PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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शनि शिंगणापुर,धर्म हारा

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शनि शिंगणापुर,आखिर जीत राजनीती की ही हुयी धर्म की पराजय हुयी | …………………………….धर्म का आधार क्या होता है ..? ऋषी मुनि और चिंतकों ने धर्म को मन बचन और कर्म से सात्विकता लाने वाला बनाया | किसी भी धार्मिक स्थान को श्रद्धा का कारक माना जाता है | जिसके प्रति श्रद्धा भाव हैं उसको हम स्वच्छ रखते स्वयं भी स्वच्छ होते जाते हैं | धूप दीप नैवेद्य से बातावरण को सात्विक करते हैं | धार्मिक स्थान को सुद्ध रखने वाला भी स्वच्छ ,शुद्ध और सात्विक होना चाहिए | इस कार्य को करने के लिए ब्राह्मण को अधिकृत किया गया है क्यों की ब्राह्मण बेद पाठी और कर्मकांडी होना चाहिए | ऐसा ब्राह्मण यज्ञोपवीत वाला स्वचछता से रहने वाला और संध्या बंधन से अपने मन और कर्म को सात्विक बनाता है | ऐसे ही ब्राह्मण व्यक्ति को मंदिर मैं पूजा का अधिकारी माना गया है | ऐसा व्यक्ति ही आध्यात्मिक सात्विकता जन साधारण को प्रदान कर सकता है |……………………………………………………………इसीलिए ऐसे ब्राह्मण को धार्मिक कार्य के लिए अधिकृत किया गया है | अन्य वर्ण का कर्म सात्विक नहीं हो सकता वे वेद पाठ ,यज्ञोपवीत ,कर्मकांड ,और शाकाहारी नहीं हो सकते | जब अन्य वर्ण ही मंदिर मैं पूजा के अधिकारी नहीं हो सकते तो स्त्रियां कैसे मंदिर मैं पूजा की अधिकारी हो सकती हैं | जबकि उनकी शुद्धता का कोई समय नहीं हो सकता | ………..स्त्रीयों को इसीलिये पुरुषों के धर्म कर्म से मिली पुण्यता का आधा भागीदार का हक़दार माना गया है | जबकि स्त्रीयों के उपजे पाप का सम्पूर्ण भागीदार पुरुषों को माना गया है | पुरुषों के पूण्य से स्त्रियां स्वर्ग सुख भोगती हैं और स्वर्ग की भागीदार बन जाती हैं ,जबकि पुरुष स्त्रीयों के पाप के भागीदार होकर नर्क मैं जाते हैं या भोगते हैं | ……………………………………………...राजनीतिक लाभ लेने वाले राजनीतिक का तो एक ही धर्म राजनीती से सत्ता हथियाना होता है | राजनीतिज्ञ धर्म की अपने अपने ढंग से व्याख्या कर जनता को बहका देते हैं | किन्तु धर्म शास्त्रों का ज्ञान रखने वाले क्यों अपने सम्मान को कायम रखने के लिए मुंह छुपा लेते हैं | ………………………………...गीता मैं कहा है ………..जो तमोगुण से घिरी हुई बुद्धि अधर्म को भी यह धर्म है ऐसा मान लेती है तथा अन्य सम्पूर्ण पदार्थों को भी विपरीत मान लेती है वह बुद्धि तामसी है | ……………………….राजसी बुद्धि वाला धर्म और अधर्म को कर्तव्य अकर्तव्य को भी यथार्थ नहीं जानता | ………………………………….ऐसे लोग नहीं जानते धर्म मन की शांति लोक परलोक को सुधारने का मार्ग होता है न की जीत या हार |…………..हे अर्जुन बिना श्रद्धा के किया हुआ हवन ,दिया हुआ दान ,और तपा हुआ तप और जो कुछ भी किया हुआ कर्म है ,वह समस्त “असत “,,,,इस प्रकार कहा जाता है ,इसलिए वह न तो इस लोक मैं लाभदायक है और न मरने के बाद …..| ……………………………………...किसी भी धर्म स्थल की मान्यता वहां की परंपरा से उपजी श्रद्धा ही होती है | शनि को क्रूरतम गृह मान जाता है | जो एक राशि मैं ढाई साल रहता है |यानि बारह राशियों मैं घुमते ३० साल लगा देता है | साढ़े साती,ढैया , और दशा अंतर्दशा ,प्रत्यन्तर्दशा यानि की सम्पूर्ण जीवन उसके प्रभाव से प्रभावित होता है | शनि को बंधक बनने वाला रावण हो या भगवन राम ,कृष्ण्ँ कोई भी इसके ताप से नहीं बच पाया | …………….ऐसे मैं यदि उपजी श्रद्धा से जन मानुष शनि शिंगणापुर मैं आस्थावान होकर शांति पा रहा है | तो क्यों राजनीतिज्ञ ,आस्था को तोड़कर धर्म विरुद्ध कार्य कर रहे हैं | यदि शनि पूजा से सिद्धि पाकर लोग शनि प्रभाव से मुक्ति पा रहे हैं तो क्यों उनकी आस्था को तोडा मरोड़ा जा रहा है |……………………………………………….पुरुषों द्वारा पूजा करने से पाहिले उन्हें नहा धोकर शुद्ध होकर केवल नीचे एक धोती पहनकर ही शनि पर पूजन करना होता था | क्या अब स्त्रियां कैसे शुद्ध होकर अधरंग होकर पूजन कर सकेंगी……? सभी धार्मिक आस्थाओं का नाश कर दिया जायेगा | ………………..क्या किसी अनिष्ट की परिकल्पना की जाएगी | सभी आराधक यही विचार मन मैं उपजायेंगे | स्त्रियां क्या असंकित मन से मन मैं पाप का भाव लिए शनि पूजन कर सकेंगी …….? क्या भूमाता ब्रिगेड और तृप्ति देसाई किसी अनिष्ट विहीन पूजा की गारंटी दे सकेंगी …….? जबकि शंकराचार्य स्वरूपानंद जी चेतावनी दे चुके हैं | वैसे ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियां शनि की साढ़ेसाती से प्रभाविक हो दंश भुगत रही हैं | देश अकाल से ग्रस्त है | आतंकवाद से भारत ही नहीं विश्व आक्रांत है | परंपरा को कायम रखना ही शनि के कुप्रभाव से शांति दे सकता है | वर्ना बक्री शनि के साथ गुरु चांडाल योग क्या गुल खिलाएगा …..? ………………………………………………….नए संवत्सर का राजा शुक्र गृह है जो राक्षशों का गुरु माना जाता है गुरु होने के कारन सौमयता वाला है,इसीलिए सौम्य संवत्सर नाम भी है | किन्तु स्त्री गृह होने से स्त्रीयों की सर्वत्र जय जय होगी | …पापी चाण्डालों से प्रभावित होकर ऐसे ही धर्म विहीन कार्य ही होंगे | …………………………………………..स्त्रीयों के सशक्तिकरण से क्या होगा …..? तुलसीदास तो कहते रहे हैं …………………….ढोल गंवार शुद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी ………………….कैसी होगी इन लोगों की बुद्धि …..? क्या पापियों या चाण्डालों या राजनीतिज्ञों से ही खेले जाते रहेंगे | या कोई सात्विक गुरु बृहस्पति जैसा इन्हें सन्मार्ग पर लाने का साहस कर सकेगा | ………………………………………………………………………..शास्त्र विधि से हीन ,अन्नदान से रहित ,बिना मन्त्रों के ,बिना दक्षिणा के और बिना श्रद्धा के किये जाने वाले पूजन यज्ञ तामस ही कहे जायेंगे | …………...गुरु चांडाल योग मैं …सद गुरु के प्रभाव मैं राजनीती रहेगी तो सर्वत्र सुख शांति समृद्धि रहेगी,धर्म की जय होगी | वहीँ कुटिल राजनीतिज्ञों से प्रभावित .गुरु रहेगा तो भगवन ही……….………...ओम शांति शांति शांति का मालिक होगा |



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
April 24, 2016

आदरणीय हरीश चन्द्र शर्मा जी ! सादर अभिनन्दन ! धर्म का अर्थ यदि परम्परा से लेते हैं तो उसका हारना या टूटना एक दिन तय है ! किन्तु धर्म का वास्तविक अर्थ जो आत्मा परमात्मा से है, उससे देखें तो धर्म का नाश कभी संभव ही नहीं है ! वस्तुतः आदरणीय शंकराचार्य जी को उस निराकार ब्रह्म का प्रचार-प्रसार करना चाहिए, जिसका प्रचार-प्रसार आदि शंकराचार्य जी ने किया था ! ‘ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या’ में धर्म ‘ब्रह्म’ की जगह अब ‘मिथ्या जगत’ और उसकी परिवर्तनशील परम्पराओं को ही धर्म माना जा रहा है ! सारी गलती यहीं हो रही है ! सादर आभार !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 24, 2016

    आदरणीय सद्रगुरु जी अभिवादन , दुल्हन वही जो पिया मन भाये । धर्म वही जो राजनीती मन भाये । चिर काल से यही होता आया है । वरना हमारे सनातन धर्म को मनीषियों ने तपस्या करके स्थापित किया । बेद पुराण शास्त्रों की रचना की । जिनका आधार वैज्ञानिक था । उद्रेष्य सात्विकता पैदा करना था । जिसके लिए मन से बचन से और कर्म से शुद्धता पैदा करनी पडती थी । लोक परलोक सुधारने के लिए , धर्म के जितने भी कार्य होते हैं ,वे इसी लिए स्थापित किए गए । राजनीति का उद्रेष्रय केवल सत्ता होती है ।धर्म को सत्ता के हितानुसार बना दिया जाता है ।,,ओम शांति शांति को भी मन माफिक उछाला जाता है 

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
April 10, 2016

सभी धार्मिक आस्थाओं का नाश कर दिया जायेगा | ………………..क्या किसी अनिष्ट की परिकल्पना की जाएगी | सभी आराधक यही विचार मन मैं उपजायेंगे | स्त्रियां क्या असंकित मन से मन मैं पाप का भाव लिए शनि पूजन कर सकेंगी …….? क्या भूमाता ब्रिगेड और तृप्ति देसाई किसी अनिष्ट विहीन पूजा की गारंटी दे सकेंगी …….? जबकि शंकराचार्य स्वरूपानंद जी चेतावनी दे चुके हैं | वैसे ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियां शनि की साढ़ेसाती से प्रभाविक हो दंश भुगत रही हैं | देश अकाल से ग्रस्त है | आतंकवाद से भारत ही नहीं विश्व आक्रांत है | परंपरा को कायम रखना ही शनि के कुप्रभाव से शांति दे सकता है | वर्ना बक्री शनि के साथ गुरु चांडाल योग क्या गुल खिलाएगा …..?


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