PAPI HARISHCHANDRA

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देश भक्त हैं मुस्लमान ..इन्हें पहिचानो

Posted On: 19 Sep, 2014 हास्य व्यंग,Politics,Others में

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एक राजा का महल और उसके किले मैं असंख्य मंत्री नौकर चाकर और खुले खूंखार कुत्ते सब जानते पहिचानते हैं कि फटे कपड़ों वाला ,बड़े बालों ,दाढ़ी वाला अवश्य ही चोर या आतंकवादी ही होगा | अतः ऐसे व्यक्ति को लताड़ने या काट खाना भी इस परिसर के जीवों का धर्म ही होता है | यह सब ज्ञान इस परिसर के जीवों के जींस मैं ही होता है | इसके लिए किसी शिक्षा की जरूरत नहीं होती है | कुत्ता अपने स्वामी के दुश्मन को भी सहजता से पहिचान लेता है और भोंकना आरम्भ कर देता है कभी कभी काट भी खाता है | यह ज्ञान भी उसे जन्मजात भगवन द्वारा प्रदान कर दिया जाता है | कभी कभी ऐसा भी होता है की कोई ऐसा व्यक्ति आ जाये जिसको सम्मान देना लोक लाज के लिए आवश्यक हो जाता है अतः उसका ज्ञान भी पुचकारते अपने जीवों को दे दिया जाता है और समझदार जीव अपनी भाषा मैं बदलाव दिखा देते हैं | जीवो तुम्हारा तो धर्म ही भोंकना होता है मैं तो सर्वोच्च पदस्त हूँ मार्ग दर्शन करना ही पड़ता है | पद को गौरवान्वित करना भी धर्म होता है | ……………………………………………………………………..…..कपिल के लाफ्टर शो की तरह ही हँसना ही पड़ता है चाहे कुछ हँसने की बात हो या न हो | डयूटी ही हँसने की होती है | दर्शक तो चाहे बोल समझे या न समझ पाये सबको हँसते, हँस ही देते हैं फिर आपस मैं पूंछते रहते हैं क्यों आई हँसी ….? ………………………………………………………………..इंडिया यानी भारत के टुकड़े हिंदुस्तान और पाकिस्तान की तरह हुआ | हिन्दू से हिंदुस्तान ,मुस्लमान से पाकिस्तान | फिर क्यों हिन्दू पाकिस्तान मैं और मुस्लमान  हिंदुस्तान मैं दीखते हैं ,जब दिखेंगे तब जीवों ने अपनी स्वाभाविक वाणी बोलनी ही पड़ती है | यह भगवन की दी वाणी है जो स्वाभाविक रूप से निकल ही जाती है | तभी तो राजा को सम्भाषण करना पड़ता है कि यह मुस्लमान देश भक्त हैं इनकी और कुदृष्टि मेरे सामने मत डालो | ……….………………...भगवन कृष्ण ने गीता मैं कहा है कि…………………………………… जैसा .आचरण श्रेष्ट पुरुष करते हैं अन्य पुरुष भी वैसा वैसा आचरण करते हैं |वह जो कुछ प्रमाण कर देता है ,समष्त मनुष्य समुदाय उसी के अनुसार बरतने लगता है | ………………………………..एक राजा ने अपना राज धर्म निभा दिया | अब कूटनीतिज्ञों को यदि धर्म मैं भी कुनीति दृश्य हो रही है तो इसमें राजा का क्या दोष ….| ……………………………राजा ने तो अपना धर्म इसलिए निभाया की मुसलमानो को पहिचान लो | यह मुस्लमान नहीं यह हिन्दुस्तानी हैं | इनके ऊपर भोंकना उचित नहीं है | यह निरीह जीव कुत्ता तो समझ चुका है | किन्तु विडम्बना यह हो रही है की मनुष्यों मैं श्रेष्ट हिन्दू नहीं समझ पा रहा है | क्या हिंदुस्तान को दुनियां का विकसित देश नहीं बनाना चाहता है | यदि विकाश चाहता है …,विकसित देश कहलाना चाहता है तो क्यों नहीं मुसलमानों को हिन्दुस्तानी कह कर सम्मान देता है | शायद नरेंद्र मोदी जी यह भूल चुके हैं कि हिंदुस्तान मैं सब हिन्दू हैं यह उद्घोषणा भूल गए हैं जो आपके ही गणों के सम्भाषण हैं | हिंदुस्तान मैं मुस्लमान हैं ही नहीं तो उनको किस सर्टिफिकेट कि आवश्यकता है कि वे देश भक्त हैं | …………………..……………………………….शाब्दिक अर्थ से भी सिधु नदी के इस तरफ रहने वाले सब हिन्दू ही तो हो | तो फिर क्यों नहीं स्वीकार कर लेते की तुम भी हिन्दू ही हो | हिंदुस्तान मैं रहने वाले हिन्दू …| जड़ ही ख़त्म हो जाएगी ,किसी प्रमाण पत्र क़ी जरूरत नहीं होगी ...| …………………………………………………………………………………….एक सुर मैं सारे हिन्दुस्तानी यह गीत गाते गर्व करेंगे ………………………………………………………………..सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ,हिंदी हैं हम ,बतन है हिंदुस्तान हमारा ……| …………………………………………………..सम्पूर्ण विश्व मैं सर्व शक्तिशाली विकसित देश हिंदुस्तान हो जायेगा | विकाश कि जड़ हिंदुस्तान से ही उगेगी | जिसके फल विश्व मैं बनते जायेंगे | ओबामा को पीछे छोड़ देने वाले नरेंद्र मोदी जी ही होंगे | अमेरिका ,चीन, जापान सब पानी भरते नजर आएंगे | रुपया ,डॉलर को भी पीछे धकेल देगा | …………………………….…स्वर्ग मैं ब्रह्मा विष्णु महेश सब देवताओं के साथ पुष्प वर्षा करते हिंदुस्तान को एक बार फिर देव लोक से भी ऊँचा स्थान देंगे | सर्वत्र राम राज्य होगा | ..………………भगवन नमो क़ी जय जय कर होगी | ………………………………………………... जनता ओम शांति शांति शांति का जप करेगी



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
September 24, 2014

आदरणीय हरिश्चंद्र जी, सादर अभिवादन! धर्म चर्चा, शास्त्रार्थ, धर्म की परिभाषा और विवेचना से पूर्ण शांति का अनुभव होने लगा है …योगी सिद्ध पुरुष अज्ञातवाश में चले गए हैं अब तो नवरात्र की ही चर्चा हर और है हरि ओम …शांति शांति शांति

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    September 26, 2014

    जवाहर जी आभार …या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता…..शक्ति भी लक्ष्मी रूपी हो गयी है कब किस को मिल जाये ..मोदी जी भी शक्ति पाने के लिए जवाहरी नीति जेकेट पहिनते पहिनाते बैचैन भटक रहे हैं सिर्फ जल ग्रहण कर शायद शक्ति पा लेंगे लेकिन लगता है आत्मा बैचैन ही रहेगी ओम शांति शांति जपना ही पडेगा  

sadguruji के द्वारा
September 21, 2014

आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! काफी दिनों के बाद आपकी वैचारिक उपस्थिति हुई है ! अभी दो दिन पहले आपको हमलोग याद कर रहे थे ! बहुत अच्छा व्यंग्य लेख ! आपकी शुभकामना फलित हो-सम्पूर्ण विश्व मैं सर्व शक्तिशाली विकसित देश हिंदुस्तान हो जायेगा | विकाश कि जड़ हिंदुस्तान से ही उगेगी | जिसके फल विश्व मैं बनते जायेंगे | ओबामा को पीछे छोड़ देने वाले नरेंद्र मोदी जी ही होंगे | अमेरिका ,चीन, जापान सब पानी भरते नजर आएंगे | रुपया ,डॉलर को भी पीछे धकेल देगा | आदरणीय हरिश्चंद्र जी,देशभक्ति वाली बात पर एक व्यंग्य लेख मंच को समर्पित कीजिये ! मुसलमानो पर आरोप लगता है,परन्तु क्या रिश्वत लेने वाले,अवैध काम करने वाले,साम्प्रदायिकता के बीज बोने वाले,गरीबों का शोषण करने वाले और भ्रस्ट नेता क्या ये सब हिन्दू लोग देसभक्त हैं ? मंच पर उपस्थित होने के लिये आपका स्वागत,अभिनन्दन और बधाई !

    nishamittal के द्वारा
    September 22, 2014

    सहमत हूँ आपसे

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    September 22, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी आभार हितोपदेश पाकर  एक वर्ग क्रतार्थ हो संमार्ग से शांति पाता है वहीं सद्रगुरु के उपदेशों की अवहेलना उसे अशांत बना देती है भ्रमित अशांत मनुष्य ही कुमार्गी हो जाता है देश भक्ती भी सद्रगुरु के हितोपदेश ही बनाते हैं हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी सद्रगुरु का काम कर रहे हैं शायद ओम शांति शांति के बुद्ध फिर पैदा हो जायें 

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    September 22, 2014

    निशा जी आभार उषा की शांति ताजगी को दिन भर गॅवाने के बाद निशा ने मानो फिर ताजगी देकर मन शांत कर दिया अब ओम शांति शांति का जप करते निद्रा सुगम हो जायेगी 

Shobha के द्वारा
September 20, 2014

हरिश्चन्द्र जी बहुत अच्छा लेख वाकई मोलाना इकबाल ने लिखा था ‘हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा ‘ यह प्रश्न ही नही उठाना चाहिए मुसलमान देश भक्त हैं जरा मोहल्लों में जा कर फर्क कर दिखाए कौन हिन्दू है कोन मुसलमान सब के एक ही दुःख दर्द हैं जिसे सब मिल कर बाटते हैं शोभा

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    September 22, 2014

    शोभा जी आभार अशिक्षा ही कुमार्ग पर बहका देती है वरना दुख सुख के सह भागी हैं ओम शांति शांति का जप ही संमार्ग पर ला सकत है काश शांति पाठ ही राष्ट्रधर्म होता

    sadguruji के द्वारा
    September 22, 2014

    आदरणीया डॉक्टर शोभा जी ! ‘हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदोस्ता हमारा‘ गाने वाले देशभक्त मौलाना इकबाल बाद में देशद्रोही भी हो गए थे ! उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया था कि ‘हिन्दोस्तान की जमीन पर नमाज पढ़ना भी.नापाक है !’ये बात आप की सही है कि हिन्दू मुसलमान सब के एक ही दुःख दर्द हैं,परन्तु ये लोग एक साथ जिन मोहल्लों में रहते हैं,वहां की दिक्ततों को और एक दूसरे के प्रति नफरत की भावना को बहुत नजदीक से मैंने देखा है ! वही सब दिक्क्तें और नफरत अक्सर दंगे और हिंसा का रूप धारण कर लेती है ! उस स्तर पर यानि मोहल्लों में हिन्दू और मुसलमानो के बीच प्रेम और भाईचारा कैसे कायम हो,ये एक बड़ी समस्या है ! देशभक्त और देशद्रोही होने की असली लड़ाई तो वहीँ लड़ी जा रही है ! आज धर्म धर्म न होकर एक माइंड गेम और माफियागिरी हो गया है ! एक दूसरे को नीचा दिखाने की भावना और आम पब्लिक की आपसी गाली-गलौज तो इसी मंच के जागरण ब्लॉग के एक लेख “मक्का-मदीना में गैर-मुस्लिम का जाना सख़्त मना है फिर भी इन्होंने मुस्लिम ना होते हुए भी मक्का में प्रवेश किया, जानिए कौन हैं ये” में देख लीजिये ! http://infotainment.jagranjunction.com/2014/06/15/non-muslims-cant-enter-makka-madina/

    sadguruji के द्वारा
    September 22, 2014

    मैंने उक्त लेख के कमेंट की चर्चा की है !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    September 23, 2014

    सद्गुरु जी धर्म पर संत  कबीर ने भरपूर कटाक्ष किये हैं धर्म वही हो सकता है जिससे जीवों का भला हो सकता हो जीव शांति का आभास करते दुआ करने लगे गीता के अनुसार स्वधर्म (अपने कर्तव्य कर्म )पालन ही सबसे बडा धर्म है स्वधर्म पालन ही शांति का कारक होता है बाकी सब दिखावा आडम्बर हैं आडम्र्बरों से अहंकार होता है जो सारे ध्र्मों का नाश कर देता है राजनीति ऐसा धर्म है जहाॅ सब धर्म धूरी समान हो जाते हैं  तब ओम शांति शांति जपते ही शांति पा सकते हैं 

    sadguruji के द्वारा
    September 23, 2014

    राजनीति ऐसा धर्म है जहाॅ सब धर्म धूरी समान हो जाते हैं ! आदरणीय हरिश्चंद्र जी,बहुत गहरी व्यंग्यमय बात आपने कही है !


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