PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

231 Posts

953 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15051 postid : 1181734

स्वामीभक्त,कुत्ता पुराण-15

  • SocialTwist Tell-a-Friend

व्यंग.Image result for kutta.कुत्ता एक बहुत ही समझदार बफादार प्राणी है उसका धर्म है भोंकना ,,,वो निर्विकार निराधार भोंकता ही रहता है | सुख हो दुःख हो अच्छा हो बुरा हो ,चाहे फायदा हो या नुकसान ही क्यों न हो सभी मैं वह एक समान भोंकता रहता है | इसीलिये इसको universal truth भी कहा जाता है | ,एक सबल कुत्ता जब गली के मुहाने पर भोंकना शुरू करता है तो अन्य कमजोर कुत्तों ने अपने धर्म का पालन करते हुए भोंकना अवश्यक होता है कुत्ता कियों भोंक रहा है यह भी एक फिलाश्फी है अगर साफ़ सुथरे कपड़ो मै कोई स्वस्थ ब्यक्ति दीखता है तो नहीं भोंकना है ,,यदि कोई भागता नजर आए तो भोंकना है , भागता रहे तो भोंकते रहना है ,,रूक जाये तो सँभल कर स्तिथि देखना है कोई प्रहार तो नहीं होगा ,,यदि ब्यक्ति डरा नजर आये तो काटने को तैयार होना है ,,यही स्तिथि उस फटे पुराने गरीब लाचार सा ,हाथ मै गन्दा सा थैला लेकर जाता नजर आये तो ,या बड़ी हुई दाड़ीवाला हो तो अवस्य ही भोंकना है मौका मिले अवस्य काट लेना है ,,शोर मचाता सा कोई बाहन जाये वो चाहे कितना बड़ा कियों ना हों अवस्य भागते भोंकते पीछा करना है ,,यह कुत्तों की स्वामी भक्ति की सिक्स सेंसर होती है ऐसा कियों होता है वो नहीं जानता न ही उसने सोचना है ,,,,,,,,,Image result for kutta,,,,,,,,,, सेक्स मै कोई नाता रिश्ता नहीं मानता इसको वो बेकार के बंधन ही मानता है ,,खुले तौर पर कही भी कभी भी संयुक्त तौर से मिल बाँट कर इमानदारी से नंबर लगा लेते है और जगह तो एक दुसरे को काट खाने को दौड़ते है लेकिन यहाँ सब साथ साथ रहकर फ़िल्मी आनंद लेते है पैर टूट जाये घायल हो जाये घिसटते भी इस आनंद को नहीं छोड़ते ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,जिस ब्यक्ति के लिए मालिक ने उकषा दिया उसे तो फाड़ के फाँकने से नहीं हिचकिचाना है वो चाहे बहूत बड़ा नेता,,,,,, अभिनेता या ,,,,,, पहूचा हुआ धार्मिक संत ,,,,,,,,,,,,,,, ही कियों न हो ,,,,इतना भोंक भोंक के शोर मचाना या काट खाना है की सारे मोहल्ले के लोग धर्मी अधर्मी लोग भी उसे चोर और कुकर्मी समझ कर उसे धुत्कारे और कुत्तो के सुर मै सुर मिलते अपनी मानवीय भाषा मै भोंकने लगे,,और उसे जेल तक की हवा खिलने से भी न चुके | …………………….कुछ कुत्ते सुन्दर होते हैं कुछ शांत ,कुछ खूंखार से लगते हैं कुछ बुद्धिमान तो होते हैं किन्तु खूंखार नहीं | कुछ भोंकते तो हैं किन्तु छोटे से साफ सुथरे प्यारे लगते हैं | |,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,इसके लिए उनमे नसल बनानी होती है ब्रीडिंग करके ,,एक नसल वाला कुत्ता वही होता है जिसको जिसका भोंकना सबको अच्छा,लगता है या अपने अपने उपयोग के अनुसार ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,यह सब गुण भी कुत्तो मै अपने आप नहीं आते सबसे खून्कार कुत्ता जर्मन सेफार्ड होता है उसकी ब्रीडिंग ब्रिटिस बुद्दिमान कुत्ते से करके यदि किसी हिंदुस्तानी संस्कारी कुत्ते के यहाँ कुछ समय रखा जाये तो वो जर्मन व ब्रिटिस कुत्ते के मिले गुणों वाला बफादार , खूंखार के साथ मै संस्कारो वाला कुत्ता ही होगा ,,जो अपने महत्व को ब्रिटिश कुत्ते की तरह ही नहीं उससे भी उचाईयो तक ले जायेगा ,,,उसकी बुद्धिमानी से खूंखार भोंकने की आवाज स्वामिभक्ति के गुरों से परिपूर्ण होगी ,,जिसका भोंकना पूरी दुनिया ही नहीं भविष्य मै अंतरिक्ष तक गूंजेगा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भोंकते तो जंगल मै सियार भी है जिन्हें ये भी पता नहीं होता कैसे भोंका जाता है कियों भोंका जाता है एक कही दूर भोंकता है तो एक दूर दूसरी दिशा मै बेसुरा अपनी प्रतिध्वनि मै या अपने साथियों के प्रतिउत्तर मै ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,इन्हीं गुणों से भरपूर समझदार भोंकने वाले कुत्ते की मांग बहुत होती है | जो केवल उसी पर भोंके जिसको मालिक चाहता है | न सिर्फ भोंके बल्कि उसका जीना दूभर कर दे | ऐसे कुत्तों से स्वामिभक्ति की यही परीक्षा होती है की वह अपने विवेक को नहीं उपजाए | किन्तु मनुष्यों की तरह इस जाति के कुत्ते कभी कभी अहंकारवश यह गलती कर बैठते हैं और किसी पर भी अपने मन मुताबित भोंक पड़ते हैं | किसी बाहर के व्यक्ति तक की गलती को तो मालिक नकार भी देता है किन्तु जब अपने ही घर के लोगों या यार दोस्तों को भोंक पड़े तो मालिक के लिए असहनीय हो जाता है | यहीं पर इस नस्ल की कुगत हो जाती है | मालिक की मार् या खाना बंद तक कर दिया जाता है | सामाजिक बहिस्कार करते उसे बंधन मैं बांध देना पड़ता है | तब ऐसे कुत्ते तो आत्म ज्ञान हो जाता है | और अपनी औकात समझने लगता है | ……………मालिक भी तुलसीदास के दोहे को याद करके ऐसे कुत्ते को सबक सिखाना धर्म मानता है …………………………………………………..ढोल गंवार शुद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,यदि सबक नहीं सिखाया तो ऐसे कुत्ते को हम ,,,,,,, ओम ……. शांति …..शांति …..शांति ….का जाप करते चुप नहीं करा पाएंगे ,,लेकिन कभी कभी ऐसे कुत्ते की विवेक क्षमता मालिक के लिए भूल सुधार की दिखावा दर्शाना लाभदायक भी बन जाता है | …………………………………………,और नयी नयी नस्ल को भी तो तैयार करना होता है जिसकी भविष्य मैं माँग बहुतायत मैं बनी रहेगी | ऐसे कुत्तों पर बहुत खर्च आता है अतः लाखों खर्च करके भी इनके गुणों को बनाए रखना पड़ता है | ताकि मालिक की साख बचते उनका ओहदा भी कायम रहे | कुत्ता क्या समझे की मनुष्य भी तो इसी भोंकने के गुणों से ही तो आपने ओहदा पाता है | यह ज्ञान होना जरूरी है कि किस पर कब भोंकना है , नहीं है तो मालिक का कहना मानो | वर्ना कहीं मालिक पागल समझकर बर्ताव न करने लग जाये | ……………………...ओम शांति शांति शांति



Tags:   

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
July 1, 2016

श्री हरीश जी आपके लेख ने मुझे मेरे प्यारे जर्मन शैफर्ड बिंगो की याद दिला दी जिनके घर में कुत्ता पलता है उनको वह अपने वच्चों की तरह लगता है |बिंगो 15वर्ष 6माह १८ दिन जिया सड़क का घर है वह सड़क ऐसे पार करता जैसे हर जगह उसका साम्राज्य हो कई बार छोटे ट्रक वालों को ब्रेक लगा कर उसे बचाना पड़ता था वह लोग चिढ क्र कहते थे अभी किसी को होश नहीं है लाटसाहब कहाँ हैं जरा सा टकरा जाएगा इसकी मईयो और पापा डकराते हुए आएंगे उनकी भाषा पर हंसी आती थी |

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 2, 2016

    शोभा जी आभार ,आप भी उलझ गई ,यह कुत्तों पर  लेख नहीं ,कुत्तों के बहाने व्यंग ही है ।चित्त को शांत करके प्राणायाम  के पष्चात पडें तो आपको हॅसी अवष्य आयेगी । बाकी इशारों को अगर समझो राज को राज रहने दो । ओम शांति शांति ही उचित है 


topic of the week



latest from jagran