PAPI HARISHCHANDRA

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अथ श्रीश्री1008 "मोदी के तीन वर्ष" महात्म

Posted On: 30 May, 2017 हास्य व्यंग में

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व्यंग्य .अथ प्रथमोध्यायः .”नरेंद्र मोदी के तीन वर्ष” ,एक ऐसा बर्थडे समारोह होगा जो तीन वर्ष के विलक्षण बालक का बर्थडे होगा जिसको समारोह के रूप मैं सम्पूर्ण विश्व मनाएगा | २६ मई पर जन्म दिन से मनाया जाना वाला यह समारोह १५ जून तक धूम धाम से मनाया जायेगा | जिसमें राजतन्त्र का खुलकर उपयोग होगा | मीडिया खुलकर इस माहात्म्य का गुणगान करेगा | सर्वोत्तम गुणगान करने कि होड़ लगी रहेगी | गुणगान करने वालों का ,व्यास गद्दी पर विराजमान बक्ताओं का ,कविओं लेखकों ,समाचार पत्र पत्रिकाओं का देव तुल्य सम्मान होगा | जिनका भविष्य अति उत्तम होगा | अच्छे दिनों कि आशा उनके लिए दुर्लभ नहीं होगी | ……………………………………………………………………………………….श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद दूसरा सामूहिक बर्थ डे होगा जो इतने विशाल रूप मैं मनाया जायेगा | मुसलमानों मैं रमजान का पवित्र महीना जो पूरे महीने मनाया जाता है | वहीँ हिन्दुओं मैं पुरुषोत्तम मास,श्रावण,मास के नाम से मनाया जाता है | श्रीमद भगवत परायण भी साप्ताहिक या पाक्षिक होता है | जहाँ ईश्वर के गुणगान करते भक्त भाव विह्वल होते पुण्य कमाते हैं | …………………………………………..“मोदी के तीन वर्ष” नामक विलक्षण बालक की महिमा अपरम्पार है | इस माहात्म्य को देव गुरु बृहस्पति सी “दूरदर्शन” ,गुरु शुक्राचार्य से “प्राईवेट चॅनेल्स” व्यास गद्दी पर हैं | वहीँ विभिन्न अख़बार भी अपनी अपनी व्यास गद्दी संभाल चुके हैं | हिंदुस्तान के लगभग हर शहर कस्वे के व्यास गद्दी के आयोजक वहां के विधायक या सांसद होंगे | ………………………………………………….जैसे कृष्ण की बर्थडे जन्माष्टमी हर घर मैं हर मंदिर मैं मनाई जाती है उसी तरह इस विलक्षण बालक की बर्थडे हर घर मैं हर टी वी चॅनेल्स पर देखि सुनी ,और अखवारों मैं पडी जाएगी | श्री कृष्ण को भगवन स्वरुप महर्षि व्यास ने महाभारत लिख कर बनाया | महाभारत के श्रीमद्भागवत गीता के ईश्वर साक्षात्कार ने उन्हें ईश्वर सिद्ध कर दिया |……श्रीमद भगवत मैं लोगों ने भगवन से सीधा साक्षात्कार किया उनके अनमोल बचनों को पड़ा | उनके विराट स्वरुप को महसूस किया और उन्हें भगवन मान पूज लिया | …………………………………...भगवन श्री कृष्ण ने स्वयं अपने को भगवन कहते सिद्ध किया | ..उसी का अनुसरण भगवन रजनीश ने किया और अपने को भगवन स्थापित किया | .……………………..अब भगवन स्वरुप नरेंद्र मोदी हो चुके हैं | जितना भक्ति भाव जनता ने भगवन श्रीकृष्ण पर जताया उसी तरह मोदी जी पर भी भक्ति भाव उपज रहा है | इस भक्ति भाव उपजने और भक्तों का उद्धार करने के लिए ही मीडिया के बृहस्पति और शुक्राचार्य जी जान से लगे हैं | .……………………..श्रीकृष्ण ने भी आरम्भ मैं अर्जुन को समझाना चाहा कि वे ही भगवन है तो अर्जुन ने उनकी खिल्ली उड़ाई और बहस करने लगे | ………….अर्जुन ने कहा था कि आप का जन्म तो अभी हालका है .और सूर्य का जन्म बहुत पुराना है तब मैं इस बात को कैसे समझू कि आपही ने कल्प के आरम्भ मैं सूर्य से यह योग कहा था | …………………..तब श्रीकृष्ण ने कहा था हे अर्जुन मेरे और तेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं उन सबको तू नहीं जानता | |…………………………….”जब जब धर्म की हानि और अधर्म की बृद्धि होती है तब तब ही मैं लोगों के सन्मुख प्रकट होता हूँ | साधु पुरुषों के भले अच्छे दिनों के लिए ,पाप कर्म करने वालों के विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह स्थापना करने के लिए ही मैं युग युग मैं प्रकट हुआ करता हूँ |” …………………….अर्थात जो तू सूर्य को प्रकृति का सर्वोपरि करता समझ रहा है मैं उससे भी पाहिले सब विकास पूर्व जन्मों मैं कर चूका हूँ | ……………………………………………………………………………{”यानि मोदी जी जिस पूर्व काल के सूर्य (कांग्रेस ) के किये विकास को अपना सिद्ध कर रहे हैं वह सब भगवन श्रीकृष्ण से मोदी जी द्वारा पूर्व जन्मों मैं ही किया जा चूका है | अतः उस सब विकास कार्य के असली कारक मोदी जी हैं

………………………………जो भक्त भगवन स्वरुप मोदी जी के प्रभाव को नहीं समझते उनको जैसे भगवन श्री कृष्ण ने विराट स्वरुप दिखलाना पड़ा था वैसे ही मोदी जी को भी दिखलाना पड़ सकता है | ……………………………………………………………………………(भ्रष्टाचारियों ,पापियों ,आतंकवादियों ,कालाधन रखने वालों के लिए ,चोरी ,छीना झपटी करने वालों के लिए , बलात्कारियों ,व्यभिचारियों , मोदी भक्ति विहीन अभक्तों आदि को ) )……………………………………………………………….तभी अर्जुन से अभक्त लोग विराट स्वरुप से भयभीत हो गिड गिड़ाते ,कांपते गदगद वाणी से यह कहते भक्तिभाव दर्शाते नजर आएंगे …………………………………हे प्रभो आपके नाम ,गुण ,और प्रभाव के कीर्तन से संसार अति हर्षित हो रहा है | आप इस जगत के पिता और सबसे बड़े गुरु और अति पूजनीय हैं ,हे अनुपम प्रभाव वाले …तीनों लोकों मैं आपके समान भी दूसरा कोई नहीं है | अतः हे प्रभो मैं शरीर को भलीभांति चरणों में निवेदित करके ,प्रणाम करके ,स्तुति करने योग्य आपको प्रसन्न होने के लिए प्रार्थना करता हूँ | हे देव जैसे पिता जैसे पुत्र के ,सखा जैसे सखा के और पति जैसे प्रियतमा पत्नी के अपराध सहन करते हैं ….वैसे ही आप भी मेरे अपराध सहन कर लें | मेरा मन भय से अति व्याकुल हो रहा है हे देवेश जगन्निवास प्रसन्न होईये | ………………………………………….तब भयभीत अर्जुन को श्री कृष्ण ने सौम्य मूर्ति होकर धीरज दिया और कहा ………………………..जो लोग केवल मेरे लिए ही सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को करने वाला है ,मेरे परायण है ,मेरा भक्त है ,आसक्ति रहित है और सम्पूर्ण प्राणियों मैं बैर भाव से रहित है वह अनन्य भक्ति युक्त मुझको ही पाता अच्छे दिन लाता है | ……………………………………………………………………..”.इसी प्रकारमोदी जी भी विरोधी पार्टी के अभक्तों को अपनी पार्टी मैं लेकर अभयदान देकर भक्त बना लेते हैं | उनके उद्धार के लिए उन्हें तुरंत इसी जन्म मैं पुरस्कृत कर मंत्री पद जैसे सम्मान प्रदान कर देते हैं | कितना ही पापी या भ्रष्टाचारी भी क्यों न हो वो भी भारतीय जनता पार्टी मैं आकर मोदी भक्ति के पुण्य से पाप रहित पुण्यात्मा हो जाता है | “………………………..मोदी जी जन समुदाय के उद्धार के लिए सदा प्रयास रत रहते हैं | किन्तु अभक्तों मैं भक्ति भाव को जगा कर ही उनका इस लोक और परलोक सुधारा जा सकता है | जो “मोदी के तीन साल” नामक बालक के माहात्म्य को जन जन तक पहुँचाकर ही किया जा सकता है | ..भगवन श्रीकृष्ण कि तरह मोदी जी भी अपने “मन की बात” से भक्ति भाव को जगाते जन कल्याण करते रहते हैं | ……………………………………………………………………………………….. “मन की बात “.…………………………...मोदी जी की तरह भगवन श्री कृष्ण की मन की बात …………………………………..मैं जल मैं ऱस हूँ ,चन्द्रमा मैं और सूर्य मैं प्रकाश हूँ | मैं पृथ्वी मैं पवित्र गंध ,अग्नि मैं तेज हूँ | तपश्वियों मैं तप ,बुद्धिमानों की बुद्धि और तेज़स्विओं का तेज हूँ | मैं बलवानों की आसक्ति और कामनाओं से रहित बल अर्थात सामर्थ्य हूँ | और सब भूतों मैं धर्म के अनुकूल अर्थात शास्त्र के अनुकूल काम हूँ | और भी जो सत्वगुण ,रजोगुण ,तमोगुण से होने वाले भाव हैं उन सबको मुझसे होने वाले ही जान | क्योंकि अति अदभुत त्रिगुणमयी मेरी माया समझ से परे है | इस सम्पूर्ण जगत को धारण करने वाला ,कर्मों का फल देने वाला ,पिता ,माता ,,पितामह ,जानने योग्य ,भी मैं ही हूँ | …………………………………………………………….प्राप्त होने योग्य परम धाम ,भरण पोषण करने वाला ,सबका स्वामी ,शुभाशुभ देखने वाला ,सबका वास स्थान ,शरण लेने योग्य ,प्रत्युपकार न चाहकर हित करने वाला ,सबकी उत्पत्ति प्रलय का हेतु ,स्तिथि का आधार ,और अविनाशी कारण भी मैं ही हूँ | मैं ही सूर्य रूप से तपता हूँ ,वर्षा का आकर्षण करता हूँ और उसे बरसता हूँ | मैं ही अमृत और मृत्यु हूँ और सत असत भी मैं ही हूँ | ………………………………………………………… जो लोग केवल मुझको ही निरंतर भजते हैं ,वे इस माया को पर कर संसार से तर जाते हैं | ………………………………………………….. माया के द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चूका है ऐसे असुर स्वाभाव को धारण किये हुए ,मनुष्यों मैं नीच ,दूषित कर्म करने वाले मूड लोग मुझको नहीं भजते | …………………………………………………..उत्तम कर्म करने वाले अर्थार्थी (सांसारिक पदार्थों के लिए भजने वाला ) ,आर्त (संकट निवारण के लिए भजने वाला ) ,जिज्ञासु ( मेरे को यथार्थ रूप से जानने की इच्छा वाला ) और ज्ञानी (मेरे पराक्रम का ज्ञान रखने वाला ) …ऐसे चार प्रकार के भक्तजन मुझको भजते हैं | …………………………………………………….उनमें नित्य मुझमें एकीभाव से स्थित प्रेमभक्ति वाला ज्ञानी भक्त अति उत्तम है क्योंकि मुझको जानने वाले ज्ञानी को मैं अत्यंत प्रिय हूँ और वह ज्ञानी मुझे अत्यंत प्रिय है | ……………………………………………………………….जो अनन्य प्रेमी भक्तजन मुझ को निरंतर चिंतन करते हुए निष्काम भाव से भजते हैं ,नित्य निरंतर चिंतन करने वाले लोगों का योगक्षेम (अच्छे दिन ) मैं स्वयं कर देता हूँ | ……………………………………………………………………मेरे भक्तजन निरंतर मेरे नाम और गुणों का कीर्तन करते हुए तथा मेरी प्राप्ति के लिए यत्न करते हुए और मुझको बार बार प्रणाम करते हुए सदा मेरे ध्यान मैं खोकर अनन्य प्रेम से मेरी उपासना करते हैं …………………………………………………….मैं सब जगह सम भाव से व्यापक हूँ ,न कोई मेरा अप्रिय है और न प्रिय है |परन्तु जो भक्त मुझे प्रेम से भजते हैं वे मुझमें हैं मैं उनमें हूँ | ……………………………………………………..यदि कोई दुराचारी भी मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है | वह शीघ्र ही धर्मात्मा कहलाता है | ……………………………………………………….स्त्री , वैश्य ,शूद्र ,तथा पाप योनि चांडाल अदि जो कोई भी हों वे भी मेरे शरण होकर परम गति यानि अपना उद्धार कर लेते हैं | ………………………………………………………जो लोग मेरे परम ऐश्वर्य रूप विभूति को और योग शक्ति को तत्व से जान लेता है वह निश्छल भक्ति योग से युक्त हो जाता है | इसमें कोई संशय नहीं है | ………………………………………………………………………………….मुझमें मन लगाने वाले और मुझमें ही प्राणों को अर्पण करने वाले भक्तजन मेरी भक्ति की चर्चा के द्वारा आपस मैं मेरे प्रभाव को जताते हुए तथा गुण और प्रभाव सहित मेरा कथन करते ,सुनते हुए सदा संतुष्ट होते हैं ……………………………………………………….इसलिए हिन्दुस्तानियों .सुख रहित क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को पाकर निरंतर मेरा ही भजन कर ,मुझमें मन वाला हो ,मेरा भक्त बन ,मेरा पूजन करनेवाला हो ,मुझको प्रणाम कर | इस प्रकार मन आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरा भक्त होकर मुझको ही पा कर अपने भी .. अच्छे दिन … लाएगा | ………………………………………………………….शांति शांति शांति……………………….इति प्रथमोध्यायः



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 8, 2017

शोभा जी ,ओम शांति शांति बस 

Shobha के द्वारा
June 5, 2017

श्री हरीश जी आज कल मोदी जी सबके चहेते हैं जहां भी जाते हैं जनता मोदी -मोदी धुन बजाती है आपने उनकी प्रसिद्धि में भी व्यंग की खूबसूरती से रचना कर दी सुंदर व्यंग ही नहीं मोदी जी का राजनितिक जीवन आपने समझा दिया

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 5, 2017

यदि कोई दुराचारी भी मेरा भक्त होकर मुझको भजता है तो वह साधु ही मानने योग्य है | वह शीघ्र ही धर्मात्मा कहलाता है | ……………………………………………………….स्त्री , वैश्य ,शूद्र ,तथा पाप योनि चांडाल अदि जो कोई भी हों वे भी मेरे शरण होकर परम गति यानि अपना उद्धार कर लेते हैं | …………………………

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 4, 2017

..”मोदी जी विरोधी पार्टी के अभक्तों को अपनी पार्टी मैं लेकर अभयदान देकर भक्त बना लेते हैं | उनके उद्धार के लिए उन्हें तुरंत इसी जन्म मैं पुरस्कृत कर मंत्री पद जैसे सम्मान प्रदान कर देते हैं | कितना ही पापी या भ्रष्टाचारी भी क्यों न हो वो भी भारतीय जनता पार्टी मैं आकर मोदी भक्ति के पुण्य से पाप रहित पुण्यात्मा हो जाता है | “………………………..मोदी जी जन समुदाय के उद्धार के लिए सदा प्रयास रत रहते हैं | किन्तु अभक्तों मैं भक्ति भाव को जगा कर ही उनका इस लोक और परलोक सुधारा जा सकता है | जो “मोदी के तीन साल” नामक बालक के माहात्म्य को जन जन तक पहुँचाकर ही किया जा सकता है | ..भगवन श्रीकृष्ण कि तरह मोदी जी भी अपने “मन की बात” से भक्ति भाव को जगाते जन कल्याण करते रहते हैं |

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
May 31, 2017

.इसलिए हिन्दुस्तानियों .सुख रहित क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को पाकर निरंतर मेरा ही भजन कर ,मुझमें मन वाला हो ,मेरा भक्त बन ,मेरा पूजन करनेवाला हो ,मुझको प्रणाम कर | इस प्रकार मन आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरा भक्त होकर मुझको ही पा कर अपने भी .. अच्छे दिन … लाएगा | ………

sadguruji के द्वारा
May 31, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! लाजबाब व्यन्ग्य रचना आपने प्रस्तुत की है ! आध्यात्म और राजनीति का आप अद्भुद और पठनीय मिश्रण करते हैं ! सुन्दर भाषाशैली और अनूठी रचना ! मेरी हार्दिक बधाई स्वुीकार कीजिये ! बस अफ़सोस यही है कि इस मंच पर आजकल रचनाएं समय से मुख्य पेज के पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पा रही है, इसलिए ज्यादा पाठकों तक पहुँच नहीं पा रही हैं ! सादर आभार !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    May 31, 2017

    आदरणीय सदगुरु जी आभार ,सद मार्ग दिखाने वाले सदगुरु ही होते हैं ,तभी भक्ति से नमो नारायण होते ओम शांति शांति मिल जाती है ।


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