PAPI HARISHCHANDRA

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इडियट्स : क्यों इन बेशर्म मूर्खों ?

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
November 24, 2013

प्रणाम महोदय! बहुत बढ़िया सधा हुआ वार! (यह प्रतिक्रया आपके भारत रत्न वाले आलेख के लिए है उसपर प्रतिक्रिया नहीं जा रही!)

jlsingh के द्वारा
November 24, 2013

सादर प्रणाम आदरणीय हरिश्चंद्र जी, उन्हें भी कोटि कोटि प्रणाम, जिन्होंने हम सबको बनाया! आपने अपने नाम के आगे विशेषण तो लगाया ही है, इस सुन्दर प्रार्थना को भी अनुपयुक्त शीर्षक देकर भ्रमित कर दिया ..मेरे से जाने अनजाने मैं ,आमोद प्रमोद मैं या अहंकार वश कुछ अपशब्द निकल गया हो तो क्षमा करना ,क्यों कि मैं जानता हूँ कि आपका आशीर्वाद मुझे सब कुछ दे सकता है तो आपका श्राप भी मिटटी मैं मिला सकता है ,|……. प्रभु आप अपरम्पार हैं … महान हैं . ॐ शांति शांति शांति:!

Dr MEERA के द्वारा
November 22, 2013

भारत रत्न वैज्ञानिक की आवेशित भूल  फिर भूल सुधार को बडे रोचक व्यंगात्मक  शैली मैं महा भारत के अर्जुन व भगवान क्रष्ण को आधार बनाते बर्तमान राजनीति पर व्यंग वाह एक तीर से कई सिकार निशाना कहीं आघात किसी और को कोटी  प्रणाम हरिश्र्चंद्र जी 

    jlsingh के द्वारा
    November 24, 2013

    गलत बोल कर के भूल सुधार तो यहाँ की नियति बन चुकी है, फिर भला भारत रत्न चाहे वैज्ञानिक ही क्यों न हो … हालाँकि उसने पहले ही ठीक कहा था!

Dr MEERA के द्वारा
November 22, 2013

भारत रत्न ,वैज्ञानिक का आवेशित गलती फिर भूल सुधार को बडे रोचक व्यंगात्मक  शैली मैं महा भारत के अर्जुन व भगवान क्रष्ण को आधार बनाते बर्तमान राजनीति पर व्यंग ,,वाह एक तीर से कई सिकार ,निशाना कहीं आघात किसी और को कोटी कोटी प्रणाम हरिश्र्चंद्र जी 

yogi sarswat के द्वारा
November 22, 2013

बस एक ही शब्द , वाह !

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 22, 2013

एक बेहतर रचना, सादर, बधाई

Sufi Dhyan Muhammad के द्वारा
November 21, 2013

नमस्कार..! दुविधा में हूँ कि क्या कमेंट करूँ….!!

dineshaastik के द्वारा
November 20, 2013

आदरणीय हरिश्चन्द्र जी, सादर प्रणाम, मैं आपको पापी तो नहीं कह सकता। पापी तो वह हैं जो काल्पनिक ईश्वर का सृजन करके निर्धन एवं निर्बलों का शोषण करते हैं। संसार को अज्ञान के समुद्र में धकेले हुये हैं और  अपना अरबों खरबों का व्यापार स्थापित किये हुये हैं। बहुत ही सुन्दर व्यंग। मेरा तो यही कहना है कि यदि खुदा, ईश्वर या गोड है तो वह अत्यंत अन्यायी, अत्याचारी, हत्यारा, झूठा, छली, अल्पज्ञ, भुलक्कड़,पक्षपाती, अभिमानी, पापी, अपराधी तथा जादूगर है। वह न तो सर्वज्ञ है, न सर्वशक्तिमान, न व्यापक और न ही बात तथा नियम का पक्का है।

seemakanwal के द्वारा
November 19, 2013

बहुत खूब .सादर

sadguruji के द्वारा
November 19, 2013

“आप इस चराचर जगत के पिता और सबसे बड़े गुरु अवं अति पूजनीय हैं ,हे अनुपम प्रभाव वाले तीनों लोकों मैं आपके समान भी दूसरा कोई नहीं है ,फिर अधिक कैसे हो सकता है” बहुत बेहतर लेख.

nishamittal के द्वारा
November 19, 2013

विचार पूर्ण पोस्ट हरिश्चंद्र जी


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