PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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मैं कहीं रावण न बन जाऊँ, तेरे प्यार मैं ओ बहिना

Posted On: 10 Aug, 2014 हास्य व्यंग,Others में

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राजनीतिज्ञों का रक्षाबंधन देखकर यह भ्रम सा लगता है की इस रक्षा बंधन की राजनीतिज्ञ कूटनीति क्या होगी | राजनीतिज्ञ को रक्षाबंधन से बाँधना राजनीती है या बंधवाने वाले की कूटनीति | राजनीतिज्ञ किसी काम को भी बिना राजनीती नहीं करता | वहीँ अब बहिन भी कूटनीति जानती है | रक्षा बंधन भाई बहिन के भावविभोर प्यार का त्यौहार | एक भावनात्मक लगाव ,संरक्षक भाई की परिकल्पना हर बहिन मैं होती है | और भाई भी अपनी सामर्थ्य से भी अधिक मरने मारने वाले भावों से बहिन की रक्षा का बचन देना चाहता है | कभी कभी यही प्यार रावण को जन्म दे देता है | सूर्पनखा अपने भाई के बचन को अपनी अनैतिक्ताओं मैं भी भुनाती है और लंका नाश के साथ भाई के कुल का नाश का कारण भी बन जाती है | कंश जब अपनी बहिन के प्यार मैं पागल सा हो जाता है | तो उसका मार्ग दर्शन करने वाली आकाशवाणी को ही उसने शत्रु मान लिया | और बहिन को प्रताड़ित करना आरम्भ किया | वहीँ कृष्ण और सकुनी ने भी बहिन के प्यार मैं पागल हो महाभारत को जन्म दिया | जिस बहिन ने रक्षा बचन भाई से ले लिया वह अपने भात्र प्रेम को अनैतिक्ताओं मैं भी भुनाती नहीं चुकती है | विवाह पर्यन्त ससुराल भी भाईयों पर ही निर्भर हो ससुराल के लिए सिरदर्द बन जाती है | यदि भाई सबल होता है तब वह भी अपनी बहिन को दिए बचन को निभाने के लिए भरपूर सहयोग करता है वहां नैतिकता ,अनैतिकता उसकी कसौटी नहीं होती | वहीँ पति पत्नी अनबन , सास ,ननद नाते रिश्तेदार सभी असहनीय लगने लगते हैं | या तो परिवार मैं विखराव होता है या मार पीट ,कोर्ट कचहरी ,जलाकर मार देना ,तलाक तक होती है | ……….बहिन का प्यार कितना अच्छा लगता है उससे भी अच्छा तब लगता है जब किसी बहिन के संरक्षक बनते भाई उसकी रक्षा करता है | बहिन का भी यही धर्म होना चाहिए की वह अपने भाई के धर्म को नैतिकता मैं ही रहने दे | उसके लिए संकट का कारण न बने | कितने भाई अपनी बहिन को छेड़ने वालों से लड़ मरते हैं | क्यों ऎसी घड़ी पैदा की जाये की भाई को युद्ध मैं झोंक दिया जाये | अपने पहनावे और आचरण को सुधार कर भी ऎसी स्तिथी को आने से रोक जा सकता है | हर भाई रावण सा ससक्त नहीं हो सकता ,जो अपनी सूर्पनखा बहिन के कुकृत्यों को अपनी शक्ति से नगण्य कर दे | भाई बहिन का प्यार राजनीती ,कूटनीति नहीं होता | राजनीती मैं रक्षाबंधन भी कूटनीति ही होती है | अपना कार्य सिद्धी हेतु किसी को भी भाई के बंधन से भावनात्मक जोड़ते अपना कार्य सिद्ध कर लिया जाता है | किन्तु प्रत्यक्ष मैं भाई जिस प्रकार बहिन पर सर्वश्व न्योछार करना चाहता है ,बहिन भी यही भावनात्मक दोहन करती है ,तो वहीँ बहिन का भी धर्म भाई के हितों की रक्षा होता है | किन्तु समाज मैं सुर्पनखाओं की कमी नहीं होती और भाई के कुल का नाश करती रहती हैं | ……….नैतिकता के लिए भाई का सहारा लेना ही बहिन का धर्म होना चाहिए वहीँ भाई का भा यह कर्तव्य होना चाहिए की जब बहिन कभी पथ भ्रष्ट होते सहयोग चाहे तो उसे उचित मार्ग दर्शन देते ही रक्षा करे | ………………………………………………………………………...लेकिन यह परिकल्पना ही लगती है जहाँ ऊपर से नीचे तक सम्पूर्ण समाज भ्रष्ट हो चूका है वहां नैतिकता वेकार की बातें ही लगती हैं | सिर्फ बहिन पर होते अत्याचार ही नजर आते हैं और भाई रावण मार काट तक कर बैठते हैं | सिर्फ भाई बहिन का रिश्ता ही नजर आता है | और उसकी रक्षा करना धर्म..…….. | होता भी यही आया है और होना भी यही चाहिए | तभी भाई बहिन का प्यार नजर आएगा | ……………………………………………………..ओम शांति शांति शांति

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
August 13, 2014

बहुत सारगर्भित और शिक्षाप्रद लेख आदरणीय.

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 27, 2014

    दुबे जी आभार ओम शांति शांति कारक लेख का  उद्देष्य है  

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 11, 2014

हरीश चन्द्रा जी, अच्छा लगा आपका लेख, थोडा पारँपरिक लेखन से अलग । लेकिन सच को किन्हीँ भी शब्दोँ मे कहा जाय वह सच ही रहेगा । लिखे विचारोँ से सहमत हूँ ।

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 11, 2014

    विष्ट जी आभार वास्तव मैं सच कडूवा ही होता है किंतु कहने पर बूरा ना लगे इसलिए संदर्भ आवश्यक हो जाते हैं ओम शांति शांति 

shakuntlamishra के द्वारा
August 10, 2014

हरिश्चंद्र जी बहुत अच्छा लेख है ,इसकी प्रत्येक लाइन सच है ,आज हमारे समाज को ऐसे ही लेखो की सख्त जरुरत है !बहुत सुन्दर !!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 11, 2014

    शकुंतला जी आभार हर भाई बहिन अपने रिस्ते को रक्षाबंधन मैं ऱाजनीति कूटनीति से दूर आत्मीयता भाव से ही ओतप्रोत हों ओम शांति शांति 

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 10, 2014

बहन का भी धर्म होना चाहिए की वह अपने भाई के धर्म को नैतिकता मैं ही रहने दे | उसके लिए संकट का कारण न बने ,——-इस पवित्र रिश्ते को राजनीती से दूर रखने की सलाह बहुत सामयिक है और आधुनिक फैशनेबिल बहनों को अपने दायरे में रहने की अच्छी शिक्षा के साथ  व्यंग लेखन में आपकी दक्षता स्पष्ट दिखाई दे रही है आदरणीय हरिश्चंद्र जी .

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 11, 2014

    निर्मला जी आभार निर्मल मन की टिप्पणी अमिट छाप छोड रही है ओम शांति शांति 

Shobha के द्वारा
August 10, 2014

हरिश्चंद्र जी रक्षा बंधन के शीर्षक को ले कर बहुत सार गर्भित लेख लिखा है लेख की राजनीतिज्ञ को ——कूटनीति है बहुत ही सच्चाई के करीब है डॉ शोभा

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 11, 2014

    डा.  शोभा जी आभार रक्षा बंधन बच्चों केलिए भावनात्मक होता है राजनीतिज्ञों के   लिए बहिन एक ही होती है अन्य मेनकाऐं   ही लगती है उनके द्वारा मेनकाओं को भी राखी बांध कर स्वार्थ सिद्धकर लिया जाता है मेनका को सुर्पनखा बनते देर नहीं लगती ओम शांति शांति 

jlsingh के द्वारा
August 10, 2014

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 11, 2014

    जवाहर जी आभार दर्शन दुर्लभ हुए चलो रक्षा बंधन पर याद आए भगवान भाइ को लम्रबी उम्र दे ओम शांति शांति 

sadguruji के द्वारा
August 10, 2014

कितने भाई अपनी बहिन को छेड़ने वालों से लड़ मरते हैं | क्यों ऎसी घड़ी पैदा की जाये की भाई को युद्ध मैं झोंक दिया जाये | अपने पहनावे और आचरण को सुधार कर भी ऎसी स्तिथी को आने से रोक जा सकता है | हर भाई रावण सा ससक्त नहीं हो सकता ,जो अपनी सूर्पनखा बहिन के कुकृत्यों को अपनी शक्ति से नगण्य कर दे | सही कहा है आपने ! आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! व्यंग्य के साथ साथ बहुत शिक्षाप्रद रचना ! बहुत बहुत बधाई !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 11, 2014

    सद्रगुरु जी आभार किसी उपदेशक ,मार्गदर्शक लेख की सराहना सद्गुरु द्वारा हो जाये सोने मैं सुहागा ओम शांति शांति 


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