PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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पाप फल भोगना ही पड़ेगा ,.....पतित पावनी गंगा नहीं .. ..

Posted On: 2 Jul, 2014 हास्य व्यंग,Religious,Others में

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पाप कर लो जी भर के पतीत पावनी गंगा है ही जिसकी एक डुबकी हमें निष्पाप कर ही देगी | यही शास्त्रोक्त विचार करके ही मानव दिल खोलकर पाप कर लेता था | लेकिन अब बैचैन हो रहा है क्या होगा जब पतीत पावनी गंगा ही नहीं रही | हमारे पाप कैसे धूलेँगे कैसे हमें मुक्ति मिलेगी | पापियों की बैचैनी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है | संत महात्मा बैचैन हैं ,पंडित भी बैचैन हैं | नेता राजनेता भी बैचैन हैं कैसे जन भावनाओं को भुना कर सत्ता बनायें | अपने आप को महापंडित मानने वाला मीडिया क्यों पीछे रहेगा | सत्य का पुजारी तो बन कर क्या करेगा जब जन भावनाएं साथ नहीं होंगी जन भावनाएं ही सत्य होती हैं | तभी तो नंबर एक की दौड़ मैं बने रहेंगे | सरकार का भी धर्म है धन लुटाते रहो सरकार को संजीवनी देते रहो और किया ही क्या सकता है |……… गतानुगती को लोकः ……..| ……………………………………..कितनी सुन्दर आत्म संतुष्टी है पाप करते कोई चिंता नहीं क्यों कि पाप स्वतः ही डुबकी मात्र से तर जाते हैं | भारत के ८० करोड़ हिन्दू जल्द से जल्द गंगा को पुनः भगीरथ प्रयास से जीवित करना चाह रहे हैं | सरकार का मीडिया का जब पूर्ण सहयोग होगा तो क्यों भारत मैं कोई हिन्दू कैसे पापी कहला सकता है जल्दी ही अच्छे दिन आएंगे और पापी मुक्त भारत होगा | …………………………………………………..संसार का एक मात्र देश होगा जहाँ सिर्फ पापियों से विहीन जनता होगी | यहाँ तक की स्वर्ग के देवता भी भारत मैं अपने पापों से मुक्ति को आया करेंगे | अब सरकारें भी तभी तक चल सकेंगी जब तक गंगा का प्रवाह रहेगा अन्यथा गंगा के साथ साथ उनका अंत भी होता जायेगा | …………………………….…………..क्या यह कपोल कल्पना होगी या सत्य होगा …? क्या गंगा के रक्त प्रवाह मैं इतनी प्रतिरोधक शक्ति रह गयी है कि वह बाहर के पापी वाईरस को नष्ट कर सके …?| क्या सरकार के या मीडिया की एंटी वाईरस गंगा को जीवन दे सकेंगे | क्या अंतिम सांश ले रही गंगा जिसके सारे शरीर मैं इन्फ़ेक्सन हो चूका हो ,जीवित हो पाएगी …? | जो खुद मरणासन्न हो चुकी हो क्या पापियों के पापों को तार पाएगी …? अब कोई एंटीवीओटिक गंगा को जीवन नहीं दे सकती | अपने मन मंदिर मैं ही समस्त नदियों का स्मरण करके ही अपनी आत्मा को शुद्ध करना होगा |…………………………. गंगे च यमुने च गोदावरी चैव ……………………………………….मन्त्रों से ही आत्मा ,स्थान शुद्धी करनी होगी | ८० करोड़ हिन्दुओं मैं मात्र एक करोड़ ही गंगा स्नान करते होंगे अन्य सब अपना उल्लू ही सिद्ध करते होंगे | ……………………………………………………………………………………..अतः पापियो सोच समझ कर ही पाप करना | क्यों कि पाप का इतना सहज उद्धारक हल अब व्यर्थ हो चूका है सरकारें भी ,मीडिया भी अपने अपने स्वार्थ मैं लगे हैं | कर्म फल अवश्य ही भोगना पड़ेगा | नरक मैं अवश्य ही सड़ना पड़ेगा | अब कोई भगीरथ नहीं आने वाला ,न ही कोई अवतार होने वाला | अब निश्चिन्त होकर पाप मत करो क्यों कि गंगा की डुबकी से कुछ नहीं होने वाला | पंडित ,पुरोहितों ,साधु ,संतों ,मीडिआ ,सरकारों के भ्रम जाल से बाहर निकलो | सब अपना अपना उल्लू सिद्ध कर रहे हैं | ……………………………………………………………………..भगवन कृष्ण ने भी गीता मैं स्पष्ट कहा है कि…………………………………………………………………………………….अनिष्टः मिष्टं मिश्रम च त्रिविधं कर्मणः फलम ……..(.मनुष्यों के कर्मों का अच्छा बुरा या मिश्रित फल मरने के बाद अवश्य भोगना होता है )……………………………………………………….……..क्या .. ऐसी प्रदूशित नदी का जल लेकर कांवणीए भगवन शिव का जलाभिषेक कर ,भगवन शिव को या अपने को संतुष्ट कर पाते होंगे ….? …ओम शांति शांति शांति का मन मंदिर मैं जप करते मन को पाप मुक्त रखो | किसी भी गंगा से अपने पाप मुक्ति की कामना मत रखो,यही स्वर्ग सुख भोगते स्वर्ग का मार्ग होगा ……………………………………………...ओम शांति शांति शांति



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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
July 6, 2014

बहुत ही यथार्थ और सटीक व्यंग्य लिखा है आपने …महप्रभु….. अचानक सभी मीडिया कर्मी भी अपना अपना पाप धोने अनेक घाटों पर जाकर पंडितों से गुर सीख रहे हैं मुझे तो लगता है ये सभी मिलकर गनगा और प्रदूषित ही कर रहे हैं …कोई रचनात्मक काम होता दीखता नहीं …हाँ आरती, पूजा और अंत में पूजन सामग्री पुन: गंगा में प्रवाहित…कुछ समय के लिए घाट अवश्य साफ़ हो जाते हैं….. उसके बाद उमा जी और शंकराचार्य का वाक्युद्ध चलेगा साईंऔर शकराचार्य भक्तों का द्वंद्व…. ओम शांति शांति शांति

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 6, 2014

    जवाहर जी आभार  उचित ही कहा ,कलियुगी धर्म है आडंम्बर खूब होंगे अंतरमन और भी दूषीत  होता जायेगा ओम शांति शांति 

deepak pande के द्वारा
July 4, 2014

. ऐसी प्रदूशित नदी का जल लेकर कांवणीए भगवन शिव का जलाभिषेक कर ,भगवन शिव को या अपने को संतुष्ट कर पाते होंगे ….? …ओम शांति शांति शांति का मन मंदिर मैं जप करते मन को पाप मुक्त रखो | किसी भी गंगा से अपने पाप मुक्ति की कामना मत रखो,यही स्वर्ग सुख भोगते स्वर्ग का मार्ग होगा WAAH EKDAM SACH BAYAN KAR DIYA HAI

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 5, 2014

    दीपक पांडेय जी आभार सत्य को पहिचानना ही उचित होगा 

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 4, 2014

    योगी जी आभार यमराज के कोप से बचने का सहज हल जानकर अब ब्लोग लिखता ही रहूॅगा मार्गदर्शन हेतु धन्यवाद तब तक ओम शांति शांति 

    yogi sarswat के द्वारा
    July 8, 2014

    हहहाआआआआ ! मेरा आईडिया आप अपने लिए उपयोग में ला रहे हैं लेकिन ध्यान रखियेगा , दुरूपयोग न हो जाए ! लिखते रहिये

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 8, 2014

    योगी जी आप यमराज की तरह कहां प्रकट हो गये अभी तो मैं ब्लोग लिख ही रहा हूॅ अभी मैं नही आने वाला ओम शांति शांति 

sadguruji के द्वारा
July 3, 2014

आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत अच्छा व्यंग्य लेख ! गंगा को निर्मल करने का भागीरथ प्रयास एक दिन जरूर सफल होगा ! शुभकामनाओं सहित !

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 3, 2014

    सद्गुरु जी आभार सब धन बल का ब्यर्थ अपव्य ही होगा मंत्रोपचार कर ही आवाहन करना होगा जैसे देवताओ का किया जाता है पाप गंगा स्नान से नही सत्कर्मों से ही कटेंगे ओम शांति शांति

pkdubey के द्वारा
July 3, 2014

सच्चा और अच्छा लेख है सर. पर गंगा है तो देश है.सादर आभार और बधाई.

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 3, 2014

    दुबे जी आभार वास्तव मैं गंगा हमारे देश की आत्मा है 


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