PAPI HARISHCHANDRA

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नारायण की पतितपावन भाजपा मैं डुबकी

Posted On: 25 Jan, 2017 हास्य व्यंग में

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व्यंग्य ..पतित नरों(जो अपनी पार्टी मैं सम्मान न पा सके ) द्वारा पवित्र गंगा सी भाजपा मैं डुबकी लगाना तो एक साधारण सी बात हो गयी है किन्तु नरों मैं श्रेष्ठ नारायण भी यदि पतित पावन गंगा सी भाजपा मैं डुबकी लगाने को आतुर हो जाएँ तो यही सिद्ध हो जाता है कि गंगा (भाजपा )अवश्य ही पतित पावन होगी | नरों मैं श्रेष्ठ नारायण ,भगवन विष्णु कहे जाते हैं | किन्तु राजनीतिक नरों मैं श्रेष्ठ नारायण रोहित शेखर के जैविक पिता विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी ही ही माने जाते हैं | ………

………आधुनिक श्रवण कुमार(रोहित शेखर )द्वारा भाजपा मैं डुबकी लगा लेना एक महान पितृ भक्ति का परिचायक है | माता , पिता(नारायण ) के उद्धार के लिए भगीरथ प्रयास करना एक पुत्र का कर्तव्य होता है …………………….श्रवण कुमार ने अपने अशक्त बूड़े माता पिता को अपने कन्धों पर तीर्थ यात्रा करवा कर महान कार्य किया था | वैसे ही रोहित शेखर द्वारा महान पतित पावनी भाजपा मैं पिता की डुबकी लगवा देना भी महान कार्य है | जिस प्रकार श्रवण कुमार की पितृ भक्ति लोक मैं प्रसिद्द है ,उसी प्रकार रोहित शेखर की लोकप्रियता बन जाएगी | ………………………………………..श्रवण कुमार हिन्दू धर्म ग्रंथ रामायण में उल्लेखित पात्र है, ये अपने माता पिता से अतुलनीय प्रेम के लिए जाने जाते हैं। श्रवण कुमार का वध राजा दशरथ से भूलवश हो गया था, जिस कारण इनके माता पिता ने राजा दशरथ को पुत्र वियोग का शाप दे दिया था इसी के फलस्वरूप राम को वनवास हुआ और राजा दशरथ ने पुत्र वियोग में राम को याद करते हुए प्राण त्यागे | श्रवण अथवा श्रवण कुमार संस्कृत काव्य रामायण के एक पात्र का नाम है। इसमें श्रवण की उल्लेखनीयता उसकी अपने माता-पिता की भक्ति के कारण है।………………….IImage result for shrawan kumar image……………………किन्तु लोक मैं यही समझा जा रहा है कि रोहित शेखर जी अपने उद्धार के लिए ही लालायित हैं | जबकि महात्मा बिदुर की तरह ही वे बिदुर (बुद्धिमान )होने पर भी अपने को राज सिंघासन से स्थापित नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनकी उत्पत्ति भी महात्मा बिदुर जैसी ही है | कौरवों और पांडवों की पार्टियां क्यों अपने मैं समाहित करने मैं हिचकिचा रही हैं | ध्रतराष्ट्र ,और पाण्डु के भाई होने पर भी सत्ता सुख उनके लिए नहीं मिल रहा है | आखिर कौन थे महात्मा बिदुर ………? महात्मा विदुर अपने भाइयों मैं सबसे बुद्धिमान ,सर्वगुणसम्पन्न विद्वान् और योद्धा थे | उनकी नीतियां बिदुर नीति के नाम से प्रसिद्द हुयी | जबकि उनके बड़े भाई धृतराष्ट्र जन्म से अंधे और पाण्डु जन्म से पीलिया के मरीज थे | बिदुर इतने गुणवान होने पर भी क्यों त्याज्य हुए ….? क्योंकि उनकी माता दासी थी | जबकि ध्रतराष्ट्र और पाण्डु की माता रानी थी | जबकि सर्व बिदित है कि तीनों भाइयों के पिता महान ऋषि वेदव्यास ही थे |.वंश तो पितामह भीष्म का ही चला |……………………………………….दलितों का उद्धार करने की हामी रखने वाली राजनीतिक पार्टियां दलितों का उपयोग केवल वोटों के लिए ही करना चाहती हैं | अपने को स्थापित करने को लालायित एक राजकुमार(रोहित शेखर ) क्यों नहीं धृतराष्ट्र या पाण्डु की तरह स्थापित हो पा रहा है | क्यों बिदुर सा राजपाट से अछूत माना जा रहा है | …………………क्या पितृ मातृ भक्त श्रवण कुमार की तरह ही दशरथ द्वारा रोहित का राजनीतिक अंत हो जायेगा | या कोई दलित उद्धारक बन मुक्ति मार्ग प्रदान करेगा …? |………………या बिदुर की तरह राजनीती से अछूत होते महात्मा बनना पड़ेगा ….?…महात्मा बिदुर महाभारत के युद्ध मैं एक निर्णायक जीत की शक्ति पा चुके थे | किन्तु भगवन श्रीकृष्ण की कुशल कूटनीति ने उन्हीं निष्क्रिय बना दिया था |…और कौरव युद्ध हार गए थे |……………क्या पितृ भक्तों का श्रवण कुमार सा ही अंत होता है | क्या राजनीतिक सत्ता पाने के लिए औरंगजेब बनना जरुरी होता है | या अखिलेश की तरह पिता मुलायम सिंह और निकट सम्बन्धियों से कूटनीतिक तौर से सब कुछ हथिया लेना पड़ता है | पितृ भक्त प्रताड़ित हो महात्मा कहलाते हैं और पितरों से सब छीन झपटकर हथिया लेने वाले सत्ता सुख पा सम्मानित हो जाते हैं|…….बिदुर मैं सत्ता सुख की महत्वाकाँक्षा ही समाप्त हो गयी थी या मजबूरन महात्मा मार्ग अपनाया ..? ……………………………………किन्तु रोहित शेखर मैं पितृ भक्ति भी है और सत्ता सुख की महत्वाकांक्षा भी | सत्ता सुख के लिए पितृ भक्ति या पित्रोद्धार के लिए सत्ता सुख …? |…जो भी हो बिदुर तो कौरव और पांडवो के युद्ध से सत्ता सुख नहीं पा सके | किन्तु रोहित शेखर कौरव ,पांडव की तरह भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को लड़वाकर पितृ भक्ति से सत्ता सुख की तरफ अवश्य स्थापित हो सकते हैं | ………….भविष्य ही बतलायेगा की वे पितृ भक्त श्रवण कुमार की तरह अंत हो जाते हैं या बिदुर की तरह महात्मा कहलाते हैं | या अखिलेश की तरह अपने को स्थापित कर पाते हैं | महात्मा बिदुर बनने के लिए तो वर्षों गंगा (भाजपा) स्नान करना ही पड़ता है | ………………..ॐ शांति शांति शांति



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
February 12, 2017

आपने अपने व्यंग्य रुपी हथौड़े की चोट तथ्यों रूपी कील के ठीक शीर्ष पर की है आदरणीय हरिश्चन्द्र जी | समेकित उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड दोनों ही की राजनीति के पितृपुरुष तिवारी जी ने पुत्रमोह में आकर अपनी वृद्धावस्था में अमित शाह के सम्मुख नतमस्तक होकर अपने सम्मान को न्यून ही किया और तदोपरान्त भी मिला कुछ नहीं । उनका अत्यंत स्वार्थी पुत्र अपने राजनीतिक करियर के लिए अपने पिता के स्वर्णिम राजनीतिक अतीत तथा विराट व्यक्तित्व का व्यापार कर रहा है । ऐसा पुत्र ईश्वर किसी को न दे । महात्मा विदुर तो लोभ-मोह से ऊपर उठ चुके महापुरुष थे । उनसे ऐसे व्यक्तियों की भला क्या तुलना ?

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    February 13, 2017

    जीतेन्द्र जी ..याद कीजिये भगवान का वादा …यदा यदा ही धर्मष्य ग्लानिर्भवतु भारतः…..और ओम शांति शांति पाते सो जाइये ।


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