PAPI HARISHCHANDRA

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हे राम ,आशाराम , न बनो परुशराम ,हमें चाहिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम ,हे राम

Posted On: 31 Aug, 2013 Others में

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दीन दुखी जन आशाओ के राम ,आशाराम आप तो परम ज्ञानी हो ..हम आपमे एक मर्यादा पुरुषोत्तम के से भाव देख कर हिन्दू धर्म के लिए या आम जन मानुष के लिए ,एक शांत सहज मार्गदर्शक की ही छवि ही देखना चाहते है हमें इस भवसागर से शांति पूर्वक पार कराने वाला संत ही चाहिए नाकि रोद्र रूप वाले परुशराम ,,आप ही ने सत्संग मै उपदेश दिया था ,,,,,,,,,विषयों का चिंतन करने से विषयो मै आशक्ति होती है आशक्ति से उन विषयो की कामना होती है ,,,और कामना मै विध्न पढ़ने से ….. क्रोध ….. उत्पन्न होता है क्रोध से अत्यंत मूढ़ भाव …..मूढ़ भाव से स्मृति मै भ्रम……भ्रम से बुद्धि यानि ज्ञान शक्ति का नाश हो जाता है और बुद्धि का नाश हो जाने से पुरुष अपनी स्तिथि से गिर जाता है ,,,,,,हे जनता के आशाओ के… आशा राम …आप गृह दशा वश ये हम अज्ञानियो को दिया गया ज्ञान भगवन राम के सेवक हनुमान की तरह भूल गए है ……..आपतो गायत्री मंत्र के सिद्ध संत हो जिसकी सिद्धि से मनुष्य की वाणी मै आशीर्वाद वाली भावनाए ही आती है और सबका भला केवल संसर्ग या सत्संग से ही हो जाता है ……गुरुदेव मेरे अपराध को माफ करना जो मै एक तूचच आप को मार्ग दर्शन की गलती कर रहा हूँ यही सोचकर की सायद आप भी कही हनुमान जी की तरह शापित हो ..आप को स्मरण करा रहा हूँ ……………आपकी कुंडली मै चार चार शत्रु गृह एक ही स्थान पर है सायद वही शत्रु को उभरने का कारण हो ..मेरे विचार से आप जन २००१४ तक गाँधी जी,, नर्सिहराव व मनमोहन सिंह जी की तरह मोन धारण कर ले … वर्ना राजनीती मै उलझा कर आप दलदल मै फंसते जायेंगे वाणी पर संयम रखने के लिए गायत्री मंत्र व ध्यान ही सर्वोत्तम रहेगा ये आप की ही उपदेश है…. मै आप को स्मरण करा रहा हूँ …तत्र मै उलझा कर इस आप राजनीती का मोहरा ही बनोगे …आप को राजनीतिज्ञ व मिडिया किया कुछ रंग मै ना रंग दे ,,, …………….महान पुरुष जैसा आचरण करता है अन्य साधरण लोग भी वैसा आचरण करते है वो जो प्रमाण कर देता है समस्त मनुष्य समुदाय भी वैसा बरतने लगते है अतः आप से जन की उम्मीद है आप राम बनो मर्यादा स्थापित करो …… सब कुछ दुखों का कारण …..काम ….. ही है … इस काम को मर डालो ये आपकी ही उपदेश है …गुरुदेव स्मरण करो ….काम को सिर्फ शिव शंकर ही मार सके है …बड़े बड़े रिसी मुनि भी ..देवता भी नहीं मार सके ……..एक मर्यादा स्थापना करने के लिए भागो मत …कौन किसका किया बिगड़ सकता है यह आत्मा तो अजर अमर है आत्मा को न गिरफ्तार किया जा सकता है न काटा जा सकता है यह आप का ही उपदेश है फिर आप कियो मोहित हो रहे हो अपने अपने कर्मो के अनूसरे सबको फल भोगने दो आप कियो कारणहो रहे हो …….सामने आओ और सबको अपने अपने किये कर्मो का फल भोगने दो हे राम ,,,आशाराम ,,,न बनो परुशराम ,,हम हिन्दू गर्व से सर उठा कर ये कहे मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बाद आशाराम ……जो शांति मर्यादा के करक थे जय श्रीराम राम राम ……मरतु के बाद भी राम राम …………………ॐ शांति…. शांति…. शांति ….

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