PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

221 Posts

907 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15051 postid : 805068

हिसार(सतलोक आश्रम ) मैं स्वधर्म तांडव

Posted On: 19 Nov, 2014 हास्य व्यंग,Politics,Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

स्वधर्म यानि अपने अपने कर्तव्य कर्मों को करना ही स्वधर्म पालन होता है | एक सर्व मान्य संत दीन दुखियों को शांति प्रदान करने वाला भगवन से कम नहीं होता | भगवन तो ढूंढो तो भी नहीं मिलते किन्तु संत साक्षात शांति प्रदान करते हैं | भगवन के स्वधर्म को अग्रसित करते जन सेवा करते हैं संत | भगवन तो शेषनाग सैया पर संतों के होते निश्चिन्त होकर सयन करते हैं | …….भगवन के साक्षात्कार करने वाले संत ही होते हैं | कबीरदास जी तो संत को भगवन से भी महान मानते हैं …….उन्होंने कहा भी है ……...गुरु गोविन्द दोनों खड़े ,काके लागों पाऊँ | बलिहारी गुरु अपने गोविन्द दियो मिलाय || …..………………………………………………………ऐसे स्वधर्म पालन करने वाले यदि भक्तों को भगवत दर्शन करके लोकहित करते कर्तव्य कर्म पालन करते गो लोक भी चले जाते हैं तो वे धन्य ही तो होंगे | …………………………………………………………………………..…ऐसे संतों के लिए कोई बंधन बांध नहीं सकता है | सामाजिक बंधन ,काम क्रोध मद लोभ ,मोह उनको प्रभावित नहीं कर पाते तो कानून के बंधन उनका क्या बिगाड़ लेंगे | उनका शरीर तो नाम का ही होता है | आत्मा तीनों लोकों मैं विचरण करती रहती है | मृत्यु भय उनको होता ही नहीं | क्यों की वे जानते हैं आत्मा मरती नहीं ,न उसको काटा जा सकता ,वह मान अपमान से भी परे होती है | कानून जिस शरीर को गिरफ्तार करना चाह रहा है ,वह तो नश्वर है | गिरफ्तार कर सकते हो तो आत्मा को करो | आत्मा आत्मा सभी मिलकर परमात्मा ही तो बनेंगी | ……………………..भक्ति धर्म भी अनोखा धर्म होता है ,जब अपने आराध्य के प्रति भक्ति जाग्रत हो जाती है तो अन्य सब वस्तुएं ,या जीव कोई महत्त्व नहीं रख पाते | भक्ति की धरा ही अनोखी होती है | अपने आराध्य के प्रति मरने मारने की भक्ति भाव आना स्वाभाविक स्वधर्मी कर्तव्य ही तो है | आराध्य पर आने वाली सभी विपत्ती उनकी अपनी विपत्ती लगती हैं उनका निवारण करना उनका स्वधर्म होता है | यदि भक्त अपने स्वधर्म पालन के लिए हथियार उठाते अपनी जान भी न्योछावर कर देते हैं तो यह पाप नहीं होता | यही तो भगवन श्रीकृष्ण ने गीता मैं अर्जुन से कहा था | …………………………………………………………………..दिव्य दृष्टी प्राप्त संजय यदि अपनी दिव्य दृष्टी से धृतराष्ट्र को आँखों देखा महाभारत नहीं सुनाएंगे तो अधर्मी बन जायेंगे | उनका स्वधर्म अपनी दिव्य दृष्टी से देखा सुनना ,दिखाना ही तो होगा | किन्तु यह कलियुग है ,लोकतंत्र है | धृतराष्ट्र को वही सुनाओ जो दिव्य दृष्टी प्रदायक निश्चित करता है नहीं तो मार खानी ही पड़ेगी ,कैमरे तो तोड़े ही जायेंगे | हजारों लाखों भक्तों का आराध्य है तो क्या हुआ कानून से ऊपर तो नहीं हो सकता | कानून की रक्षा के लिए लाखों करोड़ों खर्च करते कुछ बलिदान भी करने पड़ जाएँ तो कानून की मर्यादा ही होगी | कानून का स्वधर्म यही होता है | ……………..कार्यपालिका का स्वधर्म भी यही है जैसा कानूनन कहा जाये करना वही है | हुक्म का पालन करना ,कानून को सही मार्ग पर चलाना ही स्वधर्म है | एक संत जो की हजारों भक्तों से घिरा हो | घेर कर गिरफ्तार करने जाना ,हजारों की फ़ोर्स ,जे सी बी आयुधों से युक्त होकर | भक्त मरें मरने दो , जन धन की हानि हो तो कोई बात नहीं कानून व्यवश्था विगड़े विगड़ने दो किन्तु स्वधर्म पालन मैं कोई बाधा, अधर्मी सिद्ध करते गोलोक के रास्ते बंद कर ही देगा | ………………………………………………………………………………………...संत आशाराम के भक्त तड़पते रहे ,भक्ति तड़पती रही कुछ नहीं कर पाये आराध्य को तारने की एक आश भारतीय जनता पार्टी से थी | किन्तु वह तो स्वार्गिक परम्पराओं मैं मग्न हो चुकी है | संत रामपाल अब किससे आश लगाएंगे | संतों को क्या फर्क पड़ता है वे तो कहीं भी भगवत चिंतन मैं लीं हो जायेंगे | उनके लिए तीनों लोक एक समान ही तो होते हैं | फर्क तो भक्तों को पड़ेगा उनकी दुश्चिंताओं को ,दुखों को अब कौन निवारण करेगा | मृत्यु लोक मैं अब नारद मुनी भी नहीं आते | क्या होगा इस हिंदुस्तान मैं हिन्दुओं का कैसे लोक परलोक सुधरेगा | संतों का होने वाला मान मर्दन धर्म को किस मार्ग पर ले जायेगा | भक्त जिस संत मैं आश लगते हैं वह संजय दिव्य दृष्टी का शिकार होकर अंतर्ध्यान हो जाता है | ………………….कहा यही जाता है की भक्तों का लोक परलोक सुधरने वाले संत कलियुग के आगमन पर हिमालय की कंदराओं मैं तपश्या मैं लीं हो गए | किन्तु कुछ दयालु लोक हितकारी संत अपनी दया दृष्टी भक्तों पर देकर लोक हित करने से अपने को नहीं रोक सके ,और दुर्गत हुए,उनकी तपश्या भंग कर दी गयी | क्या संतों से भरपूर हिंदुस्तान के संत इन संतों की कलियुगी गति से प्रेरणा लेकर हिमालय की कंदराओं मैं छूप जायेंगे ? | या ऐसे ही संतों की दुर्गती कलियुग द्वारा होती रहेगी | क्या भारतीय जनता पार्टी संत समागम से राम मय होते, संतों का राम बनते उद्धार करेगी ,या राक्षशों से प्रताड़ित होने देगी …? संतों की एक मात्र आश…हैं …| संत होंगे तभी भक्त होंगे …भक्त होंगे तभी हिन्दू धर्म होगा ..हिन्दू धर्म होगा तभी भारतीय जनता पार्टी फैलेगी फूलेगी | संतों के प्रति फैलाई जा रही साजिस तो नहीं हैं हिन्दू विरोधी भारतीय जनता पार्टी विरोधी पार्टियों की | आशाराम चीखते रहे यह मेरे खिलाफ साजिस है | क्या अब संत रामपाल चीखेंगे की यह सब साजिस है …? अगला कौन संत होगा साजिस का शिकार सावधान हो जाओ संतो …..| और चुप चाप कंदराओं मैं तपश्या मैं लीं हो जाओ | …………………………………………………....चिंता मत करो संतो भगवन अवश्य अवतरित होंगे ….क्यों की उन्होंने स्वयं कहा है …..………………………………………यदा यदा ही धर्मष्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युथानम् धर्मष्य तदात्मानं सृजाम्यहम || ………………………………………………...जब जब धर्म की हानि और अधर्म की बृद्धि होती है ,तब तब मैं अपने रूप को रचता हूँ | अर्थात साकार रूप मैं लोगों के सन्मुख प्रकट होता हूँ |………………………………………………………………...ओम     शांति शांति शांति



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
November 21, 2014

अपराधी को दंड तो मिलना चाहिए परन्तु सभी अपराधियों को एक ही नजर से देखा जाना चाहिए और एक जैसे मानदंड हों

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    November 21, 2014

    निशा जी आभार अपराधी दंडित अवश्य होता है इह लोक मैं हो या परलोक मैं….प्रक्रति अपने नियम कभी नहीं तोडती । राजनीतिज्ञ ,धर्म गुरु भावनाओं से खेलते अपना धर्म समझते हैं । एक समय ऐसा आता ही है जब कर्म फल भोगना ही पडता है तभी तो ओम शांति शांति से युक्त हो पाते हैं 

jlsingh के द्वारा
November 19, 2014

धर्म की हानि करने में इन छद्म संतों का बड़ा रोल रहा है. जनता का बिश्वास अब संतों पर काम होना चाहिए पर ऐसा होगा नहीं ..आस्था और अंध बिश्वास में जयादा अंतर नहीं होता …आज बहुत सारे लोग मोदी जी को अवतारी परुष कहने लगे हैं….बस!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    November 20, 2014

    जवाहर जी आभार सब कुछ प्रक्रति के नियमानुसार कि्या ,प्रतिकि्या के अनुसार होता रहता है । मनमोहन ना होते तो मोदी कैसे होते । संत ना होते तो भक्ति कैसे होती । धर्म कैसे फलता फूलता । क्या संतो पर कीचढ उछालता मीडिया ,स्यंम ही संतो को महिमा मंडित करता रहता है । अपनी अपनी  स्वधर्मी रोजी ऱोटी सबने कमानी है । तभी ओम शांति शांति जपते चैन की खर्राटी नींद सो सकेंगे 


topic of the week



latest from jagran