस का सूर्य पुनः भगवा रंग को टिकने नहीं देगा और सर्वत्र सूर्य की सफेदी से चमक भर देगा ….? ..कांग्रेसी .सूर्य की बिखरी इंद्रधनुषी रंगों सी पार्टियां क्या योगकारी ग्रहों की तरह एक होकर स्वच्छ सफेदी ला पाएंगी |

…………………………राजनीती मैं कोई भी कभी भी “नीच” या ,उच्च पर स्थापित हो जाता है | कोई अस्त हो जाता है तो कोई उदय ….|

………………………..भारतीय ज्योतिष के अनुसार …जैसे सौर मंडल के हर गृह का उच्च और “नीच” स्थान निर्धारित होता है | उसी प्रकार राजनीती मैं भी व्यक्ति ,पार्टी या धर्म,जाति संप्रदाय का उच्च और “नीच” स्थान निर्धारित सिद्ध कर दिया जाता है |

………………………….ऐसा केवल राजनीती मैं ही नहीं होता है हमारे सौर मंडल के गृह भी “नीच” के ,उच्च के स्थान पर स्थापित होते रहते हैं | कोई अस्त होता है तो किसी का उदय होता है | उदित गृह का अच्छा प्रभाव होता है ,उदित हो चुके गृह को शायद यह ज्ञान नहीं होता की उसे अस्त भी होना है | उदित सूर्य का भगवा रंग मन मोहक तो होता है किन्तु क्षणिक …..| पुनः सफेदी छानी ही होती है | …………………जो दिन भर रहनी है |

………………………..चमकते पूर्णमासी के चाँद को शायद यह आभास नहीं होता की उसकी भी काली अमावस्या की ओर गति होनी है | ….

…………………………जबकि अस्त गृह (गुरु और शुक्र ) मैं शुभ कार्य भी नहीं होते हैं | सूर्य के अस्त होते ही निसाचरों का पाप आगमन हो जाता है |

………………………..कोई बक्री यानि उलटी चाल से या पाप स्थान मैं रहने से पापी बन जाता है | अपने स्वग्रह मैं बैठे गृह बलवान हो जाते हैं जबकि शत्रु घर मैं बैठे गृह अपनी शक्ति प्रभाव खो देते हैं |

………………………..नवग्रह जिनके अच्छे या बुरे दृष्टिकोण से पृथ्वी वासियों का पूर्व जन्म कर्म फल निर्धारण होता है | पृथ्वी वासियों का स्वभाव ,संरचना कैसी होगी ,या वे धनवान होंगे ,भाग्यशाली होंगे ,कर्मठ होंगे ,पराक्रमी होंगे ,राज योग वाले होंगे या फ़क़ीर होंगे , बुद्धिमान होंगे या मुर्ख होंगे …..?
ऐसा ही राजनीती मैं भी होता है |

………………………..यह सब हमारे जन्म लग्न के समय बनने वाली कुंडली मैं स्थापित हो चुके गृह बता देते हैं |
राजनीती मैं बनने वाली सरकार पर निर्भर होता है |

………………………..हमारे सौर मंडल के नौ गृह मैं सूर्य चंद्र ,मंगल ,गुरु शुक्र ,राहु केतु ,बुध ,शनि हैं | गुरु ,शुक्र ,चंद्र बुध गृह तो अच्छे प्रभाव वाले पुण्यवान गृह माने जाते हैं | जबकि शनि ,राहु केतु , मंगल और सूर्य पापी क्रूर गृह माने जाते हैं | इन ग्रहों की अच्छी या बुरी स्तिथि ही हमें राजा या रंक …बुद्धिमान या मुर्ख …क्रूर या दयालु …धर्मात्मा या पापी ….आदि आदि बना देती है |

………………………..लेकिन अजब और गजब है इन ग्रहों की स्तिथि …….शनि ,राहु केतु ,मंगल और सूर्य से पापी और क्रूर गृह भी अलग अलग भावों मैं बैठकर शुभ प्रभाव वाले हो जाते हैं | वहीँ शुभ गृह माने जाने वाले गुरु ,शुक्र ,चंद्र और बुध भी पापी कहलाते हैं और उनका प्रभाव मनुष्य पर घातक हो जाता है |

…………………………यही सब गृह एक राशि मैं उच्च के होकर शुभ प्रभाव देते हैं तो वहीँ दूसरी राशि मैं पापी ,क्रूर प्रभाव से “नीच” के होकर मनुष्य का अनिष्ट भी कर देते हैं |

…………………………यह मानना कठिन हो जाता है की राहु ,केतु और शनि,मंगल जैसे पापी,क्रूर गृह भी धन वैभव और राज योग का कारक बन जाते हैं यदि वे उच्च के स्थापित हो | दूसरी तरफ “नीच ” के स्थापित शुभ गृह भी सब कुछ नाश करते हैं |

……………………….…इसलिए स्ववभाविक पापी को “नीच” मान लेना गलत है | और स्वभावतः शुभ को उच्च मान लेना भी गलत ही है |
………………………....किसी के कह देने मात्र से कोई “नीच” या उच्च नहीं हो जाता है | “नीच” या उच्च पर स्थापित व्यक्ति ही “नीच” या उच्च होकर अपना प्रभाव छोड़ता है |

…………………………सूर्य और चंद्र प्रतिदिन सीधी मार्गी चाल से उदय और अस्त होते रहते हैं उसी प्रकार कांग्रेस और भाजपा का भी मार्गी सीधी चाल से उदय और अस्त होते रहना शुभ ही होगा | बक्री यानि उलटी चाल देश के लिए घातक ही होगी |

…………………………सदैव बक्री यानि उलटी चाल तो राहु और केतु से गृह ही चलते हैं | जो छोटी मोटी क्षेत्रीय पार्टियों को ग्रस्ते रहते हैं | राहु का बलवान होना ही राजनीती मैं सफलता प्रदान करता है | जिस पार्टी मैं छोटी मोटी पार्टियों ,नेताओं ,या बागी नेताओं को ग्रसने की शक्ति हो जाती है वही बलवान होकर शासक बन जाती है |

………………………….क्या हार्दिक पटेल ,जिग्नेश और कल्पेश कांग्रेस के लिए योगकारी होकर सरकार बनाएंगे …?….या बक्री यानि उलटी चाल चलकर ,शत्रु गृह यानि भाजपा मैं बैठकर कांग्रेस को टंगड़ी देंगे …..? ..कौन राहु केतु बन इनको ग्रसित कर समाहित करेगा …..?
या उदय होने से पाहिले ही अस्त होते नजर आएंगे …….? उच्च का होना क्या एक स्वप्न रह जायेगा ….?…..

………………………….अन्य ग्रहों (मंगल ,बुध ,बृहस्पति शुक्र और शनि ) की तरह क्षेत्रीय पार्टियों को मार्गी या बक्री तो होना पड़ता है | तभी संतुलन बन पता है |

…………………………शनि, सूर्य पुत्र होकर भी पापी कहलाये ,उच्च और “नीच ” स्थान पर बैठकर दंडाधिकारी बने | अच्छा ,बुरा , ऊंच “नीच “,जीवन मरण सभी कुछ निर्धारण करना उनका धर्म है | इसलिए इस सूर्य पुत्र पापी शनि की अच्छी या बुरी किसी भी तरह की दृष्टि से डरना ही पड़ता है | अजीब नियति है मेष राशि मैं जहाँ पिता सूर्य उच्च कहलाता है तो पुत्र शनि “नीच” कहलाता है | दूसरी तरफ जहाँ तुला राशि मैं शनि उच्च बन जाता है तो बेचारा पिता सूर्य “नीच ” कहलाता है | पिता सूर्य की दृष्टि मैं शनि ” नीच” है | पुत्र शनि की दृष्टि मैं पिता सूर्य “नीच” है | सूर्य की भगवा आकृति सरसों का तेल शनि को प्रिय है जबकि वह स्वयं ही काला है | जहाँ सूर्य उदित होता है वहां कालापन नहीं रह पाता | और जहाँ काला पन हो वहां सफ़ेद चमक नहीं रह पाती | सम्पूर्ण श्रष्टि का विकास का कारक सूर्य ही है यह सत्य है किन्तु यदि शनि इसको नकार दे तो यह भी मानना मजबूरी ही होती है |

…………………………”बिदुर” ‘नीच’ के होकर भी महात्मा कहलाये | “कौरव” उच्च के होकर भी ” नीच” कहलाये जबकि ” पांडव ” ‘नीच’ होकर भी उच्च कहलाये | भगवन श्रीकृष्ण का योग उन्हें उच्च पर स्थापित कर गया |

…………………………जब तक कांग्रेस के भगवन श्रीकृष्ण राहुल गाँधी युद्ध क्षेत्र मैं हैं ,तब तक कांग्रेस की जीत निश्चित होकर रहेगी | बड़ी मुश्किलों से भारतीय जनता पार्टी , सूर्य उदय का भगवा रंग देख सकी है जिसको कांग्रेस को पूर्ण उदित सूर्य की सफेदी पुनः गायब कर देगी |

…………………………एक बार यदि कांग्रेस का सूर्य पुनः चमक गया तो भाजपा को पुनः भगवा रंग के लिए पुनः कांग्रेस के सूर्यास्त का इंतजार करना पड़ेगा |

…………………………कांग्रेसी दिन रात ऐसा ही स्वप्न देखते देखते अपना स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं |

…………………………कांग्रेस अपनी खोज हार्दिक पटेल ,जिग्नेश ,कल्पेश ग्रहों को सौर मंडल मैं स्थापित कर उदित कर पाएंगे ….? उदित होकर स्थापित कर सके तो उन्हें बक्री होने (भाजपा मैं जाने से ) से रोक सकेंगे …? उच्च का होने के लिए हर संभव प्रयत्न कर लेना चाहिए |

………………………...कांग्रेस और भाजपा मैं तो कोई उच्च पर स्थापित हो ही जायेगा किन्तु क्या हार्दिक ,जिग्नेश ,कल्पेश भी ग्रहों मैं अपना उच्च स्थान प् सकेंगे …? 18 दिसम्बर की काली अमावस्या सब सिद्ध कर देगी |

ॐ शांति शांति ॐ शांति शांति ॐ शांति शांति ॐ शांति शांति



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
December 18, 2017

श्री हरीश जी अबकी बार विकास से शुरू हुआ गुजरात चुनाव ने कई रंग बदले मेरे ख्याल से सबसे अधिक चर्चित मणिशंकर का मोदी जी को नीच सम्बोधित करना रहा कल चुनाव रिजल्ट आ रहा है देखना है नीच शब्द किसके लिए ऊँच रहा राजनीती में िनीच शब्द की व्याख्या करता उत्तम लेख

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    December 18, 2017

    आदरणीय शोभा जी ,नीच के ग्रह कितने घातक होत हैं यह मणीशकर जी बखुबी समझ चुके होंगे । नीच के ग्रहों की शांति केवल उसकी पूजा और  दान से ही हो सकती हैं । ओम शांति शांति आभर 

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    December 18, 2017

    आदरणीय शोभा जी ,नीच के ग्रह कितने घातक होत हैं यह मणीशकर जी बखुबी समझ चुके होंगे । नीच के ग्रहों की शांति केवल उसकी पूजा और दान से ही हो सकती हैं । ओम शांति शांति आभर

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
December 17, 2017

स्ववभाविक पापी को “नीच” मान लेना गलत है | और स्वभावतः शुभ को उच्च मान लेना भी गलत ही है |

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
December 17, 2017

”बिदुर” ‘नीच’ के होकर भी महात्मा कहलाये | “कौरव” उच्च के होकर भी ” नीच” कहलाये जबकि ” पांडव ” ‘नीच’ होकर भी उच्च कहलाये | भगवन श्रीकृष्ण का योग उन्हें उच्च पर स्थापित कर गया |7ेमप

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
December 17, 2017

….किसी के कह देने मात्र से कोई “नीच” या उच्च नहीं हो जाता है | “नीच” या उच्च पर स्थापित व्यक्ति ही “नीच” या उच्च होकर अपना प्रभाव छोड़ता है |


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