PAPI HARISHCHANDRA

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मोगाम्बो खुश होगा १९ मई को juction forum

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क्या मोगाम्बो खुश होगा 19 मई को …..? विभिन्न राज्यों की सरकारों को ध्वस्त करते खुश होने वाला मोगाम्बो १९ मई के चुनाव परिणामों से खुश होगा …….? अरुणाचल ,उत्तराखंड और अब हिमाचल की ओर ध्वस्तता अभियान ….| आजतक …और सो सॉरी …….? क्या युग आ गया है ….? .लोग अपने को चाणक्य सिद्ध करते महान सम्मान का आभाष करते थे किन्तु अब मोगाम्बो की पदवी पाते भी सम्राट का भाष करते हैं | स्वयं मोगाम्बो की पदवी से सुशोभित किया जाने वाला और उसके समर्थक पार्टी वाले भी कोई विरोध नहीं जता रहे हैं | देश को सब्जी मंडी जैसा बना कर विजय घोष की अनुभूति की जा रही है | जिसके मुंह मैं जो भाव भारत का आता है वहीं वर्णित कर उसके भाव का शोर लगा दिया जा रहा है | भारत माता की जय बोलने का स्थान भी निश्चित किया जा रहा है | झंडा कहाँ फहराया जायेगा यह भी अनिश्चित है | भारत का झंडा लेकर भारत माता की जय के लिए भटकते रहना पढ़ रहा है | …………………….कश्मीर मैं तिरंगा झंडा लेकर भारत माता की जय बोलने वाले प्रताड़ित किये जा रहे हैं वहीँ कश्मीर के बाहर झंडा न फहराने वाले और भारत माता की जय न बोलने वाले प्रताड़ित हो रहे हैं | एक ही देश मैं कहीं धर्म है तो कहीं अधर्म ….| …………………………..क्या पांच राज्यों के चुनाव परिणाम मोगाम्बो को और भी खुशियां देंगे ….? या देश द्रोहिता के संचालक दिल्ली और विहार की तरह मुंह नीचे झुकाने को मजबूर कर देंगे …? और मोगाम्बो को अपनी पार्टी के साथ राम मंदिर की परिक्रमा आरम्भ करने को मजबूर कर देंगे ….? ………………………………………………………………………..शपथ ग्रहण के समय का ब्लॉग ……..मोदी जी, विश्वास दिलाओ.. ”हिंदुस्तान” नहीं, ”नव भारत” होगा …….२४ मई २०१४….और ……………....Happy Independence Dayलाल किले से दहाड़ दो कि यह हिंदुस्तान नहीं नव भारत होगा..…१२ अगस्त २०१४ के ब्लॉग मैं मैंने पुनः निवेदन किया था | …………..शायद आपने पाहिले ही स्वीकार कर लिया होता तो विश्व हिन्दू परिषद या आपके ही सांसदों की वाणी दोषों का दुष्परिणाम न झेलना पड़ता | ओबामा भी अपनी जुबान पर लगाम दे पाते | ………खैर देर आए दुरस्त आए……की कहावत चरितार्थ हुई | ….आपने अपने ७० मिनट के भाषण मैं दहाड़ते हुए स्वीकार कर ही लिया …….हमारी .सरकार का एक ही धर्म है .,पहिले भारत ..इंडिया फर्स्ट ..| हमारी सरकार का एक ही धर्म ग्रन्थ है ….भारत का संविधान …| एक ही भक्ति है भारत भक्ति …….मेरी सरकार की एक ही पूजा है …सवा सौ करोड़ देशवासियों का कल्याण ….| …मेरी सरकार की एक ही कार्यशैली है ….सबका साथ ,सबका विकास …| और इसीलिये हम संविधान की सीमा मैं रहकर देश को आगे बढ़ना चाहते हैं | …………..पूरे ७० मिनट के भाषण मैं आपने एक बार भी हिंदुस्तान शब्द का उच्चारण नहीं किया | यही आपकी नव भारत की स्वीकारोक्ति रही | …………………काश .. यह दहाड़ पहिले सुनायी दे गयी होती …? ….खैर अब भारतीय जनता पार्टी के या बाहर के हिन्दुबादी संगठन या व्यक्ति अब अपनी जवान पर लगाम अवश्य लगाएंगे | विश्व भी मोदी जी की दहाड़ी रंग को अवश्य देखती ललचाएगी | निवेशक इस रंग को ही देखेंगे तभी वे निवेश के लिए ललचायेंगे | जम्बू कश्मीर मैं मुस्लिम पी डी पी से तालमेल करते सरकार बनाना भी निवेशकों के सोच को अवश्य सुधारेगा | पाकिस्तान से वार्ता को पुनः खोलना भी शर्त है | …………………………………एक दहाड़ सर्वत्र शांति | लेकिन कब तक क्या घर वापसी ठन्डे बस्ते मैं रहेगी , धारा ३७० ,राम मंदिर ,एक सामान कानून ….? हिन्दू हैं तो हिंदुस्तान फिर जुबान पर आता जायेगा | क्या इस विचार को उपजाया जा सकता है कि भारत मैं भारतीय रहते हैं जिनके संप्रदाय सनातन धर्म ,मुस्लमान ,सिख , ईसाई ,जैन ,बौद्ध आदि हैं | यदि मोदी जी का मोटो यही है कि सरकार पांच साल सुगमता से गुजारने हैं ,तो उन्हें बदलना ही होगा | हिन्दू वादी संगठनों पर लगाम देनी ही होगी ,अपनी ही पार्टी के हिंदूवादी अरमानों को दृढ़ता से दबाना होगा ,चाहे इसके लिए उनका विरोध ही सहना पड़े | विपक्ष को दहाड़ से संसद मैं दबाया जा सकता है किन्तु अपनों को भी कैसे लगाम दी जाये इसके लिए भी सतर्क रहना होगा | …..विपक्ष का तो एक ही मोटो है मोदी सरकार को हर मोर्चे पर असफल करना | वह कहीं भी इसको उभारकर राजनीतिक लाभ ले लेगा | संयम के लिए बहुत तपस्या करनी होगी | हिन्दू आकांक्षाओं को कुचलना होगा | ……………………..विकास पर ही ध्यान केंद्रित करते सभी कुछ भूलना होगा | विकास के लिए ऍफ़ डी आई चाहिए ,ऍफ़ डी आई के लिए सुन्दर वातावरण भी चाहिए ,| मेक इन इंडिया के लिए भूमि चाहिए ,उसके लिए भूमि अधि ग्रहण बिल पास होना आवश्यक है | यही दोनों साम्प्रदायिक सद्भाव और भूमि की सुनिश्चितता ही विदेशी निवेसकों को आसश्वत कर सकती है | …………………इसी निवेश पर ही मोदी जी की समस्त योजनाओं की सफलता निर्भर करती है | ………………..हर तरफ सेनाएं अपना अपना मोर्चा ले चुकी हैं | दुसमन देश भी अड़ंगा लगाने को तैयार कर चुके हैं | बहुत ही संयम से अहंकार रहित ही पांच वर्ष का कार्य काल विताना होगा | एक योगी ,सन्यासी की तरह | अति आत्म विस्वास मैं विपक्ष को कमजोर समझना मूर्खता ही होगी | विपक्ष किसी भी तरह कमजोर नहीं है ,उसे सिर्फ गलतियों का इंतजार है |………………………………………… इस बात का ध्यान रखना होगा की जैसा भद्रजन करते हैं वैसा ही आचरण आम जनता भी अनुसरण करती है | यह गीता मैं भगवन श्रीकृष्ण ने भी कहा है ………………………………………. ओम शांति शांति शांति शांति शांति



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
April 24, 2016

आदरणीय हरीश चन्द्र शर्मा जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! अच्छा लेख, बस जरा व्यंग्य की मात्रा कम हो गई है ! आपका एक लेख एक जगह पढ़ा था, प्रतिक्रिया भी दिया था, फिर जाने क्यों कुछ ही देर बाद उस मंच से वो लेख गायब भी हो गया था ? सादर आभार !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 24, 2016

     आदरणमीय सदगुरु जी अभिवादन ,जब बाजार के चटरटे खानपान की आदत हो जाती है तो घर का सात्विक खानपान अच्छा नहीं लगता है । समझदार भुक्त भोगी बाजार के चटपटे व्यंजनों से परहेज करते हैं । अब घर मैं बनाने वाले पर निर्बर करता है वह घर मैं ही तीखे चटपटे व्यंजन बना दे या बन जायें । अपना अपना प्रिय स्वाद होता है य़ा मजबूरी ……जिसको जिसमैं शांति  मिले ,ओम शांति शांति होनी चाहिए 

Jitendra Mathur के द्वारा
April 15, 2016

आपकी चिरपरिचित व्यंग्यपूर्ण शैली में अभिव्यक्त विचार पूर्णतः उचित एवं स्वीकार्य हैं हरिश्चंद्र जी । देश को वास्तव में ही सब्ज़ी-मंडी बना दिया गया है और ऐसा करके ही विजय को अनुभूत किया जा रहा है । इस सब्ज़ी-मंडी की सीमा जम्मू-काश्मीर से पहले ही समाप्त हो जाती है । श्रीनगर में तो ‘भारत माता की जय’ बोलने वाले और तिरंगा लहराने वाले पुलिस के डंडे खाकर हवालात पहुँच गए हैं और पक्षपात तथा पूर्वाग्रह की अति यह है कि उन्हें पुलिस ने चिकित्सा-सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई है । धर्म और अधर्म की, देशप्रेम और देशद्रोह की मनमानी परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं । उनका वही अर्थ प्रचारित किया जा रहा है जो सत्ताधारियों के हितों के अनुकूल हो । आप ठीक कह रहे हैं कि आम जनता तो भद्रजनों का ही अनुसरण करती है । महाजनो येन गतः स पंथा ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 15, 2016

    जितेन्द्र जी आभार आपकी ही प्रेरणा से मैने यह व्यंग रचना की है । एक विद्वान उत्प्रेरक के द्वारा प्रोत्साहन पाकर मार्ग सुलभ होता है ।ओम शांति शांति 


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