PAPI HARISHCHANDRA

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मोदी जी मौन तोड़ो ,साई\ स्वरूपानंद विवाद ख़त्म करो

Posted On: 6 Jul, 2014 हास्य व्यंग,Politics,Others में

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नमो से ‘ नारायण ‘बन चुके मोदी जी ,यह सत्य है की मौन ब्रत के अत्यंत महिमाएं हैं | पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री जी का यह गुण आप अपनाते गौरवान्वित हो रहे होंगे | जिस गुण से मनमोहन सिंह जी अपने दस वर्ष के कार्य काल को सुगमता से बीता सके वह गुण ही होगा यह आप समझ चुके हैं | अतः व्यर्थ के वाद विवाद से दूरी बनाते लग रहे हैं | गरिमा भी तभी बनी रहती है जब बचन अल्प और संयमित हों | ……………………………………………………………………….…अन्य विषयों पर कितना ही मौन धारण कर लें | उचित ही होगा | किन्तु जिस हिन्दू धर्म की मान मर्यादा से संघटित होते भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड विजय पाई और आपको प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित किया ,उसकी धज्जियां मीडिया द्वारा साईं भक्त बनाम स्वरूपानंद विषय पर उड़ाई जा रही हैं | विभिन्न चैनलों पर हो रहे मूर्खतापूर्ण शास्त्रार्थों से हिन्दू धर्म कितना अपमानित हो रहा है यह आप जब उनको देखेंगे तब ही जान पाएंगे | हिन्दू धर्म की धज्जियाँ उड़ाने का अधिकार किस कानून के तहत पाया है इन मीडिया के चैनलों ने | क्या आप को कुछ अहसास नहीं हो रहा है या आप तक यह संज्ञान मैं नहीं आया है | भारतीय जनता पार्टी जिन हिन्दू मानसिकता को भुनाती सत्ता पाती आई है क्या वह विखंडित नहीं हो जाएंगी | क्या हिन्दू फिर से सनातन ,शैव ,वैष्णव, द्वेत ,अद्वैत , जैन ,बौद्ध , सिख ,आर्यसमाज , जैसे असंख्य सम्प्रदायों की भाषा बोलता विखंडित हो जायेगा | असंख्य देवता अपने अपने को महान सिद्ध करते अपने अपने मंदिर स्थापित करते नजर नहीं आएंगे | ब्राह्मण ,क्षत्रीय ,वैश्य , शूद्र , के आलावा असंख्य जाती उपजाती विभक्त हो अपना अपना राग नहीं गाने लगेंगी | जिन ८० करोड़ लगते हिन्दुओं ने एक स्वर से भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर दिखा दिया की हम हिन्दू ही हैं | क्या विभक्त हिन्दू अपमानित हो लाख की सख्या मैं ही नहीं रह जायेंगे | ………………सत्ता सुख मैं नींद से जागिये | मौन ब्रत तोडिये | मौन ब्रत एक सिद्धांत नहीं होता | यह राजनीती है यहाँ अपने को बदलते रहना होता है | ………………………………..…मीडिया को किसी धर्म पर शाश्त्रार्थ कराने का अधिकार कभी नहीं होना चाहिए | कितना बैमनश्य फैल रहा है | आगे क्या होगा …? कल्पना से ही सिहरन हो जाती है | क्या हिन्दू मुसलमानों के धर्माचार्यों के बीच ऐसा शाश्त्रार्थ करवाया जा सकता है | शाश्त्रार्थ भी अगर दो विद्वानों के मध्य हो तो सम्मानजनक हल पा सकता है | किसी भी ढोल ,गंवार ,सुद्र ,नारी को शाश्त्रार्थ का भागी बनाकर उल्टा सीधा बोल शोर सराबे मैं कह दिया जाता है | …………………………………………………………………………………………..आप हिन्दू हैं, हिन्दू वोटों से विजय पा कर सत्ता मैं हैं | आप हिन्दू का , भारतीय जनता पार्टी का अहित कभी नहीं चाहेंगे | अपने शासन काल को निर्विध्न रूप से अंतिम समय तक ले जाना भी आपका धर्म होगा | भारत एक धर्म मय विकसित देश बने यह भी आपकी चाहत ,धर्म होगा | …..कानून के किसी अंश मैं भी किसी धर्म पर शास्त्रार्थ करने की कोई छूट नहीं दी जा सकती जबकि उससे बैमनश्य फैल रहा हो | ………………………………………………………….आप सनातन धर्म के शंकराचार्य से और साई भक्त अनुयायियों से भी ऊपर सर्वोच्च स्थान पर सुशोभित हैं | आपके पास शक्ति भी है | ज्ञान भी है और नीतिसंगत सुझाव भी होगा | आप किसी एक हिन्दू संप्रदाय के संत नहीं हो सकते आप तो सर्व हिन्दू सम्प्रदायों के भी सर्वोच्च संत ही सिद्ध होंगे | अब भारत मैं शंकराचार्य की पदवी सीमित सनातन हिन्दुओं की ही रह गयी है | ……………………………..आपका जागना ,मौन ब्रत तोडना हिन्दुओं के साथ साथ सम्पूर्ण भारत को एक बार फिर अंधकार मैं जाने से रोक सकेगा | ……………………………………………चार पीठों मैं एक पीठ के शंकराचार्य ही क्यों सनातन धर्म के प्रबक्ता सिद्ध हो रहे हैं …? अन्य तीन क्यों नहीं अपनी सुसुप्तता त्याग रहे हैं ….? शंकराचार्य पीठ पर महान प्रकांड विद्वान को ही सुशोभित किया जाता है | यह भी विचारणीय तथ्य है | जब सनातन धर्म ही अपने विचारों मैं एक रूपता नहीं ल पता है तो कैसे पूरे हिन्दू सम्प्रदायों से आशा की जा सकती है | ………………………………………………………………आप भारतीय जनता पार्टी के ,अटल विहारी बाजपेयी से महान प्रबक्ता प्रधानमंत्री के अग्रज उन से आदर्श प्रबक्ता हो | तो फिर क्यों नहीं उन का अनुसरण करते अपना मौन त्याग रहे हो | बाजपेयी जी कभी भी किसी समश्या पर मौन नहीं रहे | आप क्यों अपने विरोधी कांग्रेस के प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह का अनुसरण करते मौन धारण किये हो | आप का तो धर्म होना चाहिए अपने आदर्श गुरु का अनुसरण करना | आप वक्ता , प्रबक्ता ही नहीं अब आप शेर की दहाड़ से भी पहिचाने जाते हो आप की दहाड़ इस निरर्थक विवाद को ख़त्म कर सकती है | …………………………………………………………………जल्द से जल्द आप की पुरानी दहाड़ को सुनने के अकांशी समस्त हिन्दू समुदाय है | कहीं देर न हो जाये ,कुछ खोने से पाहिले प्रिवेंटिव मेंटेनेंस कर लेना ही समझदारी होगी | ………………………………………………..भूल जाईये इस को ………………………… .किस किस को याद कीजिए किस किस को रोईए , आराम बड़ी चीज है मुंह ढक के सोईये ……………………………..ओम शांति शांति शांति



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ranjanagupta के द्वारा
July 7, 2014

अपने सत्य कहा है ,हरिश्चन्द्र जी !किसकी प्रतिक्षा की जा रही है?बहुत हिदू और हिंदू धर्म अपमानित हो चुका !कभी इस्लाम के विषय में ऐसी अपमान जंक खिल्ली उड़ाई जाये तब मीडिया को पता लगे कि किसी धर्म का अपमान कितना मंहगा पड़ता है ,प्रधान मंत्री जी को दखल देना चाहिए !सादर साभार !!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 7, 2014

    रंजना जी आभार ओम शांति शांति शांति जपते रहना ही शांति देगा 

Shobha के द्वारा
July 6, 2014

हरिश्चंद्र जी विवाद उसी दिन से शुरू हो गया जब हमारे लोकल मंदिरों में साई मूर्ती की स्थापना कर दी धर्म की मार्किटिंग शुरू हो गई आम इंसान की समझ में तत्व ज्ञान समझ नहीं आता वह मंदिर में अपने आराध्य की पूजा करने आता है उसकी एक पद्धति है पहले गणपति की पूजा फिर अपने इष्ट देव की यहां तो सबसे आगे साई बाबा बिठा दिए उनके लगभग पैर के पास नन्हे से गणेश जी हनुमान जीबच्चे बर्बाद हो रहें हैंआप उन्हें धर्म से विमुख कर रहें है आम इंसान का इतना विरोध है इनका अलग मंदिर रहे बौद्ध जैन गुरूद्वारों मस्जिदों में क्यों नही हमारा ही मास कोमल है दस वर्ष में परिवार सहित विदेश रही हूँ हम हिन्दूओं में कहि एडल्ट्रेशन नहीं था विशुद्ध सनातन धर्म हम तमाशा बन गए हैं शोभा

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 7, 2014

    शोभा जी आभार ,सनातन धर्म का उदगम बेदों सॆ हुआ बैदिक युग ही निराकार ईश्रवर का ,स्रष्टी ससघन अध्यन था जो वैज्ञानिक तथ्यो पर सिद्रध था उसके बाद का पौराणिक युग से अब तक सब ऱाजनीति से प्रभावित ही हिंदु धर्म रूप मैं है जो एक ना समझा जा सकने वाला गडमड हिंदु है जो ईस रूप मैं 80 करोड हैं समझा जा सकने वाला एक लाख तक भी नहीं रह पायेगा कहा तो यह भी जाता है तीन पंडित कभी एक मत नहीं होते ईसलिए वैचैन ना हों ओम शांति शांति कहते 80 करोड हिंदुओ के हिंदुस्तान पर गर्व करें 

jlsingh के द्वारा
July 6, 2014

आदरणीय श्री हरिश्चंद्र जी, सादर अभिवादन! मोदी जी के एक वचन से आशाराम के समर्थक चुप हो गए थे और उन्हें आज भी कारावास से छुटकारा नहीं मिला. अब पता नहीं वे क्यों चुप हैं ..या भाजपा के अन्य प्रवक्ता भी अपना रोल अदा नहीं कर रहे … बस वैभनस्य फ़ैलाने की कोशिश हो रही है…. ऐसे आपका विचार उपयुक्त है ….सादर …………………………..ओम शांति शांति शांति!

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 7, 2014

    जवाहर लाल जी आभार आशाराम को तिरस्क्रत करना भारतीय जनता पार्टी को मॅहगा ही पडेगा उनकी तांत्रीक विद्या यदि कांग्रेस सरकार का पतन कर सकती है तो भाजपा पर उलटा प्रहार भी कर सकती है ओम शांति शांति 


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