PAPI HARISHCHANDRA

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कलियुगी हरिश्चंद्र (केजरीवाल)की चाणक्य को ललकार

Posted On 10 May, 2017 हास्य व्यंग में

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व्यंग्य …संजय उवाचः ..केवल आधुनिक हरिश्चंद्र अरविन्द्र केजरीवाल ही स्वच्छ हैं | अन्य सब कुछ दृष्टि भ्रम है | ……..मीडिया(शुक्राचार्य ) के पास मृतसंजीवनी विद्या आ चुकी है उसी ने आम आदमी पार्टी को उठाया वही उसे गिरा रही है | अखिलेश यादव उवाचः ………सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र .जो सतयुग मैं था जो सत्य के प्रति दिग भ्रमित था | स्वर्ग मैं इन्द्र भी घबड़ा रहे थे कि इनके सत्य ब्रत तप के पुण्य से कहीं मेरा इन्द्रासन ही न चला जाये | जाग्रत अवस्था मैं उससे मिथ्या भाषण असंभव था | क्योंकि किसी को यह सिद्ध नहीं किया जा सकता था कि वह असत्य बोलेगा …/?………….फिर इन्द्र ने चाणक्यीय चाल चली कि.हरिश्चंद्र तूने स्वप्न मैं अपना सारा राजपाठ दान दे दिया है | उस स्वप्न की याद दिलाने के लिए ऋषि विश्वामित्र की सेवाएं ली गयी | और विस्वामित्र ने उस स्वप्न की याद दिलाते अपने सत्य पर अडिग रहने की उलाहना दी | और हरिश्चंद्र को अपना सारा राजपाठ धन दौलत त्यागना पड़ा था | यहाँ तक कि अपनी स्त्री और पुत्र को भी गवाना पड़ा था | ………………………………….एक ऐसे ही हरिश्चंद्र धर्मराज युधिष्ठिर माने जाते थे | किन्तु वे सत्युगीय हरिश्चंद्र से विकसित थे अतः उनके हरिश्चन्द्रिय भाषण पर विस्वास करते उनसे पुछा गया तो चालाकी से सत्य को छुपा गए थे | ……………………………………………यह दोनों सत्य के हरिश्चंद्र थे किन्तु आधुनिक भारत के हरिश्चंद्र अरविन्द्र केजरीवाल जी माने जाते हैं |…जो भष्टाचार के हरिश्चंद्र माने जाते हैं | जैसे सत्य बोलने के लिए सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र और धर्मराज युधिष्ठिर को आदर्श माना जाता है ,वैसे ही भरष्टाचार के लिए अरविन्द्र केजरीवाल जी को आदर्श माना जाता है | भ्रष्टाचार के सर्वनाश की कसम खा चुके केजरीवाल जी से कोई किसी भष्टाचार की कल्पना कर ही नहीं सकता | जैसे राजा हरिश्चंद्र को झूठा सिद्ध करने के लिए उन्हें बर्बाद कर दिया गया वैसे ही अरविन्द्र केजरीवाल को भ्रष्टाचारी सिद्ध करने के लिए चाणक्यों की कूटनीतिक चालें बराबर चली जाती रही हैं | ……………………………….सत्य भाषण मैं धर्म राज युधिष्ठिर तो विकसित हो चुके थे किन्तु अब कलियुग मैं विकास अपनी चरम पर है अतः इंद्रों की चाणक्यीय चालों मैं हरिश्चंद्र आने वाला नहीं | न तो हरिश्चंद्र राज पाठ छोड़ेगा न घुटने मोड़ेगा | कलियुग है जहाँ मीडिया अपने चरम पर विकसित होकर शुक्राचार्य बन चुकी है | शुक्राचार्य के सहारे चाणक्य चक्र वर्ती सम्राट के स्वप्न देख रहा है | और बराबर सफल हो रहा है | किन्तु हरिश्चंद्र यों ही हार नहीं मानेगा ,उसे भावनात्मक चालों से भ्रष्टाचारी सिद्ध नहीं किया जा सकता है | वह राज पाठ नहीं त्यागेगा | और दुनियां मैं इन्द्र की चाणक्यीय चालों की पोल खोल देगा | …………………………………….आधुनिक हरिश्चंद्र .अरविन्द्र केजरीवाल पर जनता को विश्वास है | उसी विस्वास को तोड़ने की चाणक्यीय चालें शुक्राचार्य के सहयोग से जारी हैं | किन्तु आधुनिक हरिश्चंद्र भी कोई सत्युगीय हरिश्चंद्र नहीं है | वह टेक्नोलॉजी मैं माहिर है | जिस शुक्राचार्य का प्रयोग चाणक्य उसके खिलाफ कर रहा है उसी शुक्राचार्य को उल्टा चाणक्य के खिलाफ बोलने की वाणी सिद्ध कर ली है | अब शुक्राचार्य बोलेगा केजरीवाल के खिलाफ किन्तु उसका असर होगा उल्टा चाणक्य पर | .सबको भ्रष्ट ,दागी पापी झूठा सिद्ध कर दो बन जाओ स्वच्छ यही है चाणक्य की कूटनीतिक चाल | ………………………….किन्तु कलियुगी हरिश्चंद्र अब सब समझ चुके हैं | अब वे सत्य के लिए छदम चालों मैं राज पाठ नहीं त्यागेंगे | बल्कि चाणक्य की चालों की पोल जनता मैं खोलेंगे वह भी चाणक्य के सहयोगी शुक्राचार्य के द्वारा ही | ………………………………………………जो सत्यवादी हों वे ही सत्य के लिए राजपाठ त्यागने की उलाहना दें | जो भ्रष्ट न हों वे ही भ्रष्टाचार के लिए राज पाठ त्यागने की उलाहना दें | जिसने पाप न किया हो वही पाप की उलाहना दे | ……………………………………………………………….हरिश्चंद्र ने असत्य बोला ,भ्रष्टाचार किया सिद्ध होने से पाहिले ही राज पाठ त्याग दिया और चाणक्यों का राज कायम हो गया | किन्तु हरिश्चंद्र पापी बन पापी हरिश्चंद्र कहला गया | अब कलियुगी हरिश्चंद्र के साथ ऐसा नहीं होगा क्यों कि हरिश्चंद्र भी विकसित हो गया है | उसे भी अच्छे बुरे का ज्ञान हो गया है | एक युग था जब सत्य भाषण या भ्रष्टाचार रहित न रहने या सत्य की स्थापना और भ्रष्टाचार के नाश की शिक्षा देने वाले गुरु अंत तक अपने शिष्य का साथ देते थे किन्तु अब गुरु से भी साथ की कल्पना नहीं की जा सकती है गुरु भी चाणक्यों ,शुक्रचार्यों के चंगुल मैं फंसते अपना मान सम्मान बनाये रखना चाहते हैं | द्रोणाचार्य भी तो कौरवों के साथ ही रहे थे | अतः कलियुगी हरिश्चंद्र को अकेले ही टेक्नोलॉजी द्वारा ही युद्ध जीतना होगा | ………………………………सत्य और नैतिकता मैं बहुत बल होता है | उसके लिए करोड़ों की कौरवी सेना भी तुच्छ नजर आती है | अब किशन का साथ भी नहीं है सत्य और नैतिकता से मिला मनो बल आत्म बल ही युद्ध जिताएगा | क्या था जब गुरु चरणों मैं ही भ्रष्टाचार के नाश का बीज ऊगा था | आज इतना बड़ा बृक्ष चाणक्य द्वारा बहकाये एक साथी कपिल द्वारा पैदा की गयी आँधी मैं झूम रहा है | कपिल(बानर ,हनुमान ) तो भगवन राम के लिए अशोक वाटिका के बृक्षों को हिलाता था | आज कपिल की मति भ्रष्ट क्यों हो गयी ….? .हरिश्चंद्र का दुर्भाग्य ..|…………………..गुरु …किशन न सही संजय की दिव्य दृष्टि का साथ ही अर्जुन को महाभारत जिता सकता है | …………………………..संजय उवाचः …….केवल आधुनिक हरिश्चंद्र अरविन्द्र केजरीवाल ही स्वच्छ हैं | और सब कुछ भ्रम है | ……………………………………………………………………ॐ शांति शांति शांति



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
May 11, 2017

बहुत अच्छा व्यंग्य-लेख लिखा है आदरणीय हरिश्चंद्र जी आपने । समझ में तो आ रहा है, तथापि आप ही से स्पष्टीकरण की प्रार्थना है – आपने चाणक्य किसे कहा है ?


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