PAPI HARISHCHANDRA

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निर्भया का असली दुष्कर्मी ,निर्भय

Posted On 7 May, 2017 हास्य व्यंग में

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व्यंग्य ..मैं केवल भगवन शिव द्वारा ही दण्डित किया गया हूँ | भगवन शिव भी मुझे तभी भष्म कर सके जब वे अर्धनारीश्वर बने | अन्यथा उन्हें भी मेरे प्रभाव से बचने के लिए भूत प्रेत जैसी भयंकर साथियों के साथ रहना पड़ा | भांग ,धतूरा जैसे नशों की प्रियता अपनानी पडी | विष पान करके मुझसे बचने के लिए शिवजी या तो तपश्या मैं लीन रहते हैं या भयंकर रूप से प्रलय ही कर डालते नजर आते हैं | ………………………………………………………..निर्भया के माता पिता ,दुष्कर्म के दोषियों को मृत्यु दंड पर सुप्रीम कोर्ट के मोहर पर , धन्यवाद देते हैं | ……………………….पीड़िता की माँ के अनुसार …सुप्रीम कोर्ट ने मेरी बेटी के दर्द को समझा | मुझे कोई शिकायत नहीं | मैं सभी को धन्यवाद देती हूँ | …………..वहीँ पीड़िता के पिता के अनुसार सही मायने मैं अब सुप्रीम इंसाफ हुआ है | मेरी बेटी के साथ साथ समाज और देश को न्याय मिला है | …………………………………..कोर्ट के फैसले पर कोर्ट मैं मौजूद पीड़िता के माता पिता समेत अन्य लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया | …………………………………………………………………………..क्या वास्तव मैं सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्मियों को मृत्यु दंड दे दिया | क्या दुष्कर्मियों को मृत्युदण्डित हो जाने के बाद दुष्कर्मों का होना बंद हो जायेगा …..? ……………………कहा जाता है डाकुओं के सरगना ,या आतंकवाद के जड़ को समाप्त किये बिना इनका नाश नहीं हो पाता है | ……………………………इसी तरह दुष्कर्म के जड़ कहाँ है कौन है उसका सरगना ….? यह सच है की दुष्कर्मियों का सरगना निर्भय है | जो सदियों से या बैदिक काल से या यह भी कहा जा सकता है की श्रष्टि के आरम्भ से ही निर्भय विचरण कर रहा है | आखिर यह है कौन जो सर्वत्र व्याप्त है ……? यह सदैव सुषुप्तावस्था मैं शांत रहता है किन्तु इसको उत्प्रेरित किया जाता है यह उत्प्रेरित होकर ही दुष्कर्म कर बैठता है | ……………………..फिर दोषी दुष्कर्मी तो माना ही जात्ता है | किन्तु उसका उत्प्रेरक भी उतना ही दोषी होकर दंड का भागी होता है | किन्तु सदैव ही दुष्कर्मी दोषी होकर दण्डित होता है और उत्प्रेरक साफ बच निकलता है | अतः बार बार दुष्कर्मों के पुनरावर्ती होती रहती है | …………………..आखिर इस सुषुप्त उत्प्रेरक को पहिचानना भी आवश्यक है | जिसको जाने बिना हम उसे दण्डित नहीं कर सकते हैं | …………………….वह सर्वत्र जीवों मैं विद्यमान …कामदेव….. है | आखिर सुषुप्त कामदेव क्यों भड़क जाते हैं | असंयमित कामदेव पीड़ित को न कुछ दीखता है न सुनायी देता है | और कामदेव पीड़ित कुछ भी दुष्कर्म कर बैठता है | ……………………………………………….आखिर श्रस्टि का वाहक कामदेव क्यों असंयमित हो जाता है ….? ….मनुष्य के आलावा अन्य जीवों मैं संयम के कामना नहीं की जा सकती है | किन्तु मनुष्य सदियों युगों से सुशिक्षित है संयम के लिए नियम ,धर्म स्थापित किये गए हैं | कानून बनाये गए हैं | …………………………………………………………आखिर कौन है वह उत्प्रेरक जो कामदेव को जगा देता है | कामदेव तो एक भूत है किन्तु उत्प्रेरक भूत ,भी हो सकते हैं और जीव भी | उत्प्रेरक भूतों को सजा नहीं दी जा सकती किन्तु उत्प्रेरक जीवों ,मनुष्यों ,संस्थाओं , सरकारों ,को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी | जितने दोषी उत्प्रेरक भूत हो सकते हैं उससे ज्यादा यह सजीव मनुष्य हैं | …..इसलिए कितनी ही सजाएँ फांसियां दुष्कर्मियों को दे दी जाएँ ,उत्प्रेरक सदैव और भी फलते फूलते रहते हैं | एक सजा देने का चक्र घूमता रहता है | ………………………………………मनुष्य को संयम का पाठ सिखाया जाता है | प्रकृति के हर जीव की तरह मनुष्य भी ‘भग’ वान है | यदि भग वान है तो नपुंसक नहीं होगा | संयमी भी कब तक संयम कायम रख सकते हैं यह उनके संस्कारों पर निर्भर करता है | संस्कार हमें माता पिता ,गुरु ,साथी , देश ,दुनियां ,पत्र पत्रकाएँ ,फिल्मों ,मोबाइल , टी वी , कंप्यूटर इंटरनेट ,फैसन से मिलते हैं | जिसमें बहुसंख्यक माता पिता अगली पीड़ी से पिछड़ जाते हैं और बच्चे ही उन्हें समझाते हैं | ……………….ऐसे मैं बाल मन वही देखना ,सुन्ना ,करना चाहता है जो सभी को करते देखते हैं | …….advertisement मैं क्या देखता है …? फिल्मों मैं क्या देखता है …? इंटरनेट मैं क्या देखता सुनता है …..? मोबाइल अब स्मार्ट हो चुके हैं जो गरीब से गरीब के हाथों की शोभा बन चुके हैं |..स्मार्ट फोन मैं क्या देखते हैं सभी जानते हैं | सी डी ,पेन ड्राइव तो भंडार है | और तो और शहर ,कस्वों मैं दिखलाई जाने वाली ब्लू फिल्में सरकार का मनोरंजन कर बड़ा रही हैं सरकार को मनोरंजन कर की चिंता सदैव बनी रहती है | उत्प्रेरक पान ,पान मसाला ,गुटका ,तम्बाखू ,बीड़ी सिगरेट ,अफीम भांग ,सुल्फा ,हेरोईन ,सदा सरकार की revenue के कारक बनी रहती है | सबसे अधिक काम देवोत्तेजक ,उत्प्रेरक शराब के बिना तो पूरी अर्थ व्यवस्था गड़मड़ा जाती है | सब कुछ सामाजिक ,वैज्ञानिक ,बुराईयां हैं | भयंकर रोग कारक हैं | दुष्कर्मों की उत्प्रेरक हैं किन्तु मजबूरी है | विकास के लिए धन चाहिए धन के लिए मजबूरी है | रोजगार भी देता है ,बेरोजगारी दूर करता है अतः मजबूरी है | पैसा कोई पेड़ पर तो उगता नहीं है | ………………………………………………दुष्कर्म को रोकने के लिए हमारे ऋषि महर्षियों ने इस प्राकृतिक बुराई की रोक थाम के लिए सख्त कानून के साथ साथ ,खान पान का सात्विक होना ,सात्विक देखना,पड़ना सुन्ना ,करना जिसके लिए ब्रह्मचर्य के पालन की शिक्षा ,माता पिता गुरुजनों का सम्मान करके अच्छे संस्कार पाना | अपने धर्म के प्रति आस्था रखना आदि बनाये | ………………………………..,वर्तमान समय मैं जनता को नशीली चीजें ,सुलभ हैं ,कामोत्तेजक साहित्य ,फिल्में ,सुलभ हैं | स्कूल कॉलेज कार्य स्थल सभी कामोत्तेजक वार्तालाप से उत्प्रीत हैं | सदाचार व्यव्हार की शिक्षा तो दूर उन्हें राजनीती के पैंतरे सिखये जाते हैं | सत्ता कैसे चाणक्य नीति से पायी जा सकती है | सत्य व्यवहार से सब कुछ गंवाना नहीं है | यह सीखना जरुरी है | धर्म वही जो वोट दिलाये | …………………………………………………………………….मैं पीड़िता के माता पिता को दुष्कर्मियों को सजा दिलवाने मैं सफलता पर बधाई देता हूँ | किन्तु उन्हें और भी अधिक खुशियां मिलेंगी यदि वे इन दुष्कर्मियों के उत्प्रेरकों को सजा न भी दिलवा सकें तो उन्हें सही मार्ग दर्शन दिलवा सकें | अन्यथा फिर वही चक्र घूमता रहेगा | …………………………विकास के लिए धन चाहिए किन्तु ऐसा कामोत्तेजक उत्प्रेरक चीजों से मिलने वाले धन से नहीं …| विकास चाहे हो या न हो ऐसे काला धन की आय का लोभ सरकार को छोड़ देनी चाहिए | …………………..काम देव के नाश के लिए केवल सन्यास राज ही मार्ग नहीं किन्तु सन्यासी आचरण भी होना चाहिए | ………………………………………………………………………..जनता को कामदेव के नाश के लिए एक जूट होना पड़ेगा तभी शिवजी की तरह कामदेव को भष्म करके दुष्कर्मियों का सर्वनाश कर सकेंगे | अर्ध नारीश्वर शिव जी के आलावा कुछ ही जीव हैं किन्तु मनुष्य नहीं हो सकता | ……………..पीड़िता के पिता जी , आपकी बेटी के साथ साथ समाज और देश को न्याय मिला है | यह तभी सार्थक महसूस होगा | ………………………………………ॐ शांति शांति शांति शांति



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