PAPI HARISHCHANDRA

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मंहगाई नाशक "राम रुपया"बनाओ

Posted On: 1 Jun, 2016 Others,हास्य व्यंग,Politics में

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मंहगाई नाशक “राम रुपया”.यानि सौ रूपये का एक राम रुपया ……..भगवन(मोदी जी ) को प्रसन्न करने के अनेक गुर हैं कोई वर्षों निराहार रहकर बड़ी मुश्किल से भगवन को प्रसन्न कर पाता है.कोई वर्षों बाद भी कार्यकर्त्ता ही रहता है | कोई क्षण मात्र मैं अपने गुर से भगवन से वरदान पा लेता है | विभीषण से बागी तो तुरंत राजपाठ पा लेते हैं | रघुराम जी को यदि राम रुपया बनाने मैं सफलता मिल जाती है तो भगवन को शीघ्र ही प्रसन्न किया जा सकता है | राम मंदिर बन्ने से भी अधिक वोटों का कारक बन जायेगा राम रुपया | भगवन के विश्वशनीय नारद मुनि से बन जायेंगे रघुराम जी | न ही उन्हें शिकागो वापस जाना पड़ेगा | न ही स्वामी जी के ताने सुनने पड़ेंगे |

GcpN.41Raam10.2001.GcpN.41Raam2001r..कलकत्ता बना कोलकता ,बॉम्बे बना मुंबई ,बंगलौर बना बेंगलुरु ,जाने कितनी सड़कों आदि आदि का नाम हिन्दीकरण हो चूका है ,जो भारतीय जनता पार्टी ने नहीं कांग्रेस ने ही किया है | दिल्ली के कनॉट प्लेस को राजीव गांधी चौक से नवाजा गया |..अंगरेजी नामों को भारतीय नामों मैं स्थापित करके कांग्रेस ने भारतीयों पर उपलब्धी सिद्ध कर दी है | ………………………………………………………..अब भारतीय जानता पार्टी और उसके नेत्तृव मोदी जी की बारी है | ………………………...एक युग था जब रूपये आने पाई के रूप मैं भारतीय मुद्रा थी जो अंगरेजी शासन काल था | फिर रुपया नया पैसा के रूप मैं मुद्रा बनी ,एक रूपये मैं100 नए पैसे | एक रूपये के छुट्टा की भी बहुत अहमियत थी | पांच पैसे की चाय मिलती थी | जो सब्जी लेने बाजार जाते थे तो एक रुपया बहुत होता था | पैसे आने के भाव ही चला करते थे | सब कुछ एक रूपये के छुट्टे मैं खर्च चल जाता था |.दिल्ली जाने के लिए 100 रूपये पर्याप्त होते थे 20 रूपये किराया खाना पीना घूमना सभी हो जाता था | एक एक पैसे की अहमियत थी | आजकल हजार का छुट्टा भी आसानी से हो जाता है | उन दिनों एक रूपये का छुट्टा भी ब्लैक से लेना पड़ता था | किसी भी सामान की कीमत मैं पैसे जरूर जुड़े होते थे | सवा रूपये तो पंडित जी की दक्षिणा ,या भगवन का चढ़ावा होता था | भारत के आपातकाल के समय 10 पैसे की चाय 25 पैसे की हो गयी थी | चीनी पांच रूपये किलो हो चुकी थी जो कि जनता दल सरकार ने आते ही सवा रूपये किलो कर दी थी | चाय 25 पैसे पर ही स्थिर हो गयी | ऐसी महिमा थी पैसों की | हजार रूपये तनखा वाला ऑफिसर ही होता था …………………………………………………………...वर्तमान भारतीय मुद्रा रूपये है जिसमें 100 पैसे होते हैं यह बच्चों को पढ़ाया जाता है,किन्तु पैसे कहाँ हैं कोई नहीं जानता ,जानता भी है तो उसकी कोई मूल्यांकन नहीं हैं | जिसका कोई मूल्य या दर्शन नहीं उसको भगवन की तरह क्यों पूजा जाता है | आजकल तनखायें भी लाखों रुपयों मैं होती है| जब रूपये की मूल्यांकन पैसे सी हो चुकी है तो उसे क्यों नहीं हटा दिया जाता | रूपये को पैसे सा मूल्य देकर नयी मुद्रा ‘राम’ ( जो की100 रूपये की हो ) निश्चित की जाती |} जो की भारतीय जनता पार्टी के लिए ”राम ” नाम की उप्लभ्धी बन जाएगी | यानि 100 रुए का एक ‘राम ‘ | 99 रूपये के बाद 100 रूपये न होकर एक राम ..| एक लाख रूपये गिनने की जरूरत नहीं होगी | दस हजार रूपये के 100 ‘ राम ‘ | 1000 ‘राम’ के एक लाख | छुट्टा भी100 रूपये के नोट की जगह एक ”राम” का ही होगा | कितना सुगम हो जायेगा एक लाख की गिनती 1000 ‘राम’ हो जाएगी |डॉलर भी भारतीय ‘राम’ के आगे घुटने टेकेगा | एक ‘राम’ का मूल्य डॉलर से ऊँचा हो जायेगा | एक ‘ राम ‘ का डेड डॉलर ..| मजदूरों की मजदूरी भी 500 रूपये से 5 ‘राम’ ही देनी पड़ेगी | 50 हजार रूपये के स्कूटर केवल 500 ‘राम’ के मिल जायेंगे | कभी किसी युग मैं मिला है पांच सौ रूपये का स्कूटर ……? पांच लाख की कार भी केवल 5000 ‘राम’ की मिल जाएंगी | एक करोड़ रूपये सिर्फ एक लाख ‘राम’ तक ही गिनने पड़ेंगे |.करोड़ों रूपये की प्रॉपर्टी जिसको सुन कर घबराहट होती है ,लाखों ‘राम’ मैं सिमटकर उत्साह्बर्धन करेगी | बच्चों को भी एक राम जेब खर्च देकर संतोष पा लेंगे |………………होटल मैं खाने का एक दो ‘राम’ ही देना पड़ेगा | सोने का मूल्य तीन चार हजार ही गिरा है किन्तु ‘राम’ की कृपा होते ही 100 गुना गिर जायेगा यानि वर्तमान मैं 26 हजार रूपये के ,केवल260 ‘राम’ पर ही मिल जायेगा | मंहगाई का रोना रोने वालों के मुंह मैं फेविकोल लग जायेगा |Indonesian Rupiah with Ganesh inscriptionइंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देश मैं गणेश भगवन की चिन्ह वाला नोट  …………………………………………..’.राम ‘ की महिमा कितनी होती है अब स्वयं ही सिद्ध हो जायेगा | हजारों वर्षों से राम की महिमा को समझते हुए ही तो राम के नाम को अपने आगे पीछे लगाकर भी अपने को महान सिद्ध करते रहे हैं | वे चाहे आशाराम हों या राम पाल ….| हर 100 मैं एक नाम राम मय मिल ही जाता है | धन को लक्ष्मी स्वरुप माना जाता है इसलिए धन यानि लक्ष्मी के पति विष्णु के अवतार राम को मुद्रा स्वरुप मेल हिन्दू धर्म मर्यादा को और भी म्हणता पर स्थापित करेगा | राम राज्य के स्वप्न को पुनः साकार कर दिखा चुके मोदी जी और उनकी भारतीय जनता पार्टी के लिए इससे उत्तम मर्यादा स्वरुप उपलब्धी और क्या हो सकती है | कांग्रेस तो कांग्रेस ,भारत मैं कम्युनिष्ट विचारधारा वाले अधर्मी भी ‘राम’ के नाम को नहीं प्रतिस्थापित कर सकेंगे | ‘राम’ नाम हर भारतीय का क्या ,सम्पूर्ण विश्व का अंग हो जायेगा | कितना उत्तम होगा ‘राम’ नाम लेते लेते सम्पूर्ण विश्व वैकुण्ठ अवश्य जायेगा | कोई भी पापी तो रह ही नहीं सकता | पाप करते करते उसके पाप स्वतः ही धुलते रहेंगे | ‘राम’ का नाम मुंह मैं तो होगा ही सबकी जेब मैं रह क़र भी मुक्ति मार्ग देते शांति प्रदान करेगा | पापों को धोने का सबसे सुगम उपाय गंगा स्नान भी न कर सकने वाले पापिओं के लिए ,और उससे भी सुगम उपाय महात्मा गांधी स्वच्छता अभियान मैं भी झाड़ू न लगा सकने वाले पापिओं के लिए ‘राम’ स्वतः ही मुक्ति प्रदान कर देगा | ,………………………………………………………………………………..यह सब एक कपोल कल्पित धारणा नहीं | ऐसा हमारे देश के महान संत पुरुष महेश योगी जी पहिले ही कर चुके हैं | किन्तु मैनेजमेंट क्षमता संकुचित परिवेश ही पा सकी |देश से अधिक वह विदेश में लोकप्रिय थे. नीदरलैंड में तो उनके द्वारा बनाई गई मुद्रा “राम” का चलन भी है. नीदरलैंड की डच दुकानों में एक राम के बदले दस यूरो मिल सकते हैं. ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस के पास इतनी संपत्ति है जितना भारत के एक राज्य की वार्षिक कमाई. 250 अरब की संपत्ति के मालिक महर्षि महेश योगी कई कामों में पैसा लगाते थे जैसे शिक्षा और प्रॉपर्टी. बिटलस के साथ उनकी निकटता की वजह से ही उन्हें विदेशों में इतनी सफलता मिली. लेकिन उनके पास जो बेशुमार दौलत है उसमें से ज्यादातर पैसा धर्म के नाम पर ही कमाया गया है.|………………………………………………………………. अब भारतीय जनता पार्टी और क्षमतावान युग पुरुष मर्यादा राम से मोदी जी अवश्य यह सब कुछ हिंदुस्तान मैं साकार कर देंगे | मंहगाई के बोझ से जूझते आम जन राम राज्य की मुद्रा ‘राम’ पाकर कृतार्थ हो जायेंगे | अब घोटाले भी करोड़ों से सिमट कर लाखों को भी नहीं पार कर सकेंगे | अंगरेजी का रुपया अपने आप सिमटकर ‘राम रुपया’ रह जायेगा |कांग्रेस ने असख्य नाम हिन्दीकरण किये किन्तु भारतीय जनता पार्टी का एक नाम का हिन्दीकरण ही युगों युगों तक अमिट हो जायेगा | जैसे गरीबों की चाय ,और अमीरों की बुलेट ट्रैन | गरीबों के शौचालय और अमीरों की विकसित द्वारिकाएं..( स्मार्ट सिटी ).. | वैसे ही अंग्रेजों की रुपया मुद्रा और भारतीयों के ‘राम’ | यानि ”राम रुपया” …| कलियुग मैं भी राम राज की परिकल्पना मोदी जी ‘राम रुपया’ से पूरी कर देंगे……………………………………………………………………………..रघु राम जी भी राम के प्रभाव मैं हैं अतः उनको भी इस धारणा पर कोई आपत्ति नहीं होगी | अर्थ व्यवश्था के लिए यह स्वर्ण मय युग सिद्ध हो जायेगा | सेंसेक्स जहाँ नयी नयी उंचाईयां पाता जा रहा है ‘राम’ के आते ही डॉलर भी पानी भरेगा | भारत का धन काला रूप पा चूका है | 500 और1000 के नोटों मैं छुपा है यह …| 500 और1000 के नोटों को बंद करके गोरे और काले धन की पहिचान भी करा देगा ‘राम ‘……| संसद भी काले धन के खात्मे से जय जय कर कर उठेगी | अब राम भी ‘राम’ नोटों की पूज्य लक्ष्मी होंगे | लक्ष्मी नारायण अब साथ साथ शांति प्रदान करते रहेंगे |……………………………………………... Currency Gandhi Hindi 111111मोहन दस करम चाँद गांधी यानि राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की म्हणता त्याग बलिदान भारतियों की नस नस मैं खून के कतरे कतरे मैं बस चूका है | गांधी जी नोटों मैं रहें,न रहें भारतीय जनता के दिल दिमाग से नहीं हट सकते हैं | क्यों नहीं कानून के मुताबित उनके चित्र को वैध किया जाता |रिज़र्व बैंक के द्वारा भेजे विचाराधीन मुद्दे उच्च स्तरीय समिति के पास है ,जिनमें पांच मुख्य विचाराधीन मुद्दे हैं ……..१..ऐसी डिजाईन जो भारत की संस्कृति और इतिहास को पेश करती हो या आधुनिक और भविष्य को दर्शाने वाली हो ……२… नकली नोट बनाना लगभग असंभव और बहुत मंहगा हो जाये ………..३.. डिजाईन लोगों को आकर्षक और सुन्दर लगे ……………………………४.. कम दृष्टी वाले या नेत्र हीनों को भी पहिचानने मैं कोई असुविधा न हो ….५.. मशीनी प्रक्रिया से इस्तेमाल किये जाने लायक डिजाईन | ……विचाराधीन मैं अशोक स्तम्भ ,का पुनरागमन और संविधान रचयिता बाला साहेब अम्बेडकर हैं | ऐसी द्विधात्मक परिस्थिती मैं हिंदुस्तान के राम राज्य की (,जो हिंदुस्तान के नस मैं बसी है ) ऐतिहासिक संस्कृति नोट मैं स्थापित की जाये | भारत की पहिचान हिन्दू ,हिंदी हिंदुस्तान है | सबसे पुरातन संस्कृति क्यों नहीं झलकनी चाहिए नोटों मैं | …………………..महर्षि महेस योगी जी जब ‘राम’ मुद्रा को नीदरलैंड (हॉलैंड ) मैं यूरो के समकक्ष स्थापित करते हुए राम की महिमा गौरवान्वित कर सकते हैं तो क्यों नहीं हिन्दू विचारधारा की पार्टी भारतीय जनता पार्टी (जो राम के नाम से ही उंचाईयां पा चुकी है )राम राज्य मुद्रा स्थापित कर सकती है | जन समर्थन भी प्रबल है ,प्रबल सरकार है | मोदी सा पराक्रमी सम्राट है | मोदी युग की पहिचान राम राज्य की तरह हो | ऐसा मौका फिर कहाँ कब मिलेगा | सम्राट की पहिचान ही उस युग के मुद्रा से होती है | सुविधाजनक मुद्रा का चलन करके जन समुदाय की वाह वाही विश्व मैं गुंजायमान होती रहेगी |……………. ओम शांति शांति



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
June 19, 2016

बहुत ही प्रभावशाली व्यंग्य है आदरणीय हरिश्चंद्र जी । आपके सभी लेख पढ़ता हूँ लेकिन मेरी अल्पबुद्धि यह समझने में विफल रहती है कि टिप्पणी क्या की जाए । आपने जो लिखा है, वह सीधे लक्ष्य पर जा लगने वाले रामबाण जैसा ही है । रघुराम राजन ने विवादों से छुटकारा पाने के लिए स्वयं ही अपना कार्यकाल पूर्ण होने पर दूसरा कार्यकाल लेने से मना कर दिया है एवं पुनः अध्ययन-अध्यापन के क्षेत्र में लौट जाने की घोषणा कर दी है । इसे सुनकर स्वामीजी निस्संदेह हर्षित हुए होंगे ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    June 19, 2016

    आदरणीय माथुर जी भक्ति की शक्ति रघुराम राजन ने नहीं समझी । अब भुकतो शिकागो जैसी कसाइिखाने का बनवास । अयोध्या मैं मन्दिर किंतु राम को बनवास ……ओम शांति शांति 

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 3, 2016

मंहगाई नाशक “राम रुपया”.यानि सौ रूपये का एक राम रुपया ……..भगवन(मोदी जी ) को प्रसन्न करने के अनेक गुर हैं कोई वर्षों निराहार रहकर बड़ी मुश्किल से भगवन को प्रसन्न कर पाता है.कोई वर्षों बाद भी कार्यकर्त्ता ही रहता है | कोई क्षण मात्र मैं अपने गुर से भगवन से वरदान पा लेता है | विभीषण से बागी तो तुरंत राजपाठ पा लेते हैं |

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 3, 2016

जैसे गरीबों की चाय ,और अमीरों की बुलेट ट्रैन | गरीबों के शौचालय और अमीरों की विकसित द्वारिकाएं..( स्मार्ट सिटी ).. | वैसे ही अंग्रेजों की रुपया मुद्रा और भारतीयों के ‘राम’ | यानि ”राम रुपया” …| कलियुग मैं भी राम राज की परिकल्पना मोदी जी ‘राम रुपया’ से पूरी कर देंगे…

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 3, 2016

रघुराम जी को यदि राम रुपया बनाने मैं सफलता मिल जाती है तो भगवन को शीघ्र ही प्रसन्न किया जा सकता है | राम मंदिर बन्ने से भी अधिक वोटों का कारक बन जायेगा राम रुपया | भगवन के विश्वशनीय नारद मुनि से बन जायेंगे रघुराम जी | न ही उन्हें शिकागो वापस जाना पड़ेगा | न ही स्वामी जी के ताने सुनने पड़ेंगे |

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 3, 2016

..यह सब एक कपोल कल्पित धारणा नहीं | ऐसा हमारे देश के महान संत पुरुष महेश योगी जी पहिले ही कर चुके हैं | किन्तु मैनेजमेंट क्षमता संकुचित परिवेश ही पा सकी |देश से अधिक वह विदेश में लोकप्रिय थे. नीदरलैंड में तो उनके द्वारा बनाई गई मुद्रा “राम” का चलन भी है. नीदरलैंड की डच दुकानों में एक राम के बदले दस यूरो मिल सकते हैं. ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस के पास इतनी संपत्ति है जितना भारत के एक राज्य की वार्षिक कमाई. 250 अरब की संपत्ति के मालिक महर्षि महेश योगी कई कामों में पैसा लगाते थे जैसे शिक्षा और प्रॉपर्टी. बिटलस के साथ उनकी निकटता की वजह से ही उन्हें विदेशों में इतनी सफलता मिली. लेकिन उनके पास जो बेशुमार दौलत है उसमें से ज्यादातर पैसा धर्म के नाम पर ही कमाया गया है.|


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