PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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मोदी जी का दोहरा चरित्र ,सुलभ योग (6)

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…………………फिल्मों मैं दोहरे चरित्र की भूमिकाएं फिल्म को काफी रोचक बना देती हैं | गोरा और काला ,राम और श्याम ,सीता और गीता अपने समय की ऐसी फिल्में थी जिनमें बिलकुल उलट भूमिकाएं रही | फिल्में सराहनीय रहीं और खूब चली | …………………………………………………………………………किन्तु राजनीती मैं भी दोहरे चरित्र की भूमिका ही चलती है | लोक तंत्र कभी एक चरित्र से नहीं चल सकता है | यहाँ काले का भी साथ देना होता है और गोरे का भी | हिन्दू का भी मुस्लमान का भी | गरीब का भी अमीर का भी | समाजवाद का भी और पूंजीवाद का भी | महिलाओं का भी और पुरुषों का भी | ……………………………………………………………………………यहाँ चरित्रवान हों या चरित्रहीन एक चरित्र मैं नहीं टिक पाते हैं | हरिश्चंद्र का लेवल तो होना चाहिए किन्तु रावण की कुबुद्धि भी चाहिए | …यदि रावण का लेवल है तो कर्म हरिश्चन्द्री दिखने चाहिए | …वोट लेने के लिए अलग भूमिका होती है ,जीत जाने के बाद अलग …| ………………………………………………..…………………………..मोदी जी भी इस समय डबल रोल मैं हैं | .……….एक आध्यात्मिक रोल मैं दूसरे भौतिक विकास वादी रोल मैं ….| ………………………………………………अध्यात्म यानि आत्मा का परमात्मा साक्षात्कार ,जिसके लिए गीता अध्ययन और उसके मार्ग पर चलना | सत्कर्म करना है | काम क्रोध मद लोभ मोह का नाश करना है | जहाँ कर्म करो किन्तु फल की कामना मत करो | दुनियां मैं सब नश्वर है अतः मन को केवल भगवत चिंतन करते भक्तिभाव से मोक्ष्य मार्ग पर ले जाओ | आत्मा का परमात्मा से मिलान ही योग है | श्रीमद्भागवत गीता पड़ो और योग करो …..| गीता को राष्ट्रिय धर्म ग्रन्थ बनाना है ,योग को विश्व मैं विश्व योग दिवस के रूप मैं ले ही आये | विश्व मैं ओम शांति शांति लाना है | ………………………………………………………………………….दूसरे इसका उल्टा रोल भौतिक विकास …….भौतिक विकास के लिए कामनाओं का होना आवश्यक है | महत्वाकांक्षा बिना कैसे कोई लक्ष्य पाया जा सकेगा …? कामनाएं हैं विश्व गुरु बनने की ,१०० समार्ट सिटी की ,मेक इन इण्डिया की ,जहाँ कामनाओं का कोई अंत नहीं है | कामनाओं की पूर्ती के लिए साम दाम दंड भेद सभी नीतियां अपनानी होंगी | देश की रक्षा के लिए रक्षा उपकरण भी खरीदने या बनाने होंगे | विध्वंशकारी यूरेनियम भी खरीदना होगा | विकास के लिए यातायात के द्रुतगामी साधन ऑटोमोबाइल और रेल परिवहन भी चाहिए उनके लिए फ्लाईओवर और ट्रेक भी चाहिए | चाहे अशान्तिकारक एक युद्ध के बराबर मौतों का ही जिम्मेदार क्यों न हो | …..…………………………………………………………………………एक और चाय बेचने वाले साधारण गरीब की छवि मैं हैं तो वहीँ दूसरी तरफ करोड़ों की पोषाक धारी की भूमिका मैं | एक ओर मेट्रो मैं जाकर मितव्यता दर्शाते हैं तो दूसरी और दिल्ली से दिल्ली मैं ही हेलीकॉप्टर से जाकर भाषण देते हैं | एक ओर हिन्दुओं को रिझाने के लिए विभिन्न रूप धरते हैं तो वहीँ दूसरी ओर मुसलमानों के हितैशी होने का दावा करते धर्म निर्पेक्ष्य राष्ट्र दर्शाते हैं | ……..एक ओर महिला सशक्तिकरण ,सेल्फ़ी विद डॉटर से महिलाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीँ दुसरी ओर अपनी ही अर्धांगिनी से विमुख हैं | ……………………………………………………………………….एक ओर सर्वे भवन्तु सुखिनः का भाव लाते हैं वहीँ दूसरी ओर ….कुछ ही गांव को गोद लेकर उनका विकास मार्ग दर्शाते हैं | चुने १०० स्मार्ट सिटी बना कर और भी गरीबों को गरीबी का अहसास कराते हैं | …….हिंदुस्तान के बहुसंख्यक ग्रामीणों के लिए केवल अच्छे दिनों का वादा और शौचालय का सपना ही देकर लोरी सुना देते हैं | …………………………….………………………………..……………यह सब कोई मोदी जी की आलोचना नहीं है | यह एक परिब्राजक से सिद्धी पाये सिद्ध पुरुष का योग है | ……………………………………………………..योग सिर्फ योगासन नहीं ,आत्मा परमात्मा का योग नहीं …..? ……………योग असंख्य होते हैं जिनमें एक राजस योग को मोदी जी ने सिद्ध कर लिया है | सिद्धी यानि जो वो चाहेंगे वो कर लेंगे | जो वो बोलेंगे वाही दुनिया बोलेगी | ……………………… योगाभ्यासी का लक्ष्य क्या है ….? उसी के अनुसार उसने सिद्ध मार्ग अपनाना होता है | योग क्या है …/ जोड़ …यह तो पहली का बच्चा भी बतला देगा | …………………….किन्तु योग बहुत विस्तृत है ………….योग यानि अपनी साधना से हमें क्या चाहिए …? ……….हमें राजस योग चाहिए तो चाणक्य सी राजनीती ही सिद्ध करनी होगी | ………………………………………………………………….……….योग का अर्थ जिसके जोड़ने से हमें लाभ हो | कुयोग यानि जिसको जोड़ने से हमें हानि हो | ..……………………………..योग चिकित्सा मैं भी अपनाये जाते हैं | चिकित्सक आयु , , बलाबल ,ऋतू सर्दी गर्मी ,बरसात और रोग की प्रचंडता के अनुसार ही दवाओं का योग बनाता है | …………………………………………………….योग ज्योतिष मैं भी अपनाये जाते हैं | पंचांग मैं कुंडलियों मैं गृह नक्षत्रों के योग …..| 300 से अधिक प्रकार के गृह नक्षत्रों के योग मनुष्य को जन्मजात सिद्धियां देते हैं या मार्ग प्रदान करते हैं | मनुष्य किस प्रकार की सिद्धी अपने पूर्व जन्मों के पुण्यों से स्वतः ही पाएंगे यह जन्म कुंडली पाहिले ही बता देती है | कौन किस मार्ग से योग सिद्धी पायेगा यह भी निश्चित हो जाता है | एक डाकू से महर्षि बाल्मिकी बनेगा या राजा हरिश्चंद्र से शमशान का चौकीदार ….| …………………. …..योग साधारण व्यव्हार मैं भी होते हैं | योग खानपान मैं भी होते हैं | मीट मांस के साथ शराब योग कारी होकर स्वास्थ्य देती है किन्तु दूध के साथ कोढ़ जैसी व्याधी | .शहद और घी पौष्टिक होता है किन्तु बराबर मात्रा मैं विष हो जाता है | ……..गणित के अनुसार प्लस से प्लस का योग प्लस ही होता है और माईनस से माईनस का योग माईनस ही होता है | यानि दो अच्छे मिलकर अच्छे ही बनेंगे दो बुरे मिलकर बुरे ही बनेंगे | किन्तु राजनीती और जीवन यापन के लिए अच्छे बुरे का योग ही योगकारी यानी सुगम होता है | …………………………………………………………..किसी की मित्रता ,योगकारी होकर उन्नति का मार्ग देती है तो किसी की मित्रता पतन का करक बन जाती है | किसी की पत्नी योगकारी बन कर दिन दूनी रत चौगुनी उन्नति का कारण बनती है तो किसी की पतन का कारण …| .………………………….रसायन विज्ञानं के अनुसार किसी तत्व का योग क्रिया को उत्प्रेक बनकर बड़ा देता है तो किसी का योग क्रिया को घटा या नाश कर देता है | ………….………………………………….अटल विहारी बाजपेयी जी के लिए आडवाणी जी योगकारी बने |..वहीँ नरेंद्र मोदी जी के लिए अमित शाह योगकारी बने | …………..मोदी जी ,अमित शाह का योग जहाँ भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्प्रेरक बनते योगकारी रहा वहीँ मन मोहन सिंह ,सोनिया गांधी ,राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए कुयोगी बना | ……………………………….योग एक लक्ष्य की और जोड़ता है तो वहीँ दूसरे लक्ष्य से हटाता है | यदि परमात्मा से जुड़ना है तो भौतिक संसार से विमुख होना ही पड़ेगा | ……भौतिक सांसारिक सिद्धियां परमात्मा से विमुख ही करती हैं | …………………..…………………………………………………….मोदी जी का लक्ष्य अपने पांच वर्ष के कार्यकाल को सुगमता से निभाते निभाना है अतः वे अनेक भूमिकाओं को निभाते अपनी सिद्धी प् सकते हैं | …आध्यात्मिक और भौतिक सिद्धियों का योग ही उनका मार्ग सुगम करेगा | …………………………………………………………...सावधान शुभ बृहस्पति गृह राशि बदल रहे हैं विधान सभा चुनाव पाशा पलट भी सकते हैं ………..अभि ,अभी अभी अभिज्ञान शाकुन्तलम पड़ा , अश्रु अभिषेक से मन चंचल हो गया |………………………. कहाँ योगकारी होंगे कहाँ कुयोगी ……………………………………………………………………………ओम शांति शांति शांति



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