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'सप्त ऋषि' के बाद आठवें 'राष्ट्र ऋषि' नरेन्द्र मोदी जी

Posted On: 5 May, 2017 हास्य व्यंग में

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व्यंग्य ….पतंजली रिसर्च इंस्टिट्यूट का उदघाटन ………….समारोह मैं , राष्ट्र के गौरव जिनमें भारत के सवा सौ करोड़ भारतीय अपने स्वर्णिम भविष्य का सपना देखते हैं ,जो दिव्य और भव्य भारत बनाने मैं अखंड प्रचंड पुरुषार्थ कर रहे हैं | इस राष्ट्र को भगवन से एक वरदान मिले हैं ,ऐसे …………………माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी .को योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा……. “राष्ट्र ऋषि “……..की उपाधि से गौरवान्वित किया | ………………………………………………………………………..वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भरद्वाज, अत्रि, वामदेव और शौनक- ये हैं वे सात ऋषि जिन्होंने इस देश को इतना कुछ दे डाला कि कृतज्ञ देश ने इन्हें आकाश के तारामंडल में बिठाकर एक ऐसा अमरत्व दे दिया कि सप्तर्षि…शब्द सुनते ही हमारी कल्पना आकाश मंडल पर ढूंढती हैं | सात तारों का एक ऐसा जमघट जो साथ साथ एक ही स्तिथि मैं उगता और डूबता नजर आता है | ……………………………………………………..अब सभी भारतीय देशभक्तों की दृष्टि आठवें ऋषि को ढूढ़ती नजर आएगी | योगी रामदेव जी जो ऋषि मंडल मैं स्थापित ऋषियों से कम नहीं हैं और ऋषि परंपरा मैं जी रहे हैं | राम देव जी द्वारा आठवीं ऋषि की खोज कर उन्हें राष्ट्र ऋषि के रूप मैं स्थापित कर जन कल्याण कार्य किया है | वैसे तो साधारण जनता नरेंद्र मोदी जी की उपलब्धियां पहिले से जानते उन्हें भक्ति भाव से पूजती रही हैं | जनता का निष्काम ,निश्छल जन समर्थन किसी से छुपा नहीं है | ……………………………………………………………………………………..वेदों के रचयिता ऋषि कहलाते हैं : …………………………………….ऋग्वेद में लगभग एक हजार सूक्त हैं, लगभग दस हजार मन्त्र हैं। चारों वेदों में करीब बीस हजार हैं और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते हैं। मन्त्रों की रचना मैं अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है | किन्तु इनमें सात ऋषि ऐसे हैं जिनके कुलों मैं मंत्र रचयिता ऋषियों की एक लम्बी परंपरा रही है | इन्हीं ऋषियों के मन्त्रों का संग्रह ही वेद के रूप मैं स्थापित हुए | ऋषियों द्वारा रचित हर मंत्र हजारों सालों तक तपस्या के बाद एक वैज्ञानिक खोज .है | एक जन कल्याण का मार्ग है | जिसको चुराकर ही आज का विकास संभव किया | |…………………………………………………………….सप्त ऋषियों द्वारा किया जन कल्याण कारी कार्यों खोजों का विवरण …………………………………………………………………………………..1. वशिष्ठ ऋषि : ……………………………………भगवन राम के पिता राजा दशरथ के कुलगुरु थे | जो दशरथ के पुत्रों राम लक्ष्मण भरत शत्रुधन के गुरु थे | जिनकी आज्ञा पाकर चारों राजकुमारों ने ऋषि विश्वामित्र के साथ ,आततायी राक्षशों का नाश किया था | किन्तु कामधेनु गाय के लिए इन्हीं दोनों ऋषियों वशिष्ट और विश्वामित्र मैं युद्ध भी हुआ था | वशिष्ट ने राज सत्ता पर अंकुश का विचार दिया | और १०० सूक्त एक साथ रचे | ………………………………………………………………………………….२….विश्वामित्र ऋषि : …………………………………ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया।…विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। …………………………………………. विश्वामित्र ने घोर तपस्या करके इंद्र से रुष्ठ होकर एक अलग ही स्वर्ग लोक की रचना कर दी थी। विश्वामित्र ने इस देश को ऋचा बनाने की विद्या दी और परम कल्याणकारी ..गायत्री… मन्त्र…. की रचना की जो भारत के हृदय में और जिह्ना पर हजारों सालों से आज तक अनवरत निवास कर रहा है। ………………………………………………………………………………..3. कण्व ऋषि : …………………….. इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत…का पालन पोषण हुआ था | हमारे देश का नाम भारत भी भरत से ही पड़ा | ………………………………………………………………………………..4. भारद्वाज ऋषि : …………………..वैदिक ऋषियों में भारद्वाज-ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थीं। ऋषि भारद्वाज के पुत्रों में 10 ऋषि ऋग्वेद के मन्त्रदृष्टा हैं और एक पुत्री जिसका नाम ‘रात्रि’ था, वह भी रात्रि सूक्त की मन्त्रदृष्टा मानी गई हैं। ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि हैं। इस मण्डल में भारद्वाज के 765 मन्त्र हैं। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के 23 मन्त्र मिलते हैं। ‘भारद्वाज-स्मृति’ एवं ‘भारद्वाज-संहिता’ के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे।…………………………………………………………………………. ऋषि भारद्वाज ने ‘यन्त्र-सर्वस्व’ नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने ‘विमान-शास्त्र’ के…नाम से प्रकाशित कराया है। इस ग्रन्थ में उच्च और निम्न स्तर पर विचरने वाले विमानों के लिए विविध धातुओं के निर्माण का वर्णन मिलता है। ………………………………………………………………………………………5. अत्रि ऋषि : ……………….ऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव (ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश ) अनसूया के घर ब्राह्मण के… भेष में भिक्षा मांगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों(ब्रह्मा ,विष्णु महेश ) को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा… दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था …………………….अत्रि ऋषि ने इस देश में कृषि के विकास में पृथु और ऋषभ की तरह योगदान दिया था। अत्रि लोग ही सिन्धु पार करके पारस (आज का ईरान) चले गए थे, जहां उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही… अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ। अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। …………………………………………..मान्यता है कि अत्रि-दम्पति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय,… ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में जन्मे। ……………………………………………………………………………………6. वामदेव ऋषि :…………………………………… वामदेव ने इस देश को सामगान (अर्थात् संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं। ……………………………………………………………………………………..7. शौनक ऋषि : शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया और किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया। वैदिक आचार्य और ऋषि जो शुनक ऋषि के पुत्र थे। ……………………………………………………………………………८..नरेंदर मोदी राष्ट्र ऋषि……एक ऐसे योगी तपस्वी सिद्ध जो जिस कार्य की सिद्धि चाहते हैं उसे सिद्ध कर ही लेते हैं | वाणी पर उनकी सिद्धि है | अपने सन्यास काल मैं कठिन तपस्या करके वे सिद्ध हो गए | जन कल्याण हो या पार्टी कल्याण वे एक तपस्या की तरह ही सिद्धि हेतु लगे रहते हैं | बगुला मुखी सिद्धि प्राप्त मोदी जी प्रतिद्वंदी ,दुश्मन पर सदा हावी रहते हैं | दुश्मन वही करता है जो वो चाहते हैं | दुश्मन का अपने मन मष्तिस्क पर नियंत्रण नहीं रहता | अतः विजय निश्चित हो जाती है | विचलित अखिलेश यादव का पारिवारिक विखंडन और फिर प्रचंड विजय | आम आदमी पार्टी के केजरीवाल , बृहस्पति कुमार विस्वास का विचलित मन और पार्टी फ़ूट….| एक जीतती आम आदमी पार्टी जो हासिल ही करती जा रही है किन्तु उसको यह सिद्ध कर दिया जा रहा है की उसकी पराजय हो रही है | एक ऐसा जुआरी जिसके पास कुछ नहीं था वह कुछ हासिल कर लेता है तो यह उसकी जीत ही होगी न की हार ….| कांग्रेस के सफाये हेतु सिद्धि प्रोग्रेस पर है | एक न एक दिन अवश्य सिद्ध होगी | क्यों की इस सिद्धि का काट किसी के पास नहीं है | क्यों की यह सिद्धि योग और ब्रह्मचर्य से कठिन साधना से मिलती है जो कोई कर नहीं सकता और जो सक्षम हैं वे मित्र ही हैं | सिद्धियों को बनाये रखने के लिए किसी भी सिद्ध स्थान के दर्शन करना मोदी जी नहीं भूलते हैं | राष्ट्र ऋषि मोदी जी की उपलब्धियों को तो दुनियां जान चुकी है | उस पर कुछ कहना सूर्य के आगे दीपक ही जलाना होगा | ………………………………………………….. जन मानुष पर तो भगवन की तरह भक्ति भाव जगाने मैं सिद्धि प्राप्त है | जनता केवल अनुसरण करती है अपने विवेक या बुद्धि का प्रयोग निरर्थक समझती है | भक्ति मैं ही शक्ति होती है | अतः भगवन जो करेंगे वही जन कल्याणकारी होगा यही विचार कर फल भगवन पर ही छोड़ देती है | सिर्फ कर्म करना ही धर्म है यही विचार कर कर्म करती है |…देश हो या विदेश जो भी मोदी जी के संपर्क मैं आता है अपने मन पर कण्ट्रोल नहीं रख पाता और भक्ति मैं डूब जाता है | इतनी भक्ति तो इससे पाहिले किसी ऋषि के प्रति जनता ने कभी नहीं की |……………………………………… वेद मन्त्रों मैं ‘मन की बात’ रूपी मोदी मंत्र भी शोभा बढ़ाएंगे | ………………………आज
अतः अष्ट ऋषियों मैं स्थापना बाबा राम देव जी की उचित ही है | .अब
राष्ट्र ऋषि की उपाधि प्रदान की है तो कल योग ऋषि की उपाधि भी मिल ही जाएगी ऐसी आशा होगी ही | ……………………………………………………………….ॐ शांति शांति .. शांति शांति


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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
May 11, 2017

लेख पढ़कर अभिभूत हूँ आदरणीय हरिश्चंद्र जी । ऐसा असाधारण लेख तो केवल आप ही लिख सकते हैं। अद्वितीय हैं आप ।

sadguruji के द्वारा
May 6, 2017

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन और स्वागत है ! सांसारिक जीवन में निरंतर चलने वाली जटिल और घोर तपस्या में कई महीने तक लीन रहने के बाद आप एक बार फिर इस व्यंग्य रचना के साथ मंच पर आये हैं ! लिखा तो आपने अच्छा है, लेकिन बगला मुखी की सिद्धि में आज के सभी नेता माहिर हैं, सिर्फ मोदी को ही दोष देना ठीक नहीं है ! रही बात ऋषियों की तो वो अनुपम और अतुलनीय हैं, क्योंकि वो सिर्फ मन्त्र की सृष्टि काने वाले ही नहीं, बल्कि मन्त्र द्रष्टा भी थे ! तभी तो वेदों को अपौरुषेय (किसी मनुष्य के द्वारा रचित नहीं) माना गया है ! गहरे ध्यान समाधि की दिव्य अवस्था में ऋषियों ने अपने मानस के अंतस में वेदमंत्र देखकर और सुनकर लिखे हैं ! तार्किक और बेहद सुन्दर साहित्यिक भाषाशैली में लिखित आपकी यह रचना पठनीय और संग्रहणीय है ! अच्छी और अनूठी प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार !


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