PAPI HARISHCHANDRA

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योगासन सम्राट"शीर्षासन" कांग्रेस ही करती

Posted On: 22 Jun, 2016 Others,हास्य व्यंग,Politics में

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व्यंगासन ..योगासनों का सम्राट आसन शीर्षासन माना जाता है | एक अकेले शीर्षासन मैं वे सभी गुण होते हैं जो सभी आसनों के करने से भी नहीं मिल पाते हैं | शीर्षासन करने वाला अन्य कठिनतम आसान भी सुगमता से सिद्ध करता जाता है | शीर्षासन करने वाले के सभी अंग सुचारु रूप से काम करते हैं और लचीले हो जाते हैं | मांसपेसियों मैं कड़ापन नहीं रहता | एक बलिष्ट व्यक्ति से भी अधिक सहनशीलता आ जाती है | थकान तो होती ही नहीं है | इसलिए योगासन को आरम्भ करने वाले को शीर्षासन से ही आरम्भ करना चाहिए ताकि अन्य आसान सुगम हो जाएँ | शीर्षासन सिद्ध की बॉडी देखने मैं साधारण लगती है किन्तु शक्ति मैं वे किसी बलिष्ट को मात दे देते हैं | ……………………….यदि टीनेजर हैं और साधारणतयः स्वस्थ हैं तो शीर्षासन सुगमता से कर सकते हैं किन्तु यदि उम्र ज्यादा हो गयी हो तो योग गुरु के सलाह से करना चाहिए | ……………………………………………………….कांग्रेस भी जब टीनेजर थी तभी से शीर्षासन से अपने को लचीला बना चुकी थी | नेहरू परिवार मैं तो मोतीलाल नेहरू जी शीर्षासन सिद्ध कर चुके थे | जिसके बाद जवाहर लाल जी ने सिद्ध कर लिया था | योगासन उनके लिए सुगम हो चुके थे | उसके बाद इंदिरा गांधी जी ने शीर्षासन की सिद्धी पाते कांग्रेस को पुनः सिद्ध कर लिया था | इंदिरा गांधी जी की इतनी सिद्धी थी की उस युग की अन्य राजनीतिक पार्टियां लाख कोशिशों के बाद भी कोई आसन नहीं कर सकीं | जनसंघ रूप मैं अटल विहारी बाजपेयी जी और आडवाणी जी भी लाख कोशिशों के बाद भी शीर्षासन सिद्ध नहीं कर पाए | ……फिर संजय गांधी ने और राजीव गांधी ने भी शीर्षासन की सिद्धि पाते कांग्रेस को नयी उंचाईयां प्रदान कर दीं | ……….. किन्तु कांग्रेस का दुर्भाग्य सोनिया गांधी जी विदेशी होने के कारन इस सिद्ध शीर्षासन विद्या को नहीं सिद्ध कर पाई | किन्तु भाग्यवश इस सिद्धी को अर्जुन सिंह जानते थे जिसका ज्ञान कालांतर मैं सोनिया गांधी जी को दिया और पुनः कांग्रेस दस वर्षों तक सिद्ध हो गयी | ……………अटल विहारी बाजपेयी जी और आडवाणी जी भी इस विद्या का ज्ञान प चुके थे किन्तु अधिक आयु हो जाने के कारन और ख़राब स्वास्थ के कारण शीर्षासन पुनः नहीं कर पाए | ……………………..और मन मोहन सिंह जी सोनिया गांधी के शीर्षासन ज्ञान का लाभ पाते रहे | स्वयं अधिक आयु होने के कारण और दो बार बाई पास सर्जरी हो जाने के कारण वे शीर्षासन के अयोग्य हो चुके थे | …………किन्तु भारतीय जनता पार्टी मैं कई नेता शीर्षासन को सिद्ध करने के लिए प्रयास रत थे | जिसको स्वामी रामदेव जी ने सुगम कर दिया | और नरेंद्र मोदी जी ने आखिर शीर्षासन सिद्ध कर ही लिया | ……………………………………………………………………………………..अधिक उम्र मैं शीर्षासन घातक हो सकता है अतः राम देव जी ने और मोदी जी ने विश्व योग दिवस मैं इसको मान्यता नहीं दी | ………………………….अभी राहुल गांधी जी अपने कुल द्वारा सिद्ध योगासन शीर्षासन को सिद्ध करने के योग्य हो सकते हैं | बाल ब्रह्मचारी भी हैं | अतः बार बार विदेश मैं जाकर योगासन शीर्षासन सिद्धि हेतु प्रयास रत हैं | कहा जाता है की संस्कारों से विद्या सुगमता से हासिल हो जाती है | और आनुवंशिकता भी मार्ग सुगम कर देती है |……एक सिद्ध परिवार के लिए ऐसे साधारण से योगासन शोभा नहीं देते हैं अतः नेहरू गांधी सिद्ध परिवार विदेशों मैं या अपने महलों मैं ही सिद्धासन करते हैं | ….……………मोदी जी को इस ब्रह्माश्त्र से शीर्षासन का ज्ञान तो अवश्य होगा किन्तु वे भी सतर्क अवश्य होंगे | यह समय ही बताएगा की शीर्षासन पुनः कौन सिद्ध कर पाता है | नीतीश लालू जैसे तो शीर्षासन मिलकर ही सिद्ध कर सकते हैं क्यों की उनकी आयु बाधक होगी | अतः वे संगीत से ही सिुद्धि मार्ग खोजेंगे | किन्तु अरविंद्र केजरीवाल की आयु भी कम है और वे शीर्षासन सिद्धि को लालायित भी हैं अतः उनको पुनः मौका ही नहीं दिया गया | ……………....कहीं कोई गायत्री मन्त्र का सिद्ध भी इन दोनों सिद्धों को परास्त करता हुआ अंतरिक्ष मैं धूमकेतु सा उदय भी हो सकता है | क्यों की कम उम्र के बालक शीर्षासन सिद्ध करते अन्य योगासन सुगम बना लेते हैं | गायत्री मन्त्र को सिद्धि मार्ग से हटा देना ही घातक हो सकता है भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को शवासन करने को मजबूर कर सकता है ………………..ओम शांति शांति शांति



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 29, 2016

श्री हरीश जी आपकी जटिल बातें समझने के लिए मुझे दो तीन बार लेख के कुछ हिस्से पढने पड़ते हैं तब उनकी गूढ़ता समझ में आती है “मोदी जी को इस ब्रह्माश्त्र से शीर्षासन का ज्ञान तो अवश्य होगा किन्तु वे भी सतर्क अवश्य होंगे | यह समय ही बताएगा की शीर्षासन पुनः कौन सिद्ध कर पाता है | नीतीश लालू जैसे तो शीर्षासन मिलकर ही सिद्ध कर सकते हैं क्यों की उनकी आयु बाधक होगी | अतः वे संगीत से ही सिुद्धि मार्ग खोजेंगे | किन्तु अरविंद्र केजरीवाल की आयु भी कम है और वे शीर्षासन सिद्धि को लालायित भी हैं अतः उनको पुनः मौका ही नहीं दिया गया | …”आजकल केजरीवाल जी मोसी जी को बस शीर्षासन ही करा रहें हैं |

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 30, 2016

    शोभा जी आभार ,वास्तव मैं शीर्षासन ऐसा आसन है जिसके करने से शरीर के सभी भीतरी और बाहरी अंगो का व्ययाम हो जाता है ।जबकि अन्य आसन किसी विशेष अंग के लिए होते हैं । ऱाजनीति मैं भी य़ही होता है । सबसे अधिक समय तक शीर्ष पर रहने वाले सिद्ध जवाहर लाल , इंदिरा गाॅधी ,और मनमोहन सिंह रहे । बाकि अन्य तो शवासन के बाद पुनः शीर्षासन नही कर पाये । कांगेस शवासन करके पुनः शीर्षासन सिद्रध कर लेती है । शवासन तो हर योगासन के बाद अवष्य करना होता है ।लालू नीतेश ने तो योग दिवस का बहिष्कार करते संगीत दिवस मनाया । और केजरीवाल को योग का निमंत्ण ही नहीं दिया गया ।ओम शांति शांति 

jlsingh के द्वारा
June 27, 2016

कहीं कोई गायत्री मन्त्र का सिद्ध भी इन दोनों सिद्धों को परास्त करता हुआ अंतरिक्ष मैं धूमकेतु सा उदय भी हो सकता है | क्यों की कम उम्र के बालक शीर्षासन सिद्ध करते अन्य योगासन सुगम बना लेते हैं | आदरणीय सर जी, आपके निहतार्थ तो बहुत ही गूढ़ होते हैं, इसलिए पाठक आपसे प्रश्न पूछते हैं. कई बार मैं भी प्रश्न कर लेता हूँ. शिष्य को अगर नहीं समझ में आये तो पूछ लेना चाहिए. गुरु अगर ज्ञानी है तो जिज्ञाषा शांत कर देता है. इधर स्वामी जी भी वाचालासन करते ही जा रहे थे, उन्हें मोदी जी ने गुरुमंत्र दे दिया है. अगर तब भी न संभले तो तो बहिर्गमनासन निश्चित है. आप लिखते रहें हम सब लाभान्वित होते रहें! सादर! ओम शांति शांति शांति!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 28, 2016

    जवाहर जी आपकी प्रेरणा पाकर मेरी कलम गुलाचें मारने लगी है । मेरे व्यंग को आप से विद्वान शीघ्र समझ जायेंगे क्रपया ओम शांति शांति हेतु  नासमझी का नाटक कर देना । 

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
June 27, 2016

हरीश चन्द्रा जी योग आसनों को लेकर मौजूदा राजनीति पर अच्छा व्यंग्य लिखा है । साधुवाद ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 27, 2016

    आदरणीय विष्ट जी सादर आभारासन ओम शांति शांति 

sadguruji के द्वारा
June 27, 2016

आदरणीय हरीश चन्द्र शर्मा जी ! अच्छे व्यंग्य लेखन के लिए अभिनन्दन ! शीर्षासन यानि सत्ता के शिखर पर पहुँचने की कोशिश सदैव होती रही है और भविष्य में भी होती रहेगी ! सादर आभार !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 27, 2016

    आदरणीय सदगुरु जी सादर दंडवत प्रणामासन ओम शांति शांति 

Jitendra Mathur के द्वारा
June 24, 2016

यदि आप अपने लेख में उल्लिखित शीर्षासन का भावार्थ भी स्पष्ट कर दें तो पाठक संभवतः आपके अभिव्यक्त विचारों को ठीक-ठीक समझ सकें ।  आपकी बात कुछ अधिक ही गूढ़ सिद्ध हो रही है । हम शीर्षासन तो समझते हैं लेकिन राजनीतिक संदर्भ में उसका आशय आपके बताए बिना पल्ले नहीं पड़ेगा ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 24, 2016

    जितेन्द्र जी य़ोग मै शीर्षासन यानि सिर के बल उलटा होना । यह सभी जानते हैं किंतु शीर्ष का शाब्दिक अर्थ शीर्ष यानि उच्चतम शिखर पर रहना । जो काॅग्रेस सदा ही लगभग शीर्ष पर रही । यानि शीर्षासन करती रही । भाजपा य़ा मोदी जी शीर्ष पर केवल दो वर्ष से है कब तक कायम रहेंगे ,यह समय ही बतायेगा । इसलिए वह अन्य आसन  ही तो कर रही है । काग्रेस तो अपनी स्थापना से ही शीर्षासन कर रही है । यही इस ब्यंग का भाव है ओम शांति शांति 

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 22, 2016

एक सिद्ध परिवार के लिए ऐसे साधारण से योगासन शोभा नहीं देते हैं अतः नेहरू गांधी सिद्ध परिवार विदेशों मैं या अपने महलों मैं ही सिद्धासन करते हैं | ….…


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