PAPI HARISHCHANDRA

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स्व राजत्याग (इस्तीफा) कामना सत्र ..

Posted On: 20 Jul, 2015 हास्य व्यंग,Politics,Others में

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सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान को हटाने की ‘न्यूनतम कार्रवाई’ की मांग …………नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान संसद का चलना और महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना ‘अधिक आसान’ हो जाएगा यदि BJP इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करे……………………….’मुझे उम्मीद है कि एक दिन बाद जब संसद का सत्र शुरू होगा प्रधानमंत्री उन सभी के इस्तीफे की घोषणा करेंगे जो ललितगेट में शामिल हैं या जिन पर आरोप लगे हैं और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जिनके मुख्यमंत्री रहते बड़ी संख्या में गवाहों की मौत हुई है और हजारों को डिग्रियां मिली हैं।…………………………’अच्छाई के लिए ही सत्य होता है | सत्य ‘गीता’ भी है जिसको राष्ट्रिय धर्म ग्रन्ध बनाए जाने की बकालत सुषमा जी ने बड़े बड़े महान धर्माचार्य विद्वानों के समक्ष की थी | नरेंद्र मोदी जी ने उसके प्रचार ,प्रसार के लिए विदेशों मैं माननीयों को गीता भेंट की ,और हिन्दू धर्म को गौरवान्वित किया | | ….उसी गीता का परम ज्ञान ” त्याग ” को माना गया है | |

जिस गीता के ज्ञान का सम्मान करते ही अटल विहारी बाजपेयी जी ने जन हित मैं पार्टी हित के लिए केवल 13 दिन और फिर 13 महीने मैं स्व राज त्याग कर शांति पाई | उनका यही त्याग उन्हें प्रधान मंत्री पद पर फिर सम्मान से स्थापित कर पाया | और फिर भी  ” भारत रत्न” बने | …………..क्या लाल कृष्ण आडवाणी जी का त्याग कम महान था जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को ऐसा गौरव प्रदान किया की वह प्रधान मंत्री बनाने योग्य बनी किन्तु लोक हित मैं उन्होंने अटल विहारी बाजपेयी जी को स्वीकार किया | लोक हित मैं ,पार्टी हित के लिए उन्होंने भी अपने पदों से स्व राज त्याग किया | और नरेंद्र मोदी जी को स्वीकार कर फिर त्याग किया और पार्टी हित के लिए बराबर त्याग करते आ रहे हैं | ………..वास्तव मैं गीता ज्ञान को आत्मसात करने वाले विदुषियों मैं महात्मा गांधी के बाद यही रहे | ……………………….अब एक चिड़िया उड़ते उड़ते किसी पर भी मन चाहा टु बीट कर दे रही है | और वह अपने दामन को साफ करने मैं लग जाता है | समस्त महान लोगों पर ही गिरने वाला यह टु बीट कब किस पर गिर जाये कुछ कहा नहीं जा सकता है | महान लोगों मैं ऐसा भय पाहिले कभी नहीं देखा गया | …….….कांग्रेस तो पाहिले ही इतना कुछ खो चुकी है उसे कुछ और भी खो जाने का गम नहीं होगा | किन्तु भारतीय जनता पार्टी के पास तो अपार सम्पदा है | पाक साफ दामन का सम्मोहन देकर ही तो सत्ता पाई थी | नयी नयी स्वच्छ सफ़ेद बर्दी मैं जरा सा टु बीट भी सबको नजर आएगा | विभिन्न रंगों मैं रंग चुकी कांग्रेस अब इस जरा से टु बीट के दाग को बड़ा बड़ा कर लोगों को दिखाएगी | आखिर भारतीय जनता पार्टी ने भी तो काले पीले रंग डाल डाल कर उनका दामन भिगोया था | …….भाव विहल चिड़िया के भाव अच्छे हैं किन्तु मार्ग अच्छा नहीं | ……………....मोदी जी की खामोशी ,क्या कोई कूटनीति है …? कूटनीति भी है तो भी नुकसान भारतीय जनता पार्टी को ही होगा | आस्तीन के साँप भी अपनी चालों मैं फन उठा रहे हैं | ..…………………..एक कहावत है की लोहे को लोहा ही काटता है यह सत्य भी है | …..किन्तु अब नयी कहावत हो जाएगी …...मोदी को मोदी काट रहा है | ……………चर्चाएं दो महान मोदियों की ही गर्म हैं | दोनों महान हैं किन्तु एक काट रहा है दूसरा कट रहा है | नुकसान तो हो ही रहा है ,मान सम्मान का …? ललित की ललित कलाएं बराबर नृत्य कर रही हैं | ……………………………………………………………………….योग यानि परमात्मा साक्षात्कार ,केवल त्याग की भावना से ही कर सकते हैं | यदि काम क्रोध मद लोभ मोह को मारना है तो त्याग ही एक मार्ग मार्ग है | ……………………………………..राष्ट्रिय ग्रन्थ गीता को सम्मान देना है तो उसके मार्ग त्याग को अपनाना ही होगा | योग सिद्धी के लिए एक मर्यादा कायम करनी ही होगी | …………..……………………………………………………21 जुलाई से आरम्भ संसद सत्र मैं क्या कुछ होगा इसकी परिकल्पनाएं होने लगी हैं | ……विपक्ष द्वारा चारों और से , एक दयावान मानवीय भावनाओं से कार्य करने वाली नारी पर होने वाले प्रहार से बचाने श्री कृष्ण फिर आएंगे ….? या अपने को पाक साफ दर्शाने के लिए अंतर्ध्यान ही रहेंगे …..? क्या श्री कृष्ण पर आंच आते सुषमा देख सकेगी …?…………………………………………………….नारी सशक्तिकरण की बकालत करने वाले पक्ष या विपक्ष अपने पार्टी हितों के लिए एक नारी पर ही प्रहार करेंगे या मौन धारण किये रहेंगे | ………………………………………………….भीष्म पितामह अपने त्याग को परिभाषित कर चुके हैं ,उनकी स्थापित मर्यादा त्याग ही है | उनके मार्ग दर्शन को नहीं मानने पर क्या वे मौन रहेंगे …..?…………………….. क्या नितिन गडकरी जी के त्याग को भुलाया जा सकता है ..? ….क्या मानवीय दयावान नारी द्रवित हो एक बार फिर अटल विहारी बाजपेयी जी की याद करते उनकी तरह स्व राज त्याग कर देंगी …..? १३ दिन १३ महीने पर त्याग मर्यादा, क्या फिर १३ महीने पर त्याग दोहरायेगी …? …………………..त्याग मैं अपार शांति है | त्याग मैं ही जन हित है ,त्याग मैं ही पार्टी हित है | त्याग मैं ही राष्ट्र हित है | त्याग मैं ही श्रीमद्भागवत गीता का सम्मान है | त्याग से ही योग यानि भगवत प्राप्ति होकर मोक्ष है | …………………….स्व राज त्याग ही एक मात्र सुलभ योग है | ……………………………………………………………………………. एक विदेशी संस्कारों मैं पली बड़ी सोनिया गांधी देश ,पार्टी हितों के लिए प्रधानमंत्री पद को दो बार त्याग चुकी है | पद का मोह नहीं करके उन्होंने गीता का अनुसरण किया | ………………...यह त्याग तो आपसे याचना करके माँगा जा रहा है याचक की याचना यदि पूर्ण कर दी जाती है तो उसका हजार गुना ज्यादा भगवन उस दानी को देता है | …….और याचक को निरास करना पाप भी होता है | ………………………………………………बरिष्ट सलाहकार भीष्म पितामह की सलाह पर चिंतन करके ,२१ जुलाई से होने वाले संसद सत्र से पाहिले ही स्व राजत्याग कर के अपनी पार्टी के आस्तीन के साँपों और याचकों के मुंह पर तमाचा मारकर शांति मार्ग पर अग्रसित होते योगी बन जाओ | …..योग के लिए सन्यास आवश्यक नहीं है | गृहस्थ (पार्टी राजनीती ) मैं रहकर भी योगाभ्यास जारी रह सकता है | ..……………………………..नरेंद्र मोदी जी के बाद आप ही अगली सिद्धी वाली हो जाएंगी | प्रधान मंत्री या अध्यक्ष पद की सिद्धी भी हो सकती है | अन्यथा मोक्ष्य मार्ग तो खुला ही है | ……….विदेश मंत्री को ही यह मार्ग पाहिले सुलभ किया जाता है | ……………………………………गीता मैं भगवन श्रीकृष्ण कहते हैं …

श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानध्दयानं विशिष्यते | ध्यानात्कर्मफलत्यागस्यागच्छन्तिरनन्तरम् | | …………….मर्म को न जानकर किये हुए अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है ,ज्ञान से मुझ परमेश्वर का ध्यान ,और ध्यान से सब कर्मों के फल का त्याग श्रेष्ठ है ,क्योंकि त्याग से तत्काल ही परम शांति होती है |…………………………………. ओम शांति शांति शांति



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