PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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भारत माता की जय बोलना संविधान विरुद्ध ?

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भारत हिन्दू राष्ट्र….( नहीं)…..? धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान के १९७६ में हुए ४२वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह सभी धर्मों की समानता और धार्मिक सहिष्णुता सुनिश्चीत करता है। भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है। यह ना तो किसी धर्म को बढावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है। यह सभी धर्मों का सम्मान करता है व एक समान व्यवहार करता है। हर व्यक्ति को अपने पसन्द के किसी भी धर्म का उपासना, पालन और प्रचार का अधिकार है। सभी नागरिकों, चाहे उनकी धार्मिक मान्यता कुछ भी हो कानून की नजर में बराबर होते हैं। …………………………………………………………………..धर्मनिरपेक्ष देशों में धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिए तमाम तरह के संविधानिक क़ायदे कानून हैं। परंतु प्रायः राष्ट्रों के ये क़ायदे क़ानून समय-समय पर अपना स्वरूप बहुसंख्य जनता के धार्मिक विश्वासों से प्रेरित हो बदलते रहते हैं, या उचित स्तर पर इन कानूनों का पालन नहीं होता, या प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष स्तर पर इनमें ढील दी जाती रहती हैं। यह छद्म धर्मनिरपेक्षता है।..
images89898………भारत माता की जय बोलना सिखाना पड़ेगा ………….जो भारत माता की जय नहीं बोलेगा उसे यह देश छोड़ देना चाहिए ………….जो भारत माता की जय नहीं बोलेंगे वे देश भक्त नहीं कहलाएंगे ……….देश भक्ति का मापक भारत माता की जय थोप दिया जा रहा है ……………….जब अपने अपने धर्मों का पालन करना भारत का धर्म है तो क्यों भारत माता की जय बोलना थोपा जा रहा है | जबकि संविधान अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता देता है | ……………………………………….इस्लाम मैं किसी मूर्ति की पूजा या जय बोलना जायज नहीं माना जाता | भारत को यदि मूर्त रूप दे दिया जाता है और उसे माता मान लिया जाता है तो भारत माता की जय बोलने मैं हिचकिचाहट होना स्वाभाविक है | ………………..हिन्दू हर वस्तु मैं ,कण कण मैं भगवन को मूर्त रूप मैं देखता है | हर मूर्त रूप पूज्य होता है | भारत माता भी मूर्त रूप मैं पूज्य है | किन्तु हिन्दू विचारधारा से …..| मूर्त भक्ति मैं शक्ति आभाष हिन्दू मानते हैं | ..…………………………..पड़े लिखे समझदार ,राजनीतिज्ञ ,डरे सहमे मुस्लमान यदि भारत माता की जय बोलने मैं कोई हर्ज नहीं कहकर मन शांत कर लेते हैं तो क्या यह छद्म धर्मनिरपेक्षता नहीं होगी | यदि ये लोग धार्मिक सहिष्णुता का बोध कर रहे हैं तो क्यों नहीं हिन्दू विचारधारा वाली पार्टियां धार्मिक सहिष्णुता दिखाती हैं | क्योंं भारत माता की जय नहीं बोलने वालों पर मानसिक दबाब डाला जा रहा है | ………………………………………...समष्या केवल माता शब्द मैं है ,समष्या मूर्त रूप देने मैं है | जय हिन्द कहने मैं कोई हिचकिचाहट नहीं ,जय भारत बोलने मैं कोई हिचकिचाहट नहीं,………………………………..……………….भारत को माता मत जोड़ो .,भारत को मूर्त रूप मत दो | यही तो कहना है मुसलमानों का ……..| यदि भारत मैं माता स्वरुप देखते हैं हिन्दू ,और उसकी पूजा करते हैं तो क्यों उसे मुसलमानों पर थोपते भारत माता की जय बोलने को दबाब डाल रहे हैं | ………………………………………………...अब तो भगवा झंडे को भी राष्ट्रिय ध्वज माना जा रहा है | क्या यह सब धार्मिक असहिष्णुता नहीं होगी | क्या यह संविधान का अनादर नहीं होगा | छद्म धर्मनिरपेक्षता नहीं होगी | कैसे भारत को धर्म निरपेक्ष लोकतंत्र सिद्ध किया जा सकेगा | …………………………………………….. धार्मिक असहिष्णुता ………………………………………………..भारत माता की जय बोलना भारत मैं प्रायोजित धार्मिक असहिष्णुता की तरह उगाया जा रहा है | मोहन भगवत से उगे भारत माता की जय बोलना सिखाना होगा रूपी धार्मिक असहिष्णुता के बीज , ओबैसी की छुरी भी रख दोगे तो भारत माता की जय नहीं बोलूंगा , भारत माता की जय नहीं बोलने का फतवा ,भारत माता की जय न बोलने वाले का सामाजिक बहिस्कार की पंचायत , ,,देवेन्द्र फडणवीस के जो भारत माता की जय न बोले वे देश छोड़ो ,और फिर रामदेव के चाणक्य स्वरुप से परसुराम के फरसे से निकलते लाखों नर मुंडों तक पहुँच चुके हैं | परसुराम स्वरुप मैं रामदेव जी उस गीता के ज्ञान को भूल गए हैं जिसको उन्होंने राष्ट्रिय धर्म ग्रन्थ माना था |.जिसकी इन्द्रियां बस मैं न हों वह कैसे संयमी होगा ,कैसे योगी बनकर सिद्धियां पाएगा ….? क्रोध तो सभी सिद्धियों का नाश कर देता है |…क्रोधित होकर ही परसुराम और विस्वामित्र इन्द्रासन पाने से बंचित होते रहते थे | और उन्हें फिर बार बार तपस्या करनी पड़ती थी |…………….जिस असहिष्णुता का बोध करने पर आमीर खान और शाहरुख खान को प्रताड़ित होने मान सम्मान गँवाना पड़ा था | उसी धार्मिक असहिष्णुता को उपजा कर मोहन भगवत एंड कंपनी देश को सहिष्णुता की ओर कैसे ले जा रही है | एक तरफ देश मैं असहिष्णुता की फसल उगाई जा रही है वहीँ दूसरी तरफ देश को सहिष्णु और धर्मनिरपेक्ष सिद्ध करने को मोदी जी दुनियां मैं भ्रमण कर रहे हैं | ……………………………… इस मामले मैं मोदी जी कुछ न बोलकर विदेशों मैं भी भारत माता की जय के नारे लगवा कर शांति अनुभव कर रहे हैं | क्या कट्टर मुसलमानों को चिढ़ाकर यह सिद्ध कर रहे हैं की भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र नहीं हिन्दू राष्ट्र है |…………………………………………….किन्तु ऍफ़ डी आई के लिए , मेक इन इण्डिया की सफलता के लिए धर्म निरपेक्ष भी सिद्ध करते रहते हैं | ……………………………हिंदुस्तान के रूप मैं जन्मे भारत मैं धर्मनिरपेक्ष रूप दर्शाकर भारत ,इंडिया नामकरण हुआ | किन्तु हिन्दू राष्ट्र दर्शाता भारत माता का स्वरुप और भारत माता की जय बोलना आवश्यक क्या सिद्ध करता है ….? क्या यह संविधान अनुरुप होगा या विरुद्ध ………?………………………………………अपने धर्म पालन के लिए कट्टरता तो भगवन श्री कृष्ण ने भी गीता मैं आवश्यक बताई है |……………………”.अच्छी प्रकार आचरण मैं लाये हुए दूसरे के धर्म से गुणरहित भी अपना धर्म उत्तम है | अपने धर्म मैं मरना भी कल्याण कारक है और दूसरे का धर्म भय देने वाला है | क्योंकि स्वाभाव से नियत किये हुए स्वधर्म रूप कर्म को करता हुआ मनुष्य पाप को नहीं प्राप्त होता “……………………………………....फिर ऐसे कट्टर इस्लाम को मानने वाले मुसलमानों को क्यों उकसाया जा रहा है | क्या सभी भारत माता की जय बोलने लग जायेंगे या या धार्मिक कटटरता से असहिष्णुता का बोध करते भड़केंगे | ………….……………पडे लिखे समझदार मुसलमानों के लिए भारत माता की जय बोलने मैं कोइ हर्ज नहीं । अनपड गरीब मुसलमानों को भारत माता की जय बोलना इस्लाम के विरुद्ध हराम है । दंगे करा कर बोट समेटना अब पुराने युग की बातें हैं । भारत माता की जय बोलने पर कोइ जवरदस्ती नहीं ।.जो भारत मै रहना चाता है उसे भारत माता की जय बोलना ही पडेगा । …………………….एक पराक्रम का जुमला बन चूका है ,अर्जुन टैंक , दुश्मन से भी भारत माता की जय बोलने को बाध्य कर देगा …………………………………………..विधान सभा के चुवाव हेतु परोसा गया अहिंसक सात्विक भोजन है । .जिसको राजनीतिक पार्टियां अपने अपने प्रिय तड़का लगा कर चाव से परोस रही हैं | भारत माता की जय बोलने वाले और भारत माता की जय नहीं बोलूंगा कहने वाले दोनों ही भारत माता की जय तो बोल ही चुके हैं | होने वाले पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सिद्ध कर देंगे की किसने जोर से भारत माता की जय बोली | …………………………………………………शांति मार्ग है जिसको जिसमैं ओम शांति शांति मिले भोग लगा सकता है ।



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
April 8, 2016

आदरणीय हरिश्चन्द्र साहब के कलम की जय तो पहले बोल ही देता हूँ. बाकी तो १९ मई के बाद ही पता चलेगा जय किसकी हुई है. अभी कश्मीर में भी खूब जय जयकार हो रही है. उधर बंगाल में मोदी जी ममता के पुल का गिरने को देवी चमत्कार बता चुके हैं. ओम शांति शांति शांति!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 8, 2016

    जवाहर लाल जी ही भारत माता की जय के जनक रहे ,किंतु इससे बोलना कानूनन नहीं बनाया । इसलिए जय जयकार तो उनकी होनी चाहिए । मोदी जी की भाजपा तो उस जय को भुना रही है । बेचारे राहुल ….और उनकी कांग्रेस ….ओम शांति शांति 

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 8, 2016

    जवाहर लाल जी ही भारत माता की जय के जनक रहे ,किंतु इससे बोलना कानूनन नहीं बनाया । इसलिए जय जयकार तो उनकी होनी चाहिए । मोदी जी की भाजपा तो उस जय को भुना रही है । बेचारे राहुल ….और उनकी कांग्रेस ….ओम शांति शांति

Shobha के द्वारा
April 7, 2016

श्री हरीश जी भारत माता की जय तो भावनात्मक विषय हैं जैसे मुस्लिम का खुदा निराकार है हमारे भगवान साकार ऐसे ही भारत माता हमारी जैसे आपने चित्र में दिखाईं कल्पना है मुस्लिम के लिए हिमालय से शुरू होती कन्या कुमारी तक फैली अनेक नदियों पठारों रेगिस्तान पहाड़ियों से शुशोभित शस्य श्यामला दोने तरफ बंगाल की खाड़ी व् अरब सागर हरीश जी लड़ाईयां राज्यों में होती हैं लेकिन अपनी धरती की रक्षा के लिए खड़ा सैनिक जब लड़ता है एक नारा होता है वह धर्म निरपेक्ष नहीं होता वहां न कोइ दल होता है न वोट बैंक एक ही बात होती है या तुम मुझे मार दो या मैं तुम्हें मार दूंगा एक एक इंच धरती के लिए जान दी जाती है भारत माता की जय ही रहेगी यह किसी भी तर्क से समझाई नहीं जा सकती

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 8, 2016

    आदरणीय शोभा जी आभार , सात्विक तर्क है आपका । किंतु इन राजनीतिज्ञों की बोट राजनीति ही है ,भारत माता की जय । एक तरफ हिंदुओं मैं भक्ति भाव जाग्रत किया जाता है । वहीं दूसरी ओर मुसलमानों के धर्म विरुद्ध सिदध कर दिया जाता है । भावनाओं के खिलाडी हैं ये राजनीतिज्ञ। प्रायः राष्ट्रों के ये क़ायदे क़ानून समय-समय पर अपना स्वरूप बहुसंख्य जनता के धार्मिक विश्वासों से प्रेरित हो बदलते रहते हैं, या उचित स्तर पर इन कानूनों का पालन नहीं होता, या प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष स्तर पर इनमें ढील दी जाती रहती हैं। यह छद्म धर्मनिरपेक्षता है।.. …ओम शांति शांति

Jitendra Mathur के द्वारा
April 7, 2016

आप लाजवाब हैं, आपकी कलम लाजवाब है, आपकी शैली लाजवाब है । मुझे नहीं लगता कि कोई भी आपके व्यंग्य की धार से बच सकता है । सभी पापी सावधान रहें आपकी लेखनी-रूपी तलवार से । और रहे हम, तो हम तो भारत माता की ही नहीं, पापी हरिश्चंद्र जी की अद्वितीय लेखनी की भी जय बोलने को तत्पर हैं ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 7, 2016

    आभार माथुर जी ,जय जितेन्द्रिय की होती जाती है सच बोल देने वाला हरिश्र्चंद्र तो पापी बन जाता है । समय की धारा मै बह कर प्रधान मंंत्री तक बना जा सकता है । सराहना ओम शांति शांति कारक धन्यवाद

harirawat के द्वारा
April 6, 2016

विचार सात्विक हैं ! धर्म निरपेक्ष कहने वाले क्या वास्तव में धर्म निरपेक्ष हैं ! कम्युनिष्ट जो १९६२ में चीन के गीत गाते थे, लालू, नितीश कुमार, मुलायमसिंह, जन्म दिन पर पर करोडो खर्च करके बग्गी इंग्लैण्ड से आई थी ! मायावती, जिसके सम्पति कितनी है उसे भी पता नहीं है ! ये सारे रजिस्टर्ड धर्म निरपेक्ष लोग हैं ! लेख के लिए साधुवाद हरीश चन्द्र जी !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    April 7, 2016

    रावत जी आभाार ,देश भक्ति , लोकतंत्र ,और धर्म निरपेक्षता सभी दिखावटी ही अधिक होती हैं । शक्ति पाने के विना आराधना के मार्ग हैं । ओोम शांति शांति 

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
April 6, 2016

एक तरफ देश मैं असहिष्णुता की फसल उगाई जा रही है वहीँ दूसरी तरफ देश को सहिष्णु और धर्मनिरपेक्ष सिद्ध करने को मोदी जी दुनियां मैं भ्रमण कर रहे हैं |

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
April 6, 2016

रामदेव के चाणक्य स्वरुप से परसुराम के फरसे से निकलते लाखों नर मुंडों तक पहुँच चुके हैं | परसुराम स्वरुप मैं रामदेव जी उस गीता के ज्ञान को भूल गए हैं जिसको उन्होंने राष्ट्रिय धर्म ग्रन्थ माना था |.जिसकी इन्द्रियां बस मैं न हों वह कैसे संयमी होगा ,कैसे योगी बनकर सिद्धियां पाएगा ….? क्रोध तो सभी सिद्धियों का नाश कर देता है |…क्रोधित होकर ही परसुराम और विस्वामित्र इन्द्रासन पाने से बंचित होते रहते थे | और उन्हें फिर बार बार तपस्या करनी पड़ती थी

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
April 6, 2016

.विधान सभा के चुवाव हेतु परोसा गया अहिंसक सात्विक भोजन है । .जिसको राजनीतिक पार्टियां अपने अपने प्रिय तड़का लगा कर चाव से परोस रही हैं | भारत माता की जय बोलने वाले और भारत माता की जय नहीं बोलूंगा कहने वाले दोनों ही भारत माता की जय तो बोल ही चुके हैं | होने वाले पांच राज्यों के चुनाव परिणाम सिद्ध कर देंगे की किसने जोर से भारत माता की जय बोली | …………………………………………………शांति मार्ग है जिसको जिसमैं ओम शांति शांति मिले भोग लगा सकता है ।


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