PAPI HARISHCHANDRA

SACH JO PAP HO JAYEY

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साई भक्त तुम हो कौन ....?

Posted On: 1 Jul, 2014 हास्य व्यंग,Religious,Others में

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क्या कोई साई पंथ है …? क्या कोई साई धर्म है ….? क्या कोई साई संप्रदाय है …..? क्या कोई विचारधारा है ….? क्या साई कोई धर्म गुरु हैं ….? क्या कोई साई मंदिर अकेले हैं ….? सिर्फ हमारी श्रद्धा है भक्ति है | सनातन धर्म बृक्ष पर लिपटी बेल ही तो है | हिन्दू मुस्लिम एकता के केंद्र पीर बाबा ही माने गए | जिनको मुसलमानो ने नकार दिया | सनातन धर्मी हिन्दुओं ने अपना लिया | या दूसरे शब्दों मैं साई भक्तों ने अपने साई भक्तों के विकास के लिए हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियां रख कर आकर्षित किया | जो भी हो साई भक्त हिन्दू सनातन धर्मी ही हैं | सनातन धर्म का पुनरोद्धार करने वाले शंकराचार्य जी थे जिन्होंने ही शंकराचार्य पीठ बनाई जहाँ प्रकांड विद्वान ही सुशोभित होते रहे हैं | धर्म पर होते विभिन्न संसयों पर उनका मत ही सर्वोपरी होता आया है | ………………………………………...साई भक्तो यदि अपने को सनातन धर्मी कहते हो तो क्यों नहीं महा संत स्वामी शंकराचार्य स्वरूपानंद के शरण मैं जाते हो जो उनका मत है उसको सिरोधार्य करना धर्म ही होगा | पाहिले सनातन धर्म ही है तभी साई भक्ति | कैसे अपने को साई भक्ति से सनातन धर्म को अलग कर पाओगे | ……………………………………………………………………………………………….जब खालिस्तान बनाने की मांग हुयी तो एक ही घर मैं हिन्दू मोने सिख कैसे अलग करते इसलिए आंदोलन सफल नहीं हो पाया | ऐसे ही यहाँ भी हो रहा है जिसका कोई आधार है ही नहीं | ……………………………………………………………………...दीन ,दुखियों के दुःख को जो मिटा सकता है वही हमें प्रिय हो जाता है | जब हम सब विपदाओं के मारे पागलों की तरह भटकते फिरते हैं उस वक्त कहाँ होते हैं धर्माचार्य ? क्यों नहीं प्रकट होते | यदि हमें कोई शांति प्रदान कर रहा है तो उसको क्यों धर्म विहीन सिद्ध कर रहे हो | हम सनातनी हैं अपने आराध्य भगवन को तो पूजेंगे ही किंदु दुःख नाशक संत को कैसे भूला देंगे | यह भी आप ने ही कहा है भक्ति मैं शक्ति होती है | हम तो सिर्फ भक्ति ही कर रहे हैं | देवी देवताओं को नकार तो नहीं रहे हैं | …………………………………………………………………………………………………….सनातन धर्म की इन्हीं जटिलताओं ने मुस्लमान बनने को मजबूर किया ,मुस्लिम धर्म को पनपने दिया | सिख धर्म का उदय करना पड़ा | दयानंद सरवती ने आर्यसमाज जैसे सरल धर्म मैं जोड़ा | धर्म को जटिल बनाकर ही हिन्दू धर्म मैं विखराव हुआ | अब बहुत सीधा साधा सर्वोदयी धर्म बन रहा है तो क्यों फिर जटिलता मैं धकेला जा रहा है | साईं भक्तों के आलावा भी साधारण हिन्दू यह नहीं समझ पा रहा है | …………………………..…क्या हिन्दू धर्म समर्थित राजनीतिक सरकार बनने से अब फिर हिन्दू जटिलता उभरेंगी | या राजनीती गड़े मुर्दों की तरह जटिलताएं निकल आएंगी ….? ब्राह्मण क्षत्रीय ,वैश्य शूद्र ,जैसी असंख्य जाती उपजातियों मैं विभाजित हिंन्दु मानसिकता आज सब कुछ भूल कर एक ही रूप मैं हिन्दू धर्म मान रही है | सिर्फ अपने आराध्य संकट विमोचक की भक्ति मैं डूबी है | ………………………………………………………………..सब मुर्ख हो जाएँ ,सब बुद्धिमान हो जाएँ | या बुद्धिमान ही साशन करें | अब कलियुग मैं सतयुग का अंतर आ गया है अब धर्म होगा सिर्फ राजनीतिक ..| जैसे चाहो धर्म को नचाओ ,बनाओ ,| सतयुग का अंतर है अतः धर्म का चरम विकास होगा भव्य मंदिर बनेंगे | भव्य मस्जिद होंगी ,भव्य गुरूद्वारे ,भव्य गिरिजाघर होंगे सर्वत्र धर्म की चमकीली करोडो सूर्य सी चमक होगी | किन्तु अंतर्मन मैं कलियुग का पाप ही होगा | …………………………………………………………....ओम शांती शांति शांति



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amarsin के द्वारा
July 3, 2014

जब जब धर्म का राजनीतिकरण होने लगे, व्यवसायी करण हावी होने लगे, तब स्वयं ही उक्त धर्म का हास होने लगता है. धर्म, व्यापार और राजनीति का क्रम में धर्म जब तक सर्व प्रथम स्थान में रहता है तब तक वह शिखर छूता है परन्तु वर्तमान में धर्म का स्थान व्यापार और राजनीति के अंत में आने के कारण यह सब हाल है…. किसने क्या कहा, किसके लिए कहा. सब जानकार मात्र यह कहावत स्मरण में आती है:- चोर चोर मोसेरे भाई….. http://amarsin.jagranjunction.com/2014/07/02/%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF-1-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A5%81/

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 3, 2014

    अमर सिंह जी आभार राजनीती का खिलौना ही होती है धर्म 

pkdubey के द्वारा
July 3, 2014

सर सत्य तो,साई या भगवान ही जानता होगा.पर बहुत से हिन्दू हाजी अली,अजमेर शरीफ जाते हैं.राम कृष्ण परमहंस ने भी मुस्लिम धर्म के अनुसार कुछ दिन उपासना की,उस धरम को समझने के लिए.कबीर को हर भारतीय जानता है.लेकिन इन बाबाओं के बड़े नाटक हैं. सादर आभार आप का लेख के लिए.

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    July 3, 2014

    दुबे जी आभार इश्वर मैं आस्था सब पंथ एक से ही लगते हैं


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