PAPI HARISHCHANDRA

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आस्था ,,भावनाओं के खिलाडी हैं सब ,,jagran junction forum

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भावनाओं के खिलाडी हैं सब ,,,,,,………………………………………………………………………………………………………. साधारण जन समुदाय की भावनाओं से खेला जाता है , ……………………………………………………………………………………………………….. धर्म ग्रन्थ ,धर्म गुरु ,ब्यावसाई,राजनीतिक दल ,और बर्तमान में सर्व शक्तिमान मीडिया ,कौन नहीं साधारण जन समुदाय की भावनाओं से खेलते है ………………………………………………………………………………………………………,, प्राकृतिक आपदाओं ,सामाजिक ,राजनितिक तौर से पीड़ित ,प्रताड़ित ,आम जन समुदाय को भय आशंका से धर्म आस्था वान होना पड़ता है , ऐसी अवस्था में जब महान धर्म गुरु ,नेता ,समाज के उच्चस्थ स्थापित ब्यक्ति ही अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं ,तो साधारण जन कैसे अपने ऊपर नियंत्रण रख सकेंगे ,वह तो थाली के बैगन की तरह लुड्कते रहते हैं ,कुछ विचार शक्ति आते ही उनकी भावनाओं को अपने अपने स्वार्थानुसार भावनाओं के खिलाडी ढाल देते हैं ,और अपना अपना स्वार्थ पूर्ण करते हैं ………………………………………………………………………………………………………….. पहले धार्मिक ग्रन्थ ,फिर धार्मिक गुरु ,ब्याव्सायी ,प्रशासन ,राजनीतिक पार्टियाँ ,मीडिया सभी अपने अपने ढंग से भय लालच आदि से श्रद्धा ,आस्था को उपजाते है ,,,,जब साधारण जन श्रद्धा आस्था से उत्तेजित हो जाता है तब उनका भरपूर दोहन किया जाता है ,,, …………………………………………………………………………………………………………… ड्रामे का अगला चरण फिर जन समुदाय पर ही थोपते हुए आत्म नियंत्रण को कहा जाता है ,,यह कैसा खेल है ,,,साधारण जन समुदाय की भावनाओं का ,, ………………………………………………………………………………………………………….. एक बन्दर या जानवर को उँगलियों पर नचाने जैसा ही है यह सब ,,, …………………………………………………………………………………………………………… क्यों धर्म गुरु ,धर्म ग्रंथों का सन्दर्भ देते हुए साधारण जन समुदाय को आस्थावान श्रद्धावान बनाते हैं ? ……………………………………………………………………………. क्यों ब्याव्सायी अपने ब्यवसाय को बड़ाने के लिए श्रद्धा आस्था का दोहन करते हैं ? …………………………………………………………………………………………………………. क्यों राजनीतिज्ञ वोट बैंक के लिए धर्मालंबियों की भावनाओं को उकसाकर दोहन करते हैं ? ……………………………………………………………………………………………………. क्यों मीडिया द्वारा भरपूर श्रद्धा आस्थावान होने की ख़बरों को प्रमुखता से बार बार दिखाकर प्रचारित प्रसारित कर आम जन की श्रद्धा आस्था की भावनाओं को प्रफुल्लित कर ब्याव्सयीक लाभ लेते हुए भडकाया जाता है ? ……………………………………………………………………………………………………………….. जब सारे तबके साधारण जन समुदाय की भावनाओं से खेलते रहते हैं तो फिर क्यों साधारण जन से नियंत्रित रहने को कहा जाता है ,,, …………………………………………………………………………………………………………. साधारण जन तो भेड़ समुदाय की तरह ही होता है ,जो ,,, गतानुगति को लोकः ,,की लोकोक्ति पर ही चलता है ,,,,,,,,,,………………………………………………………………………………………………………………,लोकतंत्र को तो भेड़ तंत्र ही कहा जाता है ,,,………………………………………………………………………………………………… कौन करेगा इन सब पर नियंत्रण ,,,,,,………………………………………………………………………………………………..,,क्या राजनीती कर सकती है ,,,,,,,राजनीतिक पार्टियाँ ,राजनेता कर सकते हैं ,,,,,,धर्म ग्रंथों को प्रवाहित किया जा सकता है ,,,या नहीं पढ़ा पढाया जा सकता है ,,,धर्म गुरुओं की वाणी को भुलाया जा सकता है ,,,ब्याव्सईयो के प्रचार से अप्रभावित रहा जा सकता है ,,,खासतौर से हमारी उन्नत मीडिया पर नियंत्रण किया जा सकता है ,,, ………………………………………………………………………………………… सब खेल है ,,,,खेलो ,,,,,,साधारण जन की भावनाओं से ,,,,अपने अपने स्थानों पर सुस्थापित लोगों का खेल ही तो है ,,,,,,,,,,, ……………………………… खेलो जी भर के खेलो ,,,, …………………………………………………………………………………………………………….वेद, शास्त्र ,महात्मा ,और गुरुजनों तथा परमेश्वर के बचनो में विश्वास का नाम श्रद्धा है ..आस्था है …………………………………………. ……………………… विवेकहीन और श्रद्धाराहित संसययुक्त मनुष्य परमार्थ से अवश्य भ्रष्ठ हो जाता है ऐसे संसय युक्त मनुष्य के लिए न यह लोक है ,न परलोक है ,और न सुख ही है ,,………………………………………………………………………………………………………….श्रद्धा आस्था रहित अज्ञानी मनुष्यों के लिए परमेश्वर बहुत बहुत दूर है ,,,,………………………………………………………………………………………………………..श्रद्धावान आस्थावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है जिसको पाकर वो बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत प्राप्ति रूप परम शांति को प्राप्त होता है ,,,,…………………………………………………………………………………………………………ॐ शांति शांति शांति …………………………………………

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dr MEERA के द्वारा
October 20, 2013

हरिश्चंद्र जी सही कहा अपने   सब भावनाऔ से ही तो खेलते हैं हल कुछ भी नही है किसी ने आप की भावनाऔ से खेला ,किसी की भावनाऔ से आप खेलोगे       बधाई 


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