PAPI HARISHCHANDRA

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मर्यादा पुरुषोत्तम ..ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिससे सर झुकना पड़े

Posted On: 30 Sep, 2014 हास्य व्यंग,Politics,Others में

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न खाऊंगा न खाने दूंगा ..न गंदगी मैं रहूँगा न रहने दूंगा ..……………………………………….माँ की अशीम भक्ति ,अपनी माँ की असीम सेवा एक मर्यादा ही तो है जिससे शिक्षा लेकर अपनी माँ की सेवा करना अब धर्म ही होता जायेगा | क्यों की गीता मैं भगवन कृष्ण ने कहा है जैसा जैसा महान लोग करते हैं वैसा ही अनुकरण आम जान समुदाय भी करते हैं | भारत ही नहीं विश्व समुदाय भी माँ के गुण गान करना सेवा करना अपना धर्म मानता जायेगा | …………………………………………………………क्षमा करो हे दया मई माँ कुपुत्र भी हूँ अगर बुरा भी बुरी न माता कभी हुयी है ……………………………..अब पुत्र अपने को ही पापी मानते यही स्तुती करेंगे ………………..मत्समः पातकी नास्ति पापध्नी त्वत्समा न हि | एवं ज्ञात्वा महा देवी यथायोग्यं तथा कुरु ||………………………………………………………………………………..माँ हर स्त्री मैं हर स्वरुप मैं होती है | हम तो भारत माता , मात्र भाषा मैं भी माँ का रूप देखते हैं | …………….दुर्गा सप्तसती मैं भी कहा है की ……हे देवी विद्या मैं तुम्हारे ही भिन्न भिन्न स्वरुप हैं | इस संसार मैं जितनी महिलाएं हैं वे सब तुहारी ही मूर्तियां हैं | एक मात्र तुमने ही इस संसार को व्याप्त कर रखा है | तुम्हारी स्तुती किस प्रकार हो सकती है ,तुम तो स्तवन करने योग्य पदार्थों से पर एवं परावाणी हो || ………………इसीलिये हर सफलता पर अपनी माँ के चरण स्पर्श करना धरम होता है | नवरात्र मैं सिर्फ जलपान करना आश्था को उपजाता है | मन मैं कुविचार नहीं आते हैं | शत्रुओं के नाश के लिए माँ दुर्गा शक्ति स्वरुप बन जाती है | सिद्धी प्राप्ति का एक कठिन मार्ग है किन्तु सिद्धी निश्चित होती है | ………………………………………………………………….….भारत की मात्र भाषा हिन्दी है ,जिसको हम भारत मै उतना सम्मान नहीं दे पाते हैं .| इसीलिये स्वामी विवेकानंद ने योग ,अध्यात्म और हिन्दी को सम्मान देने के लिए अमेरिका को चुना | जिसका अनुकरण करते अटल विहारी बाजपेयी चार चाँद लगा गए | हिन्दी शायद इसी आस मैं प्रफुल्लित होती रही की संयुक्त राष्ट्र मैं ,मोदीसन गार्डन मैं ,अमेरिका मैं हिन्दी एक सम्मानित भाषा का सम्मान पाकर श्रृंगारित हो जाएगी | उसे क्या पता था कि उसे अपने रूप पर आँशु ही बहाने पड़ेंगे | दुरूह ,क्लिष्ट शब्दों की जो धज्जियाँ उड़ाई गयी उससे तो अच्छा यही होता उसे नहीं ले जाया जाता | हिन्दी का कैबरे डांस हिन्दी को खुश नहीं कर पाया | हाँ हिन्दी हमारे देश की बहु सा सम्मान पाकर चर्चित हो गयी | ………………………………………माँ दुर्गा के परम भक्त नरेंद्र मोदी जी शायद यह जानते होंगे कि दुर्गा सप्तसती का पाठ उसी ने करना चाहिए जिसे संस्कृत श्लोकों का सही उच्चारण करना आता हो गलत उच्चारण शब्दों का अर्थ बदलते अनिष्ट भी कर देता है | ………………………………....किन्तु भगवन की दया से मोदी जी ने शांति पाठ ही किया जिनके अर्थों का अनर्थ नहीं हो सकता | ओम शांति शांति शांति कुछ भी कह दो कैसे भी कह दो शांति ही प्रदान करेगा ….| |…………………..मर्यादा पुरुषोत्तम भगवन राम भी माँ के परम भक्त थे | अपनी माँ कैकेयी की आज्ञा को मन्ना धर्म मानते बनवाश भोगा | माँ की खुशियों के लिए उन्होंने अपनी पत्नी सीता को भी बनवाश सुख दिया | रावण के द्वारा हरण करने पर युद्ध करके पुनः प्राप्त किया | किन्तु फिर त्याग कर दिया | यहाँ तक की माँ की खुशियों के लिए लक्ष्मण ने भी अपनी पत्नी उर्वशी को भी तपश्या को मजबूर कर दिया | ………………………………………………………………………………………..…माँ के भक्त शायद मात्र भक्ति मैं इतने तल्लीन हो जाते हैं कि अपनी पत्नी को पूरा सम्मान नहीं दे पाते हैं | पत्नी भी पति भक्ति मैं अपना धर्म निभाती है | नरेंद्र मोदी जी भी माँ के परम भक्त हैं जननी माँ की भक्ति के साथ माँ दुर्गा के भी परम भक्त हैं | हर स्त्री मैं माँ का स्वरुप देखते ही माँ सा सम्मान देते अपने इर्द गिर्द भी स्त्रीयों को सम्मान देते हैं |अपने मंत्रीमंडल को भी उन्होंने श्री सम्मान भरपूर दिया है |……………………………………………………………………………...ऐसा कुछ नहीं करूंगा जिससे सर झुकना पड़े ….| यह भगवन राम ने भी कहा था | किन्तु अश्वमेघ यज्ञ करने मैं जब विन पत्नी यज्ञ संपन्न नहीं हो सकता था तब सर झुकाते हुए माता सीता की प्रतिमा से ही काम चलाया था | बराक ओबामा का दिया भोज और उसमें मिशेल ओबामा की अनुपश्थिती शायद नरेंद्र मोदी के सर को झुका महसूस कर रही होगी | क्या देश की माँ को वह सम्मान पाने का अधिकार नहीं कि वह अपने पति की तरह सम्मा नित महसूस करे | पत्नी स्वरुप है | स्वीकार भी कर लिया किन्तु क्यों नहीं साथ साथ जनता चरण स्पर्श कर पाती है जनता | जनता भी गर्व से यह कह सके कि हमारी भी माँ है | हम भी अपनी माँ के लिए मर मिटने के भाव से उनका पूजन स्तवन कर सकें | हमारी माँ का वह दयनीय रूप जो आम जनता की तरह अपने पति को दूरदर्शन पर ही देख रही हो | कैसा होगा यह स्मरण होते ही दिल द्रवित हो जाता है | मोदी जी आपकी माँ है तो हम जान समुदाय की भी ,देश की भी माँ है | माँ को मिला सम्मान जनता को माँ सा दुलार ही देगा | कितना जीएगी माँ …? माँ हम जनता की असली माँ जगजननी माँ हमारे देश की माँ तुम ही हो शक्ति स्वरुप होने पर फी शक्ति विहीन बनवाश भोग रही हो | माँ सीता की तरह …..भगवन न करे ……….……..हम         भी       यही   गीत   गाते   रहें   ………..की तुम कितनी अच्छी हो कितनी भोली हो ओ .माँ  o   माँ …ओ .बा माँ   ओबामा   ..ओबामा ,…………………………………………………ओम शांति शांति शांति

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
October 15, 2014

आप के सभी लेख बहुत गहन और हास्य मय होते ही हैं ,आदरणीय |पर लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला हैं ,सादर |

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 4, 2014

श्री हरिश्चन्द्र जी अलग शैली मे लिखा अच्छा लेख है ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    October 4, 2014

    आभार विष्ट जी 

Shobha के द्वारा
October 3, 2014

श्री हरिश्चन्द्र जी बहुत अच्छा लेख पुरातन की आधुनिकता से तुलना करता लेख शोभा

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    October 5, 2014

    डा. शोभा जी आभार 

sadguruji के द्वारा
October 2, 2014

आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! सुहावनी सुबह के पांच बजने वाले हैं ! नवरात्रि का ये समय सबके लिए मंगलमय हो ! आपने इस व्यंग्य लेख में मोदी जी द्वारा विदेशों में बोली गई हिंदी,ओबामा जी की पत्नी और मोदी जी की पत्नी की चर्चा की है ! मोदी जी कोई साहित्यकार नहीं हैं,जो शुद्ध हिंदी बोलें ! वो हिंदी को विदेशों में इतना सम्मान देने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं,इसीलिए बधाई के पात्र हैं ! ओबामा जी की अपनी पत्नी से इन दिनों कुछ संवादहीनता चल रही है और मोदी जी की भी यही स्थिति है ! मेरे विचार से दोनों देशों के व्यापक हित में ये एक महत्वहीन मुद्दा है ! मोदी जी की उपलब्द्धि देश को गौरवान्वित करने वाली है ! लेख की प्रस्तुति के लिए आभार !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    October 5, 2014

    सद्गुरु जी आभार जहाॅ श्रद्धा भक्ति हो सब कुछ शांति कारक लगता है भक्ति की महिमा अपरम्पार है 

jlsingh के द्वारा
October 1, 2014

माँ हम जनता की असली माँ जगजननी माँ हमारे देश की माँ तुम ही हो शक्ति स्वरुप होने पर फी शक्ति विहीन बनवाश भोग रही हो | माँ सीता की तरह …..भगवन न करे ……….……ओ .माँ ओ माँ …ओ .बा… माँ ओबामा ..ओबामा ,…………………………………………………ओम शांति शांति शांति गुजराती में माँ को बा ही बोलते है शायद जैसे कस्तूरबा भी देश की माँ की तरह ही थी… सादर सर जी!


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