PAPI HARISHCHANDRA

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मन मोहन जी ,,मैया मोरी मई नहीं माखन खायो ,,

Posted On: 30 Aug, 2013 हास्य व्यंग में

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मन मोहन जी ,, आप महान ,सर्वज्ञ ,१६ कलाओं से परिपूर्ण हो ,कितनी चतुराइ से अपनी माँ यसोदा को यह कहकर ,,, मैया मोरी मैनाही माखन खायो ,संतूस्ट कर दिया था , गोपीयो का मन, सुख चैन चुरा कर उन्हे धन्य कर दिया था ,,पापियो का पाप चुरा कर उन्हे, मोक्चाया , दिया अर्जुन को गीता का उपदेश देकर , विराट रूप दिखा ,उनके अज्ञान को चुरा कर ,पपिओ के दुखों को चुरा कर उन्हे भक्ति का सुलभ मार्ग दिखाया ,,,, हे प्रभो आप मदन मोहन हो ,,,,आप मनमोहन भी हो ,,,,आप ,,,,पी. ऍम ,,,भी हो मै आप को इस रूप मै भी पहिचान चूका हूँ ,,,आप कियो पापियों के चोर कहे जाने पर क्यों बुरा मन रहे हो ,,,,,,, सदा शांत रहने वाले ,,देश के, कांग्रेस के ,,,,,,,,दुनिया की सबल नारीयो मै एक महान शांत , किसी भी नस्वर वस्तू की आशा न करने वाली पद की चाहत न करने वाली ,देश की आधार,,,कांग्रेस की आधार , ,,के भी मनमोहन हो ,,,आप अर्थ शास्त्र के महान पंडित हो ,,ब्यर्थ मै बाद विबाद करना आप का स्वभाव नहीं है ,,,दुनिया आप के अर्थ शास्त्र का लोहा मानती है फिर आप क्यों बुरा मान रहे हो मै समझ रहा हूँ यह भी आप के अर्थ शास्त्र का ही अंग होगा आप जैसे बाल सुलभ बातो से मन मोह लेते थे ऐसी आर्थिक संकट की घडी मै मन मोहते संकट से उबारोगे देश को भी कांग्रेस को भी ,,प्रभो आप ,,इस रूप मै बाल क्रिशन से भी कम मोहक नहीं हो आपके अर्थ शास्त्र को मै समझ रहा हूँ ,,आप रूपये की वैल्यू कम होने का लाभ एक्सपोर्ट के बदने मै देख रहे हो जिससे बिदेसी मुद्रा अपने आप भविष्य मै आनी शुरु हो जायेगी जब रोजगार की कमी होगी तब विदेशों को रोजगारमुखी होकर देस के लिए विदेसी मुद्रा अर्जित होगी ,आम जनता के कस्टो को दूर करने व महगाई ,,से जूझने की भविष्य गोचर करके आपने पहले ही खाद्य सुरकचा बिल को कानून का रूप सहजता से दे दिया आप भूत भविष्य बर्तमान के ज्ञाता हो फिर हमे क्यों दुःख होगा ,अर्थ शास्त्र के नियमानूसार अर्थ ब्यवस्था मै उतर चढ़ाव आते रहते है हर पीक पॉइंट , अवस्य ही गिरता है यह यूनिवर्सल ट्रुथ है इससे दुनिया का कोई भी देश अछूता नहीं बचाहाई ,आपने इस संकट को बहादुरी से ही शांत संयम से ही विवेक पूर्ण ढंग से निभाया है मुझे विस्वास है आप अवस्य ही देस को संकट से सुगमता से उबारेंगे ,,,आप महान है आप चोर कैसे हो सकते है आप अपने जीवन के पद के अंतिम समय मै भी जिस धैर्य से सामना कर रहे है वो भी बिना किसी अपनी लोभ के ,,,आप धन्य है l

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seemakanwal के द्वारा
August 30, 2013

चुटीली रचना ,हार्दिक आभार

    PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
    August 31, 2013

    शीमित चुटीला कमेंन्ट ,घन्यवाद 


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