PAPI HARISHCHANDRA

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सचिन की चीख ,मैं धूमकेतु नहीं ,मैं भगवान भी नहीं

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धूमकेतु ,सूर्य के चारों ओर घूमने वाला एक चमकीला पिंड जिसका मध्यवर्ती केंद्र ठोस पदार्थ का बना होता है ,और साथ में गैस की एक पूँछ भी लगी रहती है ,धूमकेतु को पुच्छल तारा भी कहा जाता है ,दुमदार सितारा ,खोलक या सिखावन ज्वालयुक्त ,कबंध ,अदि पर्यायवाची शब्द हैं ,…………………………………………………………,पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के पश्चात निकले अमृत के बॅटवारे पर देवताओं और राक्षशों में समझोता हो गया था तभी कबंध नामक राक्षस ने अमृत को चालाकी से पान कर लिया जिसको सूर्य और चन्द्र देवताओं ने देख लिया ,तब विष्णू भगवान ने उसके सर को धड़ से अलग कर दिया ,अमृत पी चुकने के कारण राक्षस अमर हो चूका था, वही सर राहू बना और धड़ केतु ,,,और भारतीय ज्योतिष में नव ग्रहों में सर्व पीढ़ा कारी ग्रहों के रूप में स्थापित हो गए जो समय समय पर सूर्य चन्द्र देवताओं को भी ग्रहण के रूप में पीड़ीत करते रहते हैं मनुष्यों में तो इनका डसा कभी उभर नहीं पाता, यही केतु जिसकी सर विहीन धड़ वाली धूम यानि धुएं युक्त पूँछ वाली आकृति ही धूम केतु कहलाई ,…………………………………………………………पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ,ज्योतिष के अनुसार धूमकेतु का आगमन अपशकुन लाने वाला माना जाता है ,इसे गिरते तारे की संज्ञा दी जाती है ,इसे देखना किसी अनिष्ट की आशंका माना जाता है ,……………………अरस्तु ने भी अपनी पुष्तक मित्रीयोलॉजी में अशुभ धूमकेतु की चर्चा की थी ,……………………………………राहु केतु के नाम की अशुभता इतनी गहरी मानी जाती रही है की इनके नाम की उपमाएं देकर समाचार पत्र ख़बरें बनाते रहे हैं , या वार्ताएं की जाती हैं ,जैसे राहु केतु के कारण ही बुरे फल हो रहे हैं , ज्योतिष में राहु केतु से पैदा काल सर्प योग को तो इतना भयंकर माना गया है कि इसके प्रभाव वाला व्यक्ति कभी खुद भी सुख चैन से न रहते हुए दूसरों को भी महा कष्ट कारी होता है ,इससे पीड़ीत राजनेता इसी श्रेणी में आते हैं ,………ग्रहों तारों सितारों आदि का अस्तित्व कम चमकीला होने पर भी करोड़ों वर्षों का होता है जो कभी किसी को पीड़ादायक नहीं होते ,यह धूमकेतु तो अपने प्रतिशोध में अपने आप को गैस के रूप में नष्ट करते हुए कीट पतंगों की तरह ही नष्ट कर देते हैं कितना जीवन होता है इनका २०० साल अधिकतम ,पिघलते टूटते गैस में बदलते गायब होते रहते हैं जन मानसों को ,ग्रहों को ,वहाँ की संचार ब्यावताओं को अस्त व्यस्त करते हैं,अपनी कक्षा से भटकते हुए किसी गृह से टकराकर उसे नष्ट भ्रष्ट कर देते हैं क्षुद्र गृह उल्काएं और भी भयंकर प्रभाव से प्रलय लाती हैं ,……………………………………..क्या ऎसे धूमकेतु से तुलना करते सचिन तेंदुलकर का अपमान नहीं होगा ,जिसने कभी किसी का बुरा सोचा तक नहीं करना तो दूर की बात होगी ,जिसने एक योगी की तरह अपने मन को अपने धर्म क्रिकेट पर ही केंद्रीत रखा ,अपने लक्ष्य को कभी भ्रमित नहीं होने दीया ,,…………………………………………………………,,सचिन तुम धूमकेतु नहीं तुम भगवन भी नहीं हो ,तुम ध्रुव तारे जैसे हो , सूर्य , चन्द्र हो ,अजर हो अमर हो ,,,……………………………………………..,भगवान के रूप को आज जितना व्यवसायी बना दिया गया है उतना किसी भी युग में न रहा होगा भगवन की पूजा इसलिए की जाती है कि कुछ माँगा जाये मनौती की आकांशा ही रहती है जो पूरी न होने पर एंग्री यंग मैन जैसी गालीयों के भागी होते हैं ,. सचिन को आज जितना भगवन का रूप दिया जा रहा है वहीँ उसे चोर ,टैक्स चोर ,युधिष्टर की तरह झूठ बोलने वाला ,जिसको जो कमी नजर आ रही है या ढूंढ के निकाली जा रही हैं ,सचिन का नाम न लेकर भगवन कहकर पुकारा जा रहा है भगवन का अंतिम दिन भगवन का अंतिम टेस्ट ,अंतिम मैच ,क्या भगवन का भी कोई आदी या अंत होता है क्या यह भगवन पर या सचिन पर सदाबहार व्यंग नहीं बनते जायेंगे ,,, ,देनी ही थी तो कोई उपाधी दी जाती ,,,,,, ,.यह सचिन का तो अपमान है ही , हमारे हिन्दू धर्म का ,भगवन का ,हमारी आस्थाओं का भी अपमान होगा अतः सचिन का कहना कि मै न धूमकेतु हूँ न भगवन ,,में तो सिर्फ इंसान ही हूँ ,,,,,,,महान व्यक्ति की यह चीख उचित ही है ,,………………………………………………………………………सचिन ,भगवन कृष्ण का अर्जुन को दिया नाम है यह ,,,,,,,सची पति इंद्रा के अंश से पैदा अर्जुन को सचिंद्र नाम दिया, गीता में सब्यासाचिन कह कर भी पुकारा ,गुडाकेश यानि अपने धर्म रुपी कर्तब्य के लिए न सोने वाला भी कहा ,…………………………यहाँ तक कि योगी, कर्म योगी भी कहा ,अपने लक्ष्य से विमुख न होने कि असीम गुणवत्ता उसमें थी ,इन सारे गुणो को सचिन ने अपने पर आत्मसात किया उस युग के योगी अर्जुन रहे तो इस युग के योगी सचिन तेंदुलकर ,,,,अर्जुन के रिकॉर्ड को कोई नहीं तोड़ पाया तो सचिन के रेकॉर्डों को भी कोई नहीं तोड़ पायेगा ,,…………………………………………………………………………………………. कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ,| मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोअस्त्वकर्मणि ||;,,,,…………………………………………………………………………………………….तेरा कर्म करने में ही अधिकार है उसके फलों में नहीं | इसलिए तू कर्मों के फल को न चाह तथा तेरी कर्म करने की आसक्ती हो ,||………………………………………………………………………………………………………….कोई सचिन में भावी प्रधानमंत्री रूपी मन मोहना भी देखने लगे हैं तो कोई भावी राष्ट्रपति का रूप ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,………………………………………………………………………………………………………..राहु का प्रभाव अब सचिन को राजनीती में ले ही जायेगा ,,,…………………………………………………………………………………………………………राजनीती का कृष्ण कौन होगा समय ही बतायेगा ,…………………………………ॐ शांति शांति शांति ,,,,

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
November 18, 2013

हरी चन्द्र जी, नमस्कार ! आपके लेख ने न केवल भारत रत्न सचिन तेंदुलकर की देश को दिया गया सम्मान पर रोशनी ही नहीं डाली बल्की पुराणों में अंकित कम्बन्ध नामका राक्षस द्वारा अमृत चोरी से पीने पर विंष्णु द्वारा उसकी गरदन काटने और उसे दो हिस्सों में राहू और केतु नामांकन पर दिया लिखा गया विस्तार से लेख पर आपको बहुत सारी बधाइयां ! असल में आप बहुतों में एक हैं ! साधुवाद ! हरेन्द्र जागते रहो !

Dr MEERA के द्वारा
November 16, 2013

आदरणीय हरिश्रचंद्र जी ,सादर अभिवादन ,ज्ञान, आलोचना ,व्यंग ,का समावेस बहूत रोचक किया है ,बधाई

sadguruji के द्वारा
November 16, 2013

आदरणीय हरिश्चंद्रजी,सचिन की धूमकेतु से तुलना तो की गई,परन्तु ये तो विचार लोग किये ही नहीं.अनोखी व्याख्या के लिए बधाई.आदरणीय jlsingh जी कि बात सौ फीसदी सही है कि-”राहु का प्रभाव अब सचिन को राजनीती में ले ही जायेगा.”सचिन को खेलमंत्री बना के नेता गण उनकी आड़ में अपना खेल खेलते रहेंगे.

jlsingh के द्वारा
November 16, 2013

कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ,| मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोअस्त्वकर्मणि ||;,,,, राहु का प्रभाव अब सचिन को राजनीती में ले ही जायेगा ,,,…………………………………………………………………………………………………………राजनीती का कृष्ण कौन होगा समय ही बतायेगा ,………………………………… बहुत अच्छी जानकारी के साथ उचित विवेचना! …ॐ शांति शांति शांति ,,,,


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